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History of Lakshadweep: हिंदू-बौद्ध बहुल लक्षद्वीप कैसे बन गया इस्लाम बहुल, जानिए इसका इतिहास

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jan 8, 2024, 01:38 PM IST

History of Lakshadweep: लक्षद्वीप और इसके समुद्र तटों का अधिकांश हिस्सा पर्यटन की दृष्टि से अनजान है। इसकी अधिकांश आबादी आमतौर पर कुल 36 में से 9-10 द्वीपों पर रहती है।

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लक्षद्वीप का इतिहास

History of Lakshadweep: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे और पड़ोसी देश मालदीव के मंत्रियों की अपमानजनक टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप और उसकी खूबसूरती को लेकर चर्चा हो रही है। पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया पोस्ट से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मालदीव को झटका लगने की अटकलें तेज हो गई हैं। इससे मालदीव के मंत्री इतने घबराए कि उन्होंने बेबुनियाद बयान दिए जिसके बाद उन्हें अपने पद से निलंबित कर दिया गया।

गूगल पर सबसे अधिक सर्च

पीएम मोदी के दौरे के बाद लक्षद्वीप गूगल सर्च पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला कीवर्ड बन गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और वहां के लोगों के गर्मजोशी भरे आतिथ्य के बारे में लिखा। इस बीच, हजारों लोगों ने मालदीव की अपनी यात्रा रद्द कर दी और सोशल मीडिया पर #BoycottMaldives हैशटैग ट्रेंड करने लगा।

लक्षद्वीप द्वीप समूह का इतिहास

हिंदुओं और बौद्धों की भूमि लक्षद्वीप मुस्लिम बहुल कैसे हो गई और इसका इतिहास क्या है, ये सवाल आपने मन में जरूर आता होगा? लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है। 32 द्वीपों के इस द्वीपसमूह में अब 36 द्वीप हैं। लक्षद्वीप की मौजूदा प्रशासनिक राजधानी कावारत्ती (Kavaratti) है। यहां की 96 फीसदी से ज्यादा आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। हालांकि, लक्षद्वीप पहले मुस्लिम बहुल नहीं था। यहां हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी रहते थे।

लक्षद्वीप तक कैसे पहुंचा इस्लाम?

लक्षद्वीप में इस्लाम की शुरुआत 631 ई. में एक अरब सूफी उबैदुल्लाह द्वारा की गई थी। सरकारी दस्तावेज़ कहते हैं कि लक्षद्वीप में इस्लाम का आगमन 7वीं शताब्दी ईस्वी सन् 41 हिजरी के आसपास हुआ था। राजा चेरामन पेरुमल द्वारा स्थापित इस द्वीपसमूह में अमिनी, कल्पेनी एंड्रोट, कावारत्ती और अगत्ती सबसे पुराने बसे हुए द्वीप हैं। राजा चेरामन पेरुमल ने 825 ई. में इस्लाम धर्म अपना लिया, क्योंकि अरबों से संपर्क और व्यापार के कारण कहीं न कहीं उनका प्रभाव इस द्वीप पर भी था।

लक्षद्वीप 1956 में केंद्र शासित प्रदेश बना

11वीं शताब्दी के दौरान इस द्वीपसमूह पर अंतिम चोल राजाओं और फिर कन्नानोर के राजाओं का शासन था। बाद में पुर्तगाली और फिर 16वीं शताब्दी के बाद चिरक्कल हिंदू शासकों और फिर अरक्कल मुसलमानों, फिर टीपू सुल्तान और फिर अंग्रेजों ने लक्षद्वीप में शासन किया। 1947 में आजादी के बाद 1956 में भाषा के आधार पर इसे भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी में मिला दिया गया। इसके बाद इसे केरल राज्य में शामिल कर दिया गया। फिर उसी साल लक्षद्वीप को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। पहले इसे लैकाडिव (Laccadive), मिनिकॉय (Minicoy) और अमिनदीवी (Amindivi) के नाम से जाना जाता था। 1971 के बाद इस क्षेत्र का नाम बदलकर लक्षद्वीप कर दिया गया।

अधिकांश हिस्सा पर्यटन के नजरिए से अनजान

लक्षद्वीप और इसके समुद्र तटों का अधिकांश हिस्सा पर्यटन की दृष्टि से अनजान है। इसकी अधिकांश आबादी आमतौर पर कुल 36 में से 9-10 द्वीपों पर रहती है। इसलिए, लक्षद्वीप और उसके समुद्र तटों का अधिकांश भाग पर्यटन के नजरिए से अज्ञात है। देश के अन्य राज्यों से यहां आने से पहले लक्षद्वीप पर्यटन से अनुमति लेनी होती है। यहां यात्रा के लिए नकदी लाना बेहतर है क्योंकि लक्षद्वीप के कई इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है। बंगाराम द्वीप को छोड़कर सभी द्वीपों पर निषेध है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक लक्षद्वीप में प्रशासन चलाता है।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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