Om Prakash Chautala : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला का शुक्रवार को उनके गुरुग्राम स्थित आवास पर निधन हो गया। चौटाला ने 89 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार आते ही उनके चाहने वालों एवं प्रशंसकों में शोक की लहर थौड़ गई। हरियाणा की राजनीति में चौटाला का कद बहुत बड़ा था। वह पूर्व डिप्टी पीएम देवीलाल के पुत्र थे और वह पांच बार हरियाणा के सीएम रहे।
बिना चौटाला परिवार के हरियाणा की सियासत की कहानी पूरी नहीं होती है।
सिरसा जिले की डबवाली तहसील का चौटाला गांव देवीलाल की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों रहा है। ओमप्रकाश चौटाला की राजनीतिक यात्रा और व्याक्तिगत जीवन काफी सुर्खियों में रहा था। 89 साल की उम्र में भी इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) को राज्य में दोबारा खड़ा करने में लगे थे।
हरियाणा चुनाव में भी वह सक्रिय बने रहे। चुनाव से पहले उन्होंने खुद को स्वस्थ बताया था और कहा था कि वह 115 साल तक जिएंगे।
सीएम पद पर हिंचकोले खाते रहे चौटाला
चौटाला की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही। वह दो दिसंबर 1998 को पहली बार राज्य के सीएम बने। हालांकि, उनका पहला कार्यकाल ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया। सीएम के रूप में उनकी पहली पारी 22 मई, 1990 को समाप्त हो गई। दरअसल, उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। चौटाला 12 जुलाई 1990 को दूसरी बार राज्य के सीएम बने। इनका दूसरा कार्यकाल भी महज पांच दिन 17 जुलाई, 1990 तक ही चला। इनकी सीएम की कुर्सी बराबर हिंचकोले खाती रही।
तीसरा कार्यकाल भी मात्र 15 दिन का रहा
तीसरी बार 1991 में एक बार सीएम पद पर उनकी ताजपोशी हुई। उनका यह कार्यकाल भी पहले की तरह पांच साल नहीं चल पाया। चौटाला का तीसरा कार्यकाल भी मात्र 15 दिन का रहा। हालांकि, उनका चौथा कार्यकाल लंबा चला। वह चौथी बार 24 जुलाई 1999 को राज्य के सीएम बने। इस बार उनका कार्यकाल 24 जुलाई 1999 से लेकर मार्च 2005 तक रहा। इस दौरान इन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। हालांकि, इनकी सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप भी लगे।
शिक्षक भर्ती मामले में गए जेल
चौटाला जब सरकार में थे तो उन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध तरीके से 3000 से ज्यादा अयोग्य शिक्षकों की भर्ती के आरोप लगे। इस मामले की जांच सीबीआई ने की। जांच में यह बात सामने आई कि 1999-2000 के दौरान चौटाला सरकार ने गलत तरीके से 3,206 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति की। इस मामले में चौटाला दोषी करार दिए गए। इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने चौटाला एवं उनके बेटे अजय सिंह चौटाला को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। तिहाड़ जेल में करीब साढ़े नौ साल की सजा काटने के बाद चौटाला 2 जुलाई 2021 को रिहा हुए।
