Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की नौसेना (US Navy) के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान वाहक पोतों को लेकर एक चौंकाने वाला फरमान जारी किया है। गुरुवार को जारी एक प्रशासनिक निर्देश में ट्रंप ने नौसेना को आदेश दिया है कि वह अपने नए युद्धपोतों से फाइटर जेट्स को हवा में टेक-ऑफ कराने वाली आधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक (EMALS) को हटा दे। इसकी जगह उन्होंने फिर से दशकों पुराने स्टीम यानी भाप से चलने वाले 'कैटापुल्ट सिस्टम' को इस्तेमाल करने का आदेश दिया है।
एपी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इससे अमेरिकी नौसेना को अरबों डॉलर का भारी-भरकम वित्तीय झटका लग सकता है। जानकारों के मुताबिक, पहले से तय डिजाइनों में इतना बड़ा फेरबदल करने से जहाजों का निर्माण और देरी से पूरा होगा और उन्हें चलाने व संभालने के लिए ज्यादा नौसैनिकों की जरूरत पड़ेगी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 'बंटवारे के लिए कांग्रेस की भूल जिम्मेदार', विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर नितिन नवीन बोले- सत्ता की भूख में खंडित हुई मां भारती
क्या है ट्रंप का ऐतराज?
दरअसल, लड़ाकू विमानों को एयरक्राफ्ट कैरियर के छोटे से डेक से बेहद तेज रफ्तार में उड़ाने के लिए कैटापुल्ट सिस्टम का इस्तेमाल होता है। ट्रंप काफी समय से नए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह नया सिस्टम बेकार है और इसमें पुरानी भाप वाली तकनीक जैसी ताकत नहीं है। उनका मानना है कि नौसेना को हर हाल में भरोसेमंद 'स्टीम कैटापुल्ट' पर ही लौटना चाहिए।
यूएसएस डोरिस मिलर में होगा पहला फेरबदल
ट्रंप के नए ज्ञापन में पेंटागन और नौसेना को दो महीने का समय दिया गया है। इस दौरान उन्हें EMALS और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेपन्स एलिवेटर्स को हटाने का पूरा प्लान राष्ट्रपति के सामने पेश करना होगा। आदेश के मुताबिक, चौथे फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस डोरिस मिलर' (USS Doris Miller) में सबसे पहले यह बदलाव लागू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले बन चुके 'यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड' और निर्माणाधीन 'यूएसएस जॉन एफ. कैनेडी' व 'यूएसएस एंटरप्राइज' को इस बदलाव से अलग रखा गया है।
कंपनी और विशेषज्ञों ने जताई चिंता
इस सिस्टम को बनाने वाली कंपनी 'जनरल एटॉमिक्स' (General Atomics) ने चिंता जताते हुए कहा है कि यूएसएस डोरिस मिलर के लिए कैटापुल्ट निर्माण का आधा काम पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे समय में रास्ते से पीछे हटने से भारी वित्तीय जोखिम, देरी और तकनीकी समस्याएं खड़ी होंगी। दिलचस्प बात यह भी है कि जहां ट्रंप इस तकनीक को छोड़ रहे हैं, वहीं चीन और फ्रांस जैसे देश अपने नए एयरक्राफ्ट कैरियर्स में इसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक को अपना रहे हैं।
नौसेना की बढ़ेगी जनशक्ति और बजट की चुनौती
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह जहाजों में कम जगह घेरता था और इसे संचालित करने के लिए महज 2 नौसैनिकों की जरूरत होती थी, जबकि पुराने भाप वाले सिस्टम को चलाने के लिए एक दर्जन भर कर्मियों की आवश्यकता पड़ती है। अमेरिकी नौसेना पहले से ही करीब 20,000 नौसैनिकों की कमी से जूझ रही है। ऐसे में इस फैसले से नौसेना पर कर्मचारियों का दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी कांग्रेस (संसद) पेंटागन और सैन्य प्राथमिकताओं के लिए अरबों डॉलर के नए बजट पैकेज पर विचार कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद इस महंगे बदलाव के लिए मंजूरी देती है या नहीं।
