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राहुल गांधी जोड़ते रह गए भारत, ...और कांग्रेस के चलते डूब गया विपक्षी गठबंधन INDIA

Lok Sabha Chunav: पहले भारत जोड़ो यात्रा, फिर भारत जोड़ो न्याय यात्रा... राहुल गांधी बार-बार देश को जोड़ने के तमाम दावे कर रहे हैं और विपक्षी दलों का गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस 'INDIA' टूटता जा रहा है। इस टूट की वजह सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस है। समझें सारा विवाद।

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बिखर रहा है विपक्षी गठबंधन INDIA।

Photo : Times Now Digital

पहले पश्चिम बंगाल, फिर बिहार, अब पंजाब और हरियाणा... विपक्षी दलों का गठबंधन 'INDIA' का अस्तित्व अधर में लटका हुआ है। ममता बनर्जी ने कांग्रेस के चलते इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस से सारे रिश्ते-नाते तोड़ लिए। कांग्रेस को कसूरवार बताकर बिहार में नीतीश कुमार ने लालू के पांव तले जमीन खींच ली। अब अरविंद केजरीवाल ने भी अलग राह अपनाने का ऐलान कर दिया है। पंजाब और हरियाणा में कांग्रेस की सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

रस्सी जल गई, पर नहीं गई कांग्रेस की ऐंठन

जो-जो क्षेत्रीय पार्टियां विपक्षी गठबंधन INDIA के कन्नी काट रही हैं, उनकी असल दुश्मनी सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस से ही है। कांग्रेस को न जाने कि बात का गुमां है, जो उसे ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव के साथ होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कांग्रेस थोड़ी मजबूत स्थिति में होती तो इस घमंड का कारण भी समझ आता, मगर पार्टी नेताओं के रवैये से ये कहावत याद आती है कि रस्सी जल गई, पर ऐंठन नहीं गई।

राहुल गांधी जोड़ते रह जाएंगे भारत, मगर...

भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी की छवि में अच्छा खासा सुधार हुआ था, कर्नाटक और तेलंगाना में पार्टी ने सरकार बनाई। शायद कांग्रेस को ऐसा लगने लगा कि राहुल फैक्टर इस बार काम कर जाएगा, तभी INDI गठबंधन को टूटने से बचाने से ज्यादा उन्हें भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकालने की पड़ी है। नीतीश, ममता, केजरीवाल और अखिलेश सभी को कांग्रेस से ही दिक्कत है, पर कांग्रेस को ये बात समझ नहीं आ रही, अगर आती तो शायद राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकालने से पहले INDIA को टूटने से बचाने की कोशिश करते।

राहुल गांधी ने बंगाल से देशभर में अन्याय के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने की अपील की है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ सीट बंटवारे को लेकर विपक्षी गठबंधन में मतभेदों के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को बंगाल और बंगालियों से देश में व्याप्त अन्याय के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने का आह्वान किया। ममता का असल दर्द यही था कि एक तो राज्य में अधीर रंजन उन्हें और उनकी सरकार को कोसते रहते हैं और गठबंधन में साथी होने के बावजूद कांग्रेस और राहुल ने ये बताना जरूरी नहीं समझा कि वो पश्चिम बंगाल से यात्रा निकाल रहे हैं।

पंजाब और हरियाणा में भी INDIA को खतरा

विपक्षी दलों का गठबंधन INDIA को हरियाणा और पंजाब में भी खतरा है। सीएम भगवंत मान पहले ही ये ऐलान कर चुके हैं कि पंजाब की सभी 13 सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी, वहीं रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कह दिया कि हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीट पर AAP अपने दम पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन लोकसभा चुनाव विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के साथ मिलकर लड़ेगी। हालांकि अगर चुनाव आते-आते केजरीवाल भी नीतीश की तरह पलट जाते हैं और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर देते हैं तो कोई खास हैरानी नहीं होगी।

INDI गठबंधन में अकेली रह जाएगी कांग्रेस?

राहुल की ये यात्रा 67 दिनों में 6,713 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली है। यह यात्रा 20 या 21 मार्च को मुंबई में समाप्त होने से पहले 15 राज्यों के 110 जिलों से होकर गुजरेगी। अगर इसी तरह विपक्षी गठबंधन के घटक दल अलग होते रहेंगे तो एक वक्त ऐसा आएगा कि विपक्षी गठबंधन INDIA में कांग्रेस पार्टी अकेली रह जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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