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क्या है SAVE अमेरिका एक्ट? जानें 2.5 लाख फर्जी वोटर्स के दावों और अमेरिकी लोकतंत्र पर इसके असर की कहानी

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन गैर-नागरिकों द्वारा अवैध वोटिंग के मुद्दे को आक्रामक ढंग से उठा रहा है। जानिए जनगणना रिपोर्ट की सच्चाई, DHS के 2.5 लाख वोटर्स के दावे और SAVE अमेरिका एक्ट के जरिए बनने वाले नए राजनीतिक समीकरणों का पूरा गणित।

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SAVE America Act का पूरा विवाद
Authored by: Nishant Tiwari
Updated Aug 30, 2026, 12:34 IST
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जैसे-जैसे नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वाशिंगटन के गलियारों में एक बहस सबसे ज्यादा गर्म है, क्या गैर-अमेरिकी नागरिक अवैध रूप से वोट डाल रहे हैं? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रिपब्लिकन सहयोगी इस मुद्दे को बेहद आक्रामक तरीके से उठा रहे हैं। राष्ट्रपति का जोर इस बात पर है कि अमेरिकी डाक सेवा केवल उन्हीं मतदाताओं को मेल-इन बैलेट यानी डाक द्वारा मतदान पत्र भेजे जिनकी अमेरिकी नागरिकता पहले से सत्यापित हो। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लॉरेन बिस का दावा है कि गैर-नागरिकों के मतदान करने के लगातार सबूत मिल रहे हैं।

हालांकि, चुनाव विशेषज्ञों, कानूनविदों और विभिन्न राज्यों के चुनाव अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा अभियान असल में एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद चुनाव नतीजों पर पहले से ही अविश्वास की परत चढ़ाना है।

जनगणना रिपोर्ट और DHS के दावों पर सवाल: आंकड़ों में कितना दम?

इस पूरे विवाद को हवा देने का काम दो प्रमुख रिपोर्टों और बयानों ने किया है:

1. सेंसस ब्यूरो की विवादास्पद रिपोर्ट

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जनगणना ब्यूरो की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के प्रारंभिक विश्लेषण में दावा किया गया कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 24,000 गैर-नागरिकों ने अवैध रूप से वोट डाला था। एपी से बातचीत में लॉयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी के कानून प्रोफेसर जस्टिन लेविट का कहना है कि इस रिपोर्ट की कार्यप्रणाली में भारी गलतियां हैं। इसमें एरर रेट यानी त्रुटि दर जैसी बुनियादी जानकारियां गायब हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत पते से जुड़ गया या उसका नागरिकता डेटाबेस अपडेट नहीं हुआ, तो प्रणाली ने उसे 'फर्जी वोटर' मान लिया। प्रोफेसर लेविट के शब्दों में, यह एक खाली लिफाफे की तरह है जिसे प्रशासन यह साबित करने के लिए लहराएगा कि चुनाव धोखाधड़ी से भरे थे और गैर-नागरिकों ने वोट दिया था।

2. गृह सुरक्षा विभाग (DHS) का 2.5 लाख वोटर्स का दावा

गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने चार प्रमुख राज्यों, कैलिफोर्निया, नेवादा, न्यू जर्सी और पेंसिल्वेनिया को पत्र लिखकर दावा किया कि लगभग 2,50,000 गैर-नागरिक वोटर लिस्ट में रजिस्टर्ड हो सकते हैं।

इन दावों की जमीनी हकीकत का आकलन विभिन्न राज्यों के जवाबों से लगाया जा सकता है:

कैलिफोर्निया राज्य की विदेश मंत्री शर्ली वेबर ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "मुझे आपके आंकड़ों की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह है, क्योंकि मेरे कार्यालय ने राज्य की मतदाता सूची DHS या किसी अन्य संघीय एजेंसी के साथ साझा ही नहीं की है।"

वहीं पेंसिल्वेनिया के कॉमनवेल्थ सचिव अल श्मिट ने खुलासा किया कि DHS अधिकारियों ने एक बैठक के दौरान स्वीकार किया कि उन्हें खुद 14,576 संदिग्ध लोगों के गैर-नागरिक होने पर पूरा भरोसा नहीं था।

न्यू जर्सी की राज्य सरकार ने माना कि मोटर वाहन प्रणाली की तकनीकी गलती से लगभग 6,600 गैर-नागरिक वोटर लिस्ट में चले गए थे। हालांकि, गवर्नर मिकी शेरिल की जांच में पाया गया कि इनमें से 400 से भी कम लोगों ने वास्तव में वोट दिया था और दोषी वेंडर को तुरंत हटाया जा रहा है।

नेवादा के सचिव फ्रांसिस्को एगुइलर ने कहा कि वे केंद्र की कार्यप्रणाली को समझ ही नहीं पाए हैं, जबकि राज्य ने अपनी मतदाता सूचियों को पूरी तरह साफ रखा है।

SAVE अमेरिका एक्ट: सुरक्षा का ढाल या मतदाताओं को रोकने की कोशिश?

ट्रंप प्रशासन की इस आक्रामक बयानबाजी का एक प्रमुख उद्देश्य संसद में SAVE अमेरिका एक्ट (Safeguard American Voter Eligibility Act) को पास कराना है। यह विधेयक रिपब्लिकन बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचले सदन) से पास हो चुका है, लेकिन सीनेट (उच्च सदन) में अटका हुआ है। आइए जानते हैं इस एक्ट के बारे में।

SAVE अमेरिका एक्ट का मुख्य उद्देश्य संघीय चुनावों में केवल अमेरिकी नागरिकों को मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन की अनुमति देना है। इस कानून के तहत नए मतदाता पंजीकरण के समय नागरिकता के लिखित प्रमाण, जैसे पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, मतदान के दौरान सरकारी फोटो पहचान पत्र दिखाने की बाध्यता भी प्रस्तावित है। कानून के समर्थकों, विशेष रूप से रिपब्लिकन पार्टी, का तर्क है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, मतदाता सूची में गैर-नागरिकों की संभावित प्रविष्टि रोकी जा सकेगी और चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाएं कम होंगी। उनके अनुसार, यह कदम अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

SAVE अमेरिका एक्ट को लेकर क्यों हैं चिंताएं

हालांकि, इस प्रस्तावित कानून को लेकर कई गंभीर चिंताएं भी सामने आई हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के 2025 के एक अध्ययन के अनुसार लगभग 2.13 करोड़ योग्य अमेरिकी नागरिकों के पास ऐसे नागरिकता संबंधी दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं हैं, जिनकी मांग इस कानून के तहत की जा सकती है। आलोचकों का कहना है कि गरीबों, बुजुर्गों, छात्रों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाना कठिन और महंगा हो सकता है। नतीजतन, बड़ी संख्या में वैध मतदाता मतदान प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। पूर्व पेंसिल्वेनिया चुनाव अधिकारी कैथी बूकवार समेत कई चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में गैर-नागरिकों द्वारा मतदान के प्रमाण बेहद सीमित हैं, इसलिए यह कानून चुनावी सुरक्षा से अधिक मतदाता भागीदारी को प्रभावित कर सकता है। आलोचकों के अनुसार, इससे मतदान दर घटने, प्रशासनिक बोझ बढ़ने और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

प्राथमिक चुनाव के दौरान वोट डालते मतदाता (फाइल फोटो | AP)

प्राथमिक चुनाव के दौरान वोट डालते मतदाता (फाइल फोटो | AP)

क्या पोलिंग बूथों पर तैनात होंगे फेडरल एजेंट?

विवाद तब और गहरा गया जब मेन राज्य में गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार ने स्वीकार किया कि उनकी योजना पोलिंग बूथों पर यूएस मार्शल्स (U.S. Marshals) और ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) के एजेंटों को तैनात करने की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल वैध नागरिक ही वोट डालें। इसके अलावा, लॉस एंजिल्स में एक होंडुरन नागरिक की अवैध रजिस्ट्रेशन के आरोप में हुई गिरफ्तारी का हवाला देते हुए सहायक अमेरिकी अटॉर्नी बिल एसाइली ने चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है। तमाम विरोधियों का मानना है कि पोलिंग बूथों पर पुलिस या इमिग्रेशन एजेंटों की उपस्थिति से मतदाताओं के मन में डर पैदा होगा, जिससे वे वोट देने से बचेंगे।

चुनाव निष्पक्षता या नतीजों की गलत साबित करने की रणनीति?

अमेरिका में कानून के मुताबिक गैर-नागरिकों द्वारा वोट डालना एक संगीन अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा और देश से निष्कासन का प्रावधान है। यही कारण है कि वास्तव में ऐसा होना बेहद दुर्लभ है। 'डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट' संस्था की निदेशक एलेक्जेंड्रा चैंडलर का कहना है, कि इन भ्रामक दावों को चुनाव में व्यवधान पैदा करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि बाद में नतीजों को खारिज किया जा सके। कोलोराडो की विदेश मंत्री जेना ग्रिसवोल्ड ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रंप 2026 के मिडटर्म चुनाव नतीजों को खारिज करने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले गैर-नागरिक वोटिंग का यह मुद्दा केवल एक चुनावी एजेंडा नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी लोकतंत्र, मतदाता अधिकारों और चुनावी संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास की एक कठिन परीक्षा बनने जा रहा है।

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