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एक राजा को क्यों पड़ती है ताजपोशी की जरूरत, महारानी की मौत के आठ महीने बाद क्यों हो रहा ब्रिटेन में शाही समारोह?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 6, 2023, 02:22 PM IST

King Charles coronation: ब्रिटेन के लोगों ने आज से 70 साल पहले महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ताजपोशी को देखा था। हालांकि, इन 70 सालों में बहुत कुछ बदल चुका है। यह बदलाव इस समारोह में देखा जा सकता है।

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एक राजा को क्यों पड़ती है ताजपोशी की जरूरत, महारानी की मौत के आठ महीने बाद क्यों हो रहा ब्रिटेन में शाही समारोह?

King Charles coronation:ब्रिटेन के महाराजा किंग चार्ल्स तृतीय की ताजपोशी को आज दुनिया देखे रही है। शाही तड़क-भड़क के साथ इस समारोह में वह सबकुछ हो रहा है, जिसके लिए ब्रिटेन पूरी दुनिया में मशहूर है। ब्रिटेन के राजपरिवार ने इस खास आयोजन के लिए दुनियाभर से करीब 2000 मेहमानों को आमंत्रित किया है। इसमें भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ भी शामिल हैं। वह शुक्रवार को ब्रिटेन की राजधानी लंदन पहुंचे।

ब्रिटेन ने इससे पहले इस तरह का शाही समारोह आज से 70 साल पहले देखा था, जब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ताजपोशी की गई थी। बीते साल आठ सितंबर, 2022 को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हो गया था, जिसके बाद उनके बेटे किंग चार्ल्स तृतीय को ब्रिटेन का राजा घोषित किया गया था, जिनकी ताजपोशी अब की जा रही है। हालांकि, इस शाही समारोह को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी हैं, जैसे- महारानी की मृत्यु के आठ महीने बाद यह ताजपोशी क्यों हो रही है और किंग चार्ल्स को इस ताजपोशी की क्या जरूरत है? आइए जानते हैं...

पहले जानिए शाही समारोह में क्या होगा?

ब्रिटेन के लोगों ने आज से 70 साल पहले महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ताजपोशी को देखा था। हालांकि, इन 70 सालों में बहुत कुछ बदल चुका है। यह बदलाव इस समारोह में देखा जा सकता है। इस समारोह के दौरान ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय और उनकी पत्नी कैमिला पार्कर बाउल्स पर पवित्र तेल छिड़का जाएगा। यह ताजपोशी की सबसे जरूरी प्रक्रियाओं में से एक है। ब्रिटेन के महाराजा अपनी पत्नी के साथ डायमंड जुबली स्टेट कोच में बैठकर राजमहल से वेस्टमिंस्टर एबे जाएंगे। इसके बाद वह गोल्ड स्टेस्ट कोच से वापस राजमहल आएंगे। ब्रिटेश की शाही परंपरा में यह वह समारोह होता है, जब ब्रिटेन के राजा के सिर पर वास्तविक तौर पर ताज रखा जाता है।

क्यों होती है ताजपोशी की जरूरत?

ब्रिटेन के शाही उत्तराधिकारी कानून के मुताबिक, राजा या रानी की मृत्यु के तुरंत बाद सिंहासन उनके बेटे चार्ल्स के पास चला गया। हालांकि, उनकी ताजपोशी का आयोजन पूरी तरह से धार्मिक, संस्कार पूर्ण और पारंपरिक कार्यक्रम होता है। इस दौरान वह ब्रिटिश कानून और चर्च ऑफ इंग्लैंड को कायम रखने की शपथ लेते हैं। साथ ही ब्रिटेन की शाही परंपरा के अनुसार, सम्राट को औपचारिक रूप से गद्दी पर बिठाया जाता है और उन्हें ताज पहनाया जाता है।

आठ महीने बाद क्यों हो रही ताजपोशी?

ब्रिटेन के शाही नियमों के अनुसार, किसी राजा या रानी की मृत्यु के बाद नए राजा का राज्याभिषेक शोक की अवधि पूरी होने के बाद ही होता है। यही कारण है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के आठ महीने बाद किंग चार्ल्स तृतीय का राज्याभिषेक किया जा रहा है। इसी तरह जैसे किंग जॉर्ज की छह फरवरी 1952 को मृत्यु के बाद सिंहासन महारानी एलिजाबेथ के पास चला गया था, लेकिन शोक की अवधि पूरी होने के बाद उनकी ताजपोशी दो जून 1953 को हुई थी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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