कभी राजनीतिक रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर उर्फ PK अब खुद एक पॉलिटिशियन हैं, भारतीय राजनीति में आने से पहले आठ साल तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य में काम किया फिर वो देखते ही देखते भारतीय राजनीति के लिए एक ऐसा नाम हो गया जिसका नाम चुनाव में सफलता का पर्याय बनता रहा, पीके ने राजनीति की ताकत को बेहद करीब से देखा और बाद में खुद ही इसका हिस्सा बनने की सोची और इस सोच को फलीभूत भी किया।
साल 2022 मई में प्रशांत किशोर ने एक ट्वीट के साथ अपना खुद का एक राजनीतिक संगठन बनाने का संकेत दिया जिसमें कहा गया था कि यह 'असली मालिक, जनता' के पास जाने और 'जन सुराज-जन सुशासन' के रास्ते पर चलने का समय है... 2024 को किशोर ने जन सुराज अभियान को एक औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में घोषित किया, जिसे जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) के नाम से जाना जाता है।

PK
बता दें कि हाल के उपचुनावों में जन सुराज ने 10 फीसदी वोट शेयर हासिल कर छोटी ही सही पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
अब साल 2025 में बिहार विधानसभा के चुनाव सिर पर खड़े हैं ऐसे में सत्तारूढ़ और विपक्षी दल इसे लेकर कील-कांटे दुरूस्त करने में लगे हैं वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी एक नए सियासी विकल्प के रूप में उभरने की कवायद में जुटी है, PK इस बार सधे हुए कदमों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, एक निगाह -

Prashant Kishor PK
- बिहार की बात करें तो ये काफी विविधताओं से भरा हुआ प्रदेश है, बताते हैं कि प्रशांत किशोर की रणनीति सामाजिक विविधता, ज्यादातर स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय समीकरणों पर है
- बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने खास तैयारियां की हैं और उसे अमलीजामा पहनाने में वो सधे कदमों से आगे बढ़ रहे हैं
- पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री वृषण पटेल जैसे कई नेता जनसुराज पार्टी में शामिल हो चुके हैं और ये सिलसिला जारी है
- वहीं बीजेपी के पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को जन सुराज पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है
- जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर 20 मई से से एक बार फिर से बिहार की यात्रा पर निकले हैं, इस यात्रा का नाम 'बिहार बदलाव यात्रा' रखा गया है
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) की जन्मस्थली सिताबदियारा से पीके अपनी यात्रा की शुरुआत की और हर दिन 2-3 विधानसभा क्षेत्रों में प्रशांत किशोर जाएंगे
- इस 120 दिनों में पीके बिहार की 243 विधानसभा सीटों को साधने की कोशिश करेंगे और इसके लिए हर जगह के हिसाब से होमवर्क किया गया है
- इस बिहार यात्रा पर पीके एक-एक सीट के लिए जनसमर्थन जुटायेंगे हर दिन 2 विधानसभा सीटों में वे पहुंचेंगे, पार्टी के कई अन्य नेता भी मौजूद रहकर लोगों से वोट की अपील करेंगे
- बिहार चुनाव में महागठबंधन का मुकाबला एनडीए से है पर पीके मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया जाए इस कोशिश में लगे हुए हैं और इस दिशा में काम भी कर रहे हैं
- इसी रणनीति के तहत जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज में शामिल हो गए हैं और उनकी पार्टी 'आसा' का विलय हो गया है
'बिहार बदलाव यात्रा' का उद्देश्य बिहार सरकार द्वारा जातिगत जनगणना, भूमि सर्वे और दलित महादलित समाज के विकास के मुद्दों पर किए गए कथित धोखे को उजागर करना भी है गौरतलब है कि हाल ही में हुए बिहार विधानसभा के उपचुनावों में जन सुराज को हार मिली थी पर PK इस बार दमखम के साथ फिर से जुट गए हैं इस कवायद के नतीजों का इंतजार लोगों को है...
