Karachi Water Crisis: गर्मी के इस मौसम में पाकिस्तान के कई शहरों का बुरा हाल है। देश की आर्थिक राजधानी कराची गंभीर जल संकट से गुजर रही है। इस संकट के लिए पाकिस्तान का जल प्रबंधन तंत्र को बहुत हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है लेकिन लोगों का कहना है कि इस संकट को बढ़ाने में सिंधु नदी जल समझौते ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकवादी हमला होने के बाद भारत सरकार ने इस समझौते को निलंबित करते हुए अपने यहां से पानी छोड़ना बंद कर दिया। अब इसकी आंच पाकिस्तान में जल संकट के रूप में महसूस की जा रही है। कराची में पानी की किल्लत को लेकर सियासत भी जारी है। पानी का उचित एवं पर्याप्त प्रबंधन नहीं करने के लिए विरोधी दल शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं।
जल संकट से निपट नहीं पा रही पीपीपी सरकार
रिपोर्टों के मुताबिक इस जल संकट के लिए जमात ए इस्लामी के मुखिया हाफिज नईम उर रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर तीखा हमला बोला है। रहमान ने गहराए जल संकट और इसके कुप्रबंधन के लिए पीपीपी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि पीपीपी वर्षों से कराची की सत्ता में है लेकिन वह आज तक इस शहर में पानी की समस्या को दूर नहीं कर पाई है। आज जल संकट विकराल रूप धारण कर चुका है। दरअसल, कराची में पानी की समस्या ईद-उल अजहा (बकरीद) के मौके पर और गंभीर हो गई।
| कराची |
| आबादी 3 करोड़ |
| पानी की जरूरत 1,080 मिलियन गैलन/प्रतिदिन |
| पानी मिल रहा 400 मिलियन गैलन/प्रतिदिन |
| कितने इलाके में कमी 70% |
सरकार पर बुनियादी सुविधाएं न दे पाने का दावा
एआरवाई न्यूज के मुताबिक हाफिज नईम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पानी जैसी अहम जरूरत के अभाव एवं नागरिक सुविधाओं के चुनौती के बीच लोग अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करते रहे। गहराए जल संकट के बीच उन्होंने कहा कि ईद की छुट्टियों के दौरान लोगों बुनियादी जरूरतों के लिए मशक्कत करते दिखे। जेआई चीफ ने कहा कि पीपीपी की अगुवाई वाली सिंध सरकार लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं दे पा रही है।

water crisis in Pakistan
कराची के मेयर को भी निशाने पर लिया
उन्होंने सवाल किया कि पीपीडी की सरकार बीते 18 सालों से यहां हैं लेकिन आज तक पानी की समस्या वह सुलझा नहीं पाई है। नईम ने सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एजेंसी पर सफाई व्यवस्था तंत्र खड़ा न कर पाने का आरोप लगाया। नईम ने दावा करते हुए कहा कि एजेंसी के पास 43 अरब रुपए का बजट है लेकिन इस फंड का वह सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। जमात ए इस्लामी लीडर ने कराची के मेयर मुर्तजा वहाब को भी निशाने पर लिया। दरअसल, वहाब ने शहर में पानी की किल्लत वाली रिपोर्टों को खारिज किया था।
प्राइवेट टैंकर से पानी मंगा रहे लोग
रिपोर्टों की मानें तो कराची में जल संकट की हालत बद से बदतर होती जा रही है। शहर की 70 आबादी का कहना है कि उन तक पानी मुश्किल से पहुंच पा रहा है। शहर के कई हिस्सों में लोग प्राइवेट पानी के टैंकर मंगा रहे हैं, यह काफी महंगा भी पड़ रहा है। एआरवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि गुलिस्तान ए जौहर, गुलशन ए इकबाल, अजीजाबाद, लिकायतबाद, नॉर्थ नजीमाबाद, नजीमाबाद और नॉर्थ कराची जैसे इलाकों में लोग कथित रूप से दो सप्ताह से ज्यादा समय से गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।
लगभग 30 दिनों के लिए पानी का भंडारण कर सकता है PAK
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता घटकर 1,000 घन मीटर से भी कम रह गई है, जो खाद्य सुरक्षा, कृषि निर्यात और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। पाकिस्तान केवल लगभग 30 दिनों के लिए पानी का भंडारण कर सकता है, जबकि वैश्विक औसत 120–150 दिनों का है। इससे देश बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।

water crisis in Pakistan
देश के कुल मीठे पानी का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि में इस्तेमाल होता है। चावल, कपास और गन्ने जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलें आज भी पारंपरिक और अत्यधिक पानी खर्च करने वाली बाढ़ सिंचाई पद्धति से उगाई जाती हैं। पाकिस्तान में कृषि बहुत हद तक सिंधु नदी के जल पर निर्भर है, लेकिन अब यह पानी उसे मिल नहीं पा रहा है।
कई इलाकों में तेजी से नीचे जा रहा भूजल स्तर
पंजाब, लाहौर और अन्य प्रमुख कृषि एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसका मुख्य कारण बिना नियंत्रण के भूजल दोहन और जल पुनर्भरण की पर्याप्त व्यवस्था का अभाव है। असुरक्षित पेयजल, कमजोर स्वच्छता व्यवस्था और भूजल प्रदूषण के कारण जलजनित बीमारियां पाकिस्तान में बीमारी और मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
