तमिलनाडु में इन दिनों एक दिलचस्प राजनीतिक बहस चल रही है। मुद्दा है सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ और ‘वंदे मातरम्’ (Vande Mataram) के बीच क्रम का। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय चाहते हैं कि राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत पहले ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से हो। इसके बाद ‘वंदे मातरम्’ और फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया जाए। गौरतलब है कि विजय सरकार ने इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव भी रखा है। इसके साथ ही राज्य में एक बार फिर भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
इस पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह से हुई। समारोह में पहले ‘वंदे मातरम्’, फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और उसके बाद ‘तमिल थाई वाझ्थु’ (Tamil Thaai Vazhthu) प्रस्तुत किया गया। यहीं से सवाल उठने लगे। वजह यह थी कि तमिलनाडु में लंबे समय से सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से करने की परंपरा रही है। ऐसे में राज्य गीत को सबसे आखिर में रखने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
‘तमिल थाई वाझ्थु’ आखिर है क्या?
‘तमिल थाई वाझ्थु’ का अर्थ है ‘तमिल माता की स्तुति’। यह प्रसिद्ध तमिल कवि मनोन्मनियम सुंदरनार की रचना मनोन्मनियम के शुरुआती हिस्से से लिया गया है। तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इस गीत से करने की व्यवस्था 1970 में की गई थी। इसके बाद दिसंबर 2021 में इसे आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु का राज्य गीत घोषित किया गया। यानी यह कोई नई परंपरा नहीं है। राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में इसे प्रमुख स्थान मिलने की शुरुआत करीब पांच दशक पहले हुई थी।
वंदे मातरम् को लेकर क्या बदला?
यहां ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ की भूमिका समझना भी जरूरी है। ‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। 2026 में केंद्र की ओर से ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति को लेकर नया प्रोटोकॉल सामने आया। इसमें उन औपचारिक कार्यक्रमों के लिए क्रम तय किया गया, जहां ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाने हों। इसी क्रम के तहत विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी पहले ‘वंदे मातरम्’ और फिर राष्ट्रगान हुआ। ‘तमिल थाई वाझ्थु’ इसके बाद प्रस्तुत किया गया। यही अब विवाद की मुख्य वजह बना हुआ है।

तमिलनाडु में छिड़ी ‘तमिल बनाम वंदे मातरम्’ की बहस। AI IMAGE
विजय आखिर चाहते क्या हैं?
मुख्यमंत्री विजय की मांग सीधी है। तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत राज्य गीत से होनी चाहिए। उनका तर्क है कि ‘तमिल थाई वाझ्थु’ तमिल भाषा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है और राज्य में लंबे समय से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इसी से होती रही है। प्रस्ताव के मुताबिक सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में सबसे पहले ‘तमिल थाई वाझ्थु’ प्रस्तुत किया जाए।
इसके बाद ‘वंदे मातरम्’ और अंत में ‘जन गण मन’ का क्रम रखा जा सकता है। इस मांग को सिर्फ विजय की पार्टी का समर्थन नहीं मिला है। तमिलनाडु की कई प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी राज्य गीत को पहले स्थान पर रखने के पक्ष में नजर आई हैं।

आइए समझते हैं वंदे मातरम् को लेकर विवाद क्या है। AI IMAGE
बताते चलें कि इसे सीधे तौर पर ‘वंदे मातरम्’ के विरोध के रूप में देखना सही नहीं होगा। विवाद इस बात को लेकर है कि किस गीत को पहले प्रस्तुत किया जाए। विजय सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों में राज्य गीत की पुरानी परंपरा भी बनी रहनी चाहिए।
यानी विजय सरकार जिस क्रम की मांग कर रही है, वह है, तमिल थाई वाझ्थु → वंदे मातरम् → जन गण मन जबकि मौजूदा विवाद की स्थिति में दूसरा क्रम है, वंदे मातरम् → जन गण मन → तमिल थाई वाझ्थु।
तमिलनाडु में यह मुद्दा इतना बड़ा क्यों है?
तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। तमिल भाषा को यहां केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति और पहचान के अहम हिस्से के रूप में देखा जाता है। इसलिए ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को कार्यक्रम में सबसे पहले स्थान देना महज प्रोटोकॉल का मामला नहीं है। इसे तमिल भाषा और तमिल पहचान के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि राज्य गीत के क्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच भी काफी हद तक सहमति दिखाई दे रही है।
विधानसभा में प्रस्ताव आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की पुरानी परंपरा और केंद्र के प्रोटोकॉल के बीच रास्ता कैसे निकलेगा। तमिलनाडु सरकार चाहती है कि सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को शुरुआत में अनिवार्य किया जाए। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो राज्य के सरकारी समारोहों में गीतों का क्रम स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन इसके साथ केंद्र और राज्य के प्रोटोकॉल के बीच तालमेल का सवाल भी महत्वपूर्ण रहेगा।
विजय सरकार का संदेश साफ है—‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत उसकी अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से होनी चाहिए।
