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Mukhtar Ansari Family: दादा कांग्रेस अध्यक्ष, नाना ब्रिगेडियर और चाचा उपराष्ट्रपति, जानिए मुख्तार अंसारी की फैमिली में कौन-कौन?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 29, 2024, 05:00 PM IST

Mukhtar Ansari Family Tree: वक्त किसी को भी अर्श से फर्श पर ला पटकता है। ऐसी ही कहानी माफिया मुख्तार अंसारी की है। एक समय उसके परिवार की गिनती गाजीपुर के पहले राजनीतिक परिवार में होती थी। यह परिवार सबसे प्रतिष्ठित और पढ़े-लिखे परिवारों में गिना जाता था, लेकिन समय ऐसा बदला कि इस परिवार की पहचान अपराध की दुनिया से होने लगी।

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मुख्तार अंसारी

Photo : Times Now Digital

Mukhtar Ansari Family Tree: मुख्तार अंसारी ने अपराध का ऐसा साम्राज्य तैयार किया था कि प्रशासन भी उसके सामने नतमस्तक रहा। कहा जाता है कि एक समय मुख्तार का खौफ इतना ज्यादा था कि वह जिस सड़क पर अपनी जीप पर सवार होकर निकलता, लोग रास्ता बदल देते। एक समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी हमला करवाने में भी उसका नाम सामने आया था। कल देर रात मुख्तार अंसारी की मौत हो गई और इसी के साथ उसका साम्राज्य भी ताश के पत्ते की तरह बिखर गया।

कहते हैं वक्त किसी को भी अर्श से फर्श पर ला पटकता है। ऐसी ही कहानी माफिया मुख्तार अंसारी की है। एक समय उसके परिवार की गिनती गाजीपुर के पहले राजनीतिक परिवार में होती थी। यह परिवार सबसे प्रतिष्ठित और पढ़े-लिखे परिवारों में गिना जाता था। मुख्तार के पुरखे कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर उपराष्ट्रपति और सेना में ब्रिगेडियर तक लोग रह चुके हैं। हालांकि, समय ऐसा बदला कि इस परिवार की पहचान अपराध की दुनिया से होने लगी। आइए जानते हैं उसके परिवार के बारे में...

दादा स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस अध्यक्ष

मुख्तार अंसारी के दादा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी का जन्म 1880 में गाजीपुर में ही हुआ था। उन्होंने मद्रास से डॉक्टरी की ओर इसके बाद यूके से एमएस और एमडी की डिग्री ली। महात्मा गांधी से प्रभावित होकर वह कांग्रेस में शामिल हुए और उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि 1926-27 में कांग्रेस अध्यक्ष थी रहे। मुख्तार के दादा जामिया विश्वविद्यालय के फाउंडिंग मेंबर भी रहे हैं।

नाना सेना में ब्रिगेडियर, मिला महावीर चक्र

रिपोर्ट के अनुसार, माफिया मुख्तार के नाना मोहम्मद उस्मान भारतीय सेना में ब्रिगेडियर थे। वह तीन जुलाई 1948 को पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ते हुए कश्मीर के नौशेरा में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से भी नवाजा गया था। वहीं मुख्तार अंसारी के पिता सुभानउल्ला अंसारी भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे, वह एक साफ-सुथरी छवि के नेता थे।

चाचा सबसे ज्यादा समय तक रहे उपराष्ट्रपति

देश के सबसे लंबे समय तक उपराष्ट्रपति रहने वाले हामिद अंसारी भी मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। हामिद अंसारी विवादों में भी रहे। इसके अलावा मुख्तार के परिवार में उसका सांसद भाई अफजाल अंसारी और सिबकतुल्लाह अंसारी है, वह विधायक रह चुके हैं। वहीं, मुख्तार अंसारी के दो बेटे हैं- अब्बास अंसारी और उमर अंसारी। अब्बास अंसारी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट से 2022 में मऊ से विधानसभा चुनाव जीता। वह निशानेबाजी में तीन बार का राष्ट्रीय चैंपियन भी रहा है और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के साथ खेल चुका है। हालांकि, फिलहाल वह अब्बास अभी जेल में बंद है। वहीं, दूसरे बेटे उमर अंसारी के खिलाफ छह मुकदमे दर्ज हैं, वह जमानत पर जेल से बाहर है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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