27 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध 'लेक ओंटारियो' (Lake Ontario) का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'लेक अमेरिका' (Lake America) करने का निर्देश दिया गया। दोनों देशों के बीच चल रहे कड़ाके के व्यापार युद्ध के बीच आए इस फैसले को कनाडा ने सिरे से खारिज कर दिया है।
कनाडा के ओंटारियो प्रांत के प्रीमियर डग फोर्ड ने ग्रिम्सबी के पास झील के तट पर एक विशाल बोर्ड स्थापित किया, जिस पर अंग्रेजी और फ्रांसीसी भाषा में लिखा है-'लेक ओंटारियो: आज और हमेशा के लिए'। फोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कनाडा अपने स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेगा और ट्रंप के जाने के बाद भी यह 'लेक ओंटारियो' ही कहलाएगी।
इससे पहले 2025 में ट्रंप 'मेक्सिको की खाड़ी' का नाम बदलकर 'गल्फ ऑफ अमेरिका' करने और अलास्का की सर्वोच्च चोटी 'डेनाली' का नाम पुनः 'माउंट मैकिन्ले' करने का आदेश भी दे चुके हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 'लेक ओंटारियो' अब 'लेक अमेरिका', ट्रंप के एक दस्तखत से बदलेगा दुनिया का नक्शा? जानें असल पावर किसके पास
अमेरिका में स्थानों का नाम बदलने की प्रक्रिया क्या है?
मानचित्रों में किसी भी स्थान के नाम का बहुत महत्व होता है। अमेरिका में स्थानों के नामों के मानकीकरण का काम 'यूएस बोर्ड ऑन ज्योग्रैफिक नेम्स' (US Board on Geographic Names) करता है, जो 'यूएस जियोलॉजिकल सर्वे' (USGS) की एक संस्था है।
- संबंधित राज्य या काउंटी के निवासी और स्थानीय निकाय नाम बदलने का प्रस्ताव लाते हैं।
- स्थानीय सहमति के बाद प्रस्ताव राज्य के प्राकृतिक संसाधन विभाग या संबंधित एजेंसी को भेजा जाता है।
- राज्य की आधिकारिक मुहर लगने के बाद मामला केंद्रीय 'यूएस बोर्ड ऑन ज्योग्रैफिक नेम्स' के पास जाता है, जो अंतिम मुहर लगाता है।
उदाहरण के लिए, 2018 में मिनियापोलिस की एक झील का नाम बदलकर स्थानीय मूल निवासियों की परंपरा के अनुसार 'बडे मका स्का' (Bde Maka Ska) रखने के लिए इस पूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया था।
क्या राष्ट्रपति का एक आदेश सब कुछ बदल सकता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति आंतरिक मंत्रालयों (जैसे इंटीरियर डिपार्टमेंट) के जरिए बोर्ड की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं, जैसा कि 2015 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान 'डेनाली' पर्वत के नामकरण में हुआ था। हालांकि, किसी नाम परिवर्तन को लेकर यदि विवाद होता है, तो उसे अदालतों में चुनौती दी जा सकती है, जहां यह जांच की जाती है कि प्रक्रिया कानूनी रूप से सही थी या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और जलक्षेत्र में क्या लागू होता है कानून?
अमेरिकी सीमाओं के भीतर किसी जगह का नाम बदलना अलग बात है, लेकिन लेक ओंटारियो या मेक्सिको की खाड़ी जैसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह बदल जाती है।
- तट से केवल 12 समुद्री मील तक का क्षेत्र संबंधित देश का प्रादेशिक जल माना जाता है, जिसके बाहर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र होता है।
- दुनिया में ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय बोर्ड नहीं है जो किसी भी देश को अपने नक्शों पर नाम बदलने के लिए बाध्य कर सके।
- यदि अमेरिकी बोर्ड अपने सरकारी दस्तावेजों और नक्शों पर इसे 'लेक अमेरिका' लिखता है, तब भी कनाडा या अन्य देश अपने नक्शों पर 'लेक ओंटारियो' लिखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
डिजिटल नक्शों (जैसे Google Maps) पर इसका क्या असर पड़ता है?
डिजिटल मैपिंग कंपनियां जैसे गूगल मैप्स आमतौर पर यूजर की भौगोलिक लोकेशन के हिसाब से नाम प्रदर्शित करती हैं। यदि कोई यूजर अमेरिका के भीतर से गूगल मैप्स देखता है, तो उसे 'गल्फ ऑफ अमेरिका' या 'लेक अमेरिका' दिख सकता है, जबकि कनाडा या मेक्सिको से देखने पर पारम्परिक नाम 'लेक ओंटारियो' या 'गल्फ ऑफ मेक्सिको' ही नजर आएगा।
