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नीतीश कुमार का सफरनामा : 10 बार मुख्यमंत्री, 6 बार लोकसभा सदस्य और अब राज्यसभा की बारी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने CM पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला किया है। इस तरह से बिहार में नीतीश युग का अंत होने जा रहा है। नीतीश कुमार ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, 6 बार वह लोकसभा सदस्य रहे और अब राज्यसभा जा रहे हैं। यहां पढ़ें उनका पूरा सफरनामा।

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ये है नीतीश कुमार का राजनीतिक सफरनामा

आज से सूर्योदय के साथ बिहार में नीतीश युग का अंत हो रहा है। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर खबरें तो कल यानी बुधवार 4 मार्च 2026 से ही आने लगी थीं, लेकिन खबरों पर मुहर नहीं लग पा रही थी। आखिर आज सुबह 11 बजे से कुछ ही मिनट पहले स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि उनकी इच्छा राज्यसभा जाने की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनका बिहार से संबंध बना रहेगा और नई सरकार को उनका सहयोग और मार्गदर्शन बना रहेगा। आज इस अवसर पर चलिए आज जानते हैं दवा की पुड़िया बनाने वाले मुन्ना से लेकर नीतीश कुमार बनने तक का उनका पूरा सफर।

बख्तियारपुर में जन्मे नीतीश कुमार

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता कविराज राम लखन सिंह आयुर्वेदिक वैद्य थे। बचपन में नीतीश कुमार का नाम मुन्ना था और माता-पिता के साथ ही आस-पड़ोस और रिश्तेदार भी उन्हें इसी नाम से पुकारते थे। बचपन में नीतीश कुमार अपने पिता से काफी प्रभावित थे। उनके पिता के पास जब ज्यादा मरीज आ जाते थे तो वह आयुर्वेदिक दवाओं की पुड़िया बनाकर पिता की मदद किया करते थे।

छात्र नेता के तौर पर नीतीश ने मुख्यमंत्री को झुका दिया था

नीतीश कुमार के पिता एक आयुर्वेदिक डॉक्टर होने के साथ ही कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य भी थे। बालक के तौर पर मुन्ना ने बचपन से ही अपने घर में राजनीतिक माहौल देखा। जब वह कॉलेज गए तो वहां भी वह जल्द ही छात्रों के बीच फेमस हो गए और छात्र नेता बन गए। इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों को इतने प्रभावशाली ढंग से तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय के आगे रखा कि उन्हें भी झुकना पड़ा और उन्होंने छात्रों की मांगें मान लीं।

छात्र राजनीति से इमरजेंसी में जेल की यात्रा तक

नीतीश कुमार पटना में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग अब NIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद ट्रेनी इंजीनियर के तौर पर रांची में बिजली विभाग की नौकरी करने चले गए। नीतीश का मन नौकरी में नहीं लगा, क्योंकि वह राजनीति के लिए जो बने थे। नौकरी छोड़कर वह पटना लौट आए। जेपी आंदोलन के दौरान जेपी ने नीतीश कुमार को संचालन समिति में जगह दी। 1975 में जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नेतृत्व में देश में इमरजेंसी लगाई गई तो नीतीश कुमार भी गांव-गांव छिपकर काम करते रहे। लगभग एक साल बाद वह पुलिस के हाथ आए। 10 जून 1976 को उन्हें भोजपुर जिले के दुबौली गांव से गिरफ्तार किया गया। इमरजेंसी के दौरान नीतीश कुमार 9 महीने तक आरा, बक्सर और भागलपुर की जेलों में रहे।

लगातार दो चुनाव हारकर टूट गए नीतीश कुमार

इमरजेंसी के दौरान जेल की हवा खाने के बाद तो यह साफ हो गया कि नीतीश कुमार ने अपने को पूरी तरह से राजनीति के लिए समर्पित कर दिया है। आंदोलन अलग बात होती है, लेकिन चुनावी राजनीति का रंग अलग होता है। 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने उन्हें नालंदा की हरनौत सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1980 के चुनाव में उन्हें एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया गया और एक बार फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लगातार दो चुनावों में हार के बाद नीतीश कुमार काफी हताश हो गए, उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा रहने लगा। इस बीच उनकी गर्भवती पत्नी मंजू मायके चली गईं। लगातार हार से निराश नीतीश कुमार ने राजनीति छोड़कर सिविल कॉन्ट्रैक्टर बनने का फैसला कर लिया।

कभी राजनीति छोड़ने का बना लिया था मन

फिर समाजवादी नेता चंद्रशेखर ने उन्हें राजनीति में रहने के लिए मनाया। अगर चंद्रशेखर नहीं मनाते तो नीतीश कुमार आज सिविल कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर रिटायर होकर बिहार में कहीं गुमनामी की जिंदगी जी रहे होते। लेकिन नीतीश कुमार गुमनामी की जिंदगी जीने के लिए पैदा नहीं हुए थे। वह बिहार के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे और कभी आयुर्वेदिक दवा की पुड़िया बनाने वाले मुन्ना स्वयं राज्य को गरीबी व पिछड़ेपन की बीमारी से बाहर निकालने वाली दवा बन गए।

10 बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

नीतीश कुमार बिहार के अब तक के सबसे सफल राजनेता और मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में वह NDA की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा रहे और उनके चेहरे पर NDA 202 सीटें पर जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटा। इस तरह से नीतीश कुमार बिहार के सबसे भरोसेमंद नेता बन गए। बिहार की जनता ने नीतीश कुमार पर ठीक उसी तरह भरोसा जताया, जैसा कभी बचपन में उनके आयुर्वेदिक वैद्य पिता अपने मुन्ना पर दवा की पुड़िया बनाने के लिए करते थे।

राजनीतिक सफर का अंतिम पड़ाव

आज नीतीश कुमार ने बिहार में मुख्यमंत्री का पद छोड़ने का मन बना लिया है। बिहार में NDA के पास जो संख्या बल है, उसके अनुसार NDA के पांचों उम्मीदवार आसानी से जीतकर राज्यसभा पहुंच जाएंगे। नीतीश कुमार अब राज्यसभा की राजनीति करेंगे। इससे पहले नीतीश कुमार 6 बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। केंद्र की प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह रेलवे मंत्री भी रहे। लेकिन अब वह अपनी राजनीतिक पारी के अंतिम पड़ाव पर हैं। राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है और इतने लंबे राजनीतिक सफर के बाद नीतीश कुमार के लिए राज्यसभा सदस्य के तौर पर उनकी यह पारी राजनीतिक सफर को विराम देने का मार्ग भी हो सकता है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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