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विनेश फोगाट के साथ हुआ षड्यंत्र, विपक्ष क्यों लगा रहा ये आरोप? 10 पॉइंट में समझें सबकुछ

Vinesh Phogat: विनेश फोगाट का वजन अचानक फाइनल मुकाबले से 100 ग्राम कैसे बढ़ा, क्या उनके साथ षड्यंत्र हुआ है? विपक्षी दलों के सांसद ऐसे तमाम सवाल उठा रहे हैं। सवाल ये भी है कि विनेश के खिलाफ यदि साजिश रची गई, तो इसका सूत्रधार कौन था? आपको सारा माजरा समझाते हैं।

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विनेश फोगाट के डिसक्वालीफिकेशन पर राजनीति।

Politics on Vinesh Phogat Case: क्या विनेश फोगाट के साथ पेरिस ओलंपिक में सचमुच साजिश रची गई? अगर हां, तो ये षड्यंत्र किसने रचा, इसकी वजह क्या थी? ये सवाल उठने लाजमी हैं, क्योंकि विपक्षी दलों ने ऐसा दावा किया है कि विनेश के मामले में षड्यंत्र हुआ है। आखिर विपक्षी नेता किस आधार पर इतना बड़ा दावा कर रहे हैं? आपको इस लेख के जरिए 10 पॉइंट में सारा माजरा समझाते हैं और ये बताते हैं कि कैसे ये मामला गरमाता जा रहा है।

1). अचानक कैसे बढ़ा विनेश फोगाट का वजन?

विपक्षी दलों ने महिला पहलवान विनेश फोगाट के ओलंपिक स्पर्धा से अयोग्य घोषित किए जाने के पीछे ‘षड्यंत्र’ की आशंका जताई और सवाल किया कि अचानक फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन 100 ग्राम कैसे बढ़ा तथा सरकार स्तर पर क्या किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर्फ ‘एक्स’ पर पोस्ट कर देने से काम नहीं चलेगा और देश की बेटी को न्याय मिलना चाहिए।

Vinesh Phogat disqualification

विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किया गया।

2). दोनों सदनों से विपक्षी सांसदों का वाकआउट

विपक्षी दलों के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों से वाकआउट भी किया। विनेश फोगाट को महिलाओं की 50 किलोग्राम कुश्ती स्पर्धा के फाइनल से पहले वजन अधिक पाए जाने के कारण बुधवार को ओलंपिक से अयोग्य घोषित कर दिया गया। विनेश ने ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनकर इतिहास रचा था। उन्हें आज देर रात स्वर्ण पदक का मुकाबला खेलना था ।

Sports Minister on Vinesh Phogat

विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने का मुद्दा गरमाया।

3). पीएम ने IOA को जरूरी कार्रवाई के लिए कहा

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को लोकसभा को अवगत कराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस ओलंपिक में पहलवान विनेश फोगाट के प्रतियोगिता से बाहर होने के मामले में भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) को जरूरी कार्रवाई के लिए कहा है। उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने वाकाउट किया तथा संसद भवन के मकर द्वार पर नारेबाजी की।

vinesh phogat

पीएम ने विनेश फोगाट का हौसला बढ़ाया।

4). देश की बेटी को न्याय दिलाने की जताई उम्मीद

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विनेश के मामले को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'विश्वविजेता पहलवानों को हराकर फाइनल में पहुंचीं भारत की शान विनेश फोगाट का तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें पूरी उम्मीद है कि भारतीय ओलंपिक संघ इस निर्णय को मजबूती से चुनौती देकर देश की बेटी को न्याय दिलाएगा।' उन्होंने कहा कि विनेश हिम्मत हारने वालों में से नहीं हैं तथा पूरा भरोसा है कि वह अखाड़े में और अधिक मजबूती से वापसी करेंगी। राहुल गांधी ने कहा, 'आपने हमेशा देश को गौरवान्वित किया है विनेश। आज भी पूरा देश आपकी ताक़त बनकर आपके साथ खड़ा है।'

5). प्रियंका बोलीं- खुद को अकेले मत समझना

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'इस मुश्किल समय में करोड़ों देशवासी उसी उत्साह के साथ आपके (विनेश) साथ खड़े हैं, जैसा पूरी स्पर्धा के दौरान थे। मेरी बहन, खुद को अकेले मत समझना और याद रखना कि आप हमारी चैम्पियन थीं और आप हमेशा हमारी चैम्पियन रहेंगी। मुझे पूरा भरोसा है कि आप और ज्यादा मजबूत तरीके से वापसी करेंगी। ढेर सारा प्यार।'

6). देश की बेटी की पीठ में छुरा किसने घोंपा?

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि विनेश का अयोग्य किया जाना बहुत बड़ा ‘नफरती षड्यंत्र’ है। सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘पहले, कुश्ती संघ के अध्यक्ष, भाजपा के उस समय के (नरेन्द्र) मोदी जी के चहेते सांसद, बृजभूषण शरण सिंह ने देश की विश्व चैम्पियन बेटी को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से सताया, फिर भाजपाइयों ने देश की इस बेटी को जंतर मंतर की सड़कों पर पुलिस से घिसटवाया, फिर मोदी सरकार ने इस बेटी पर प्राथमिकी दर्ज करवाई। विनेश ने फिर भी कभी साहस, शौर्य व धैर्य नहीं गंवाया।’’

उन्होंने सवाल किया, 'कौन है जिसे विनेश फोगाट की जीत हज़म नहीं हुई? किसने हरियाणा और देश की बेटी की पीठ में छुरा घोंपा? किसने किया ताकत का बेज़ा इस्तेमाल? किसका चेहरा बचाने की हुई कोशिश?' सुरजेवाला ने कहा, 'हरियाणा व देश का बच्चा बच्चा विनेश के साथ है, हमारे लिए वह ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता है।'

7). यह चूक कैसे हुई और किस स्तर पर हुई?

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, 'यह चूक कहां हुई, किस स्तर पर हुई। इसको लेकर पूरे देश के मन में प्रश्न है। मंत्री जी के जवाब में कोई उत्तर नहीं मिला है। हम जवाब से संतुष्ट नहीं है।' इसके साथ ही उन्होंने एक्स पर लिखा, 'जब सारा देश विनेश से गोल्ड मेडल जीतकर लाने का इंतज़ार कर रहा था तब उनके अयोग्य घोषित होने की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया। सारे देश के साथ साथ मैं भी आज व्यथित हूं और भावुक हूं। यह चूक कैसे हुई और किस स्तर पर हुई? आख़िर साथ भेजे गए अधिकारियों की क्या ज़िम्मेदारी थी? विनेश कड़ी मेहनत करके यहां तक पहुंची थी। जब दुनियाभर के खिलाड़ी ओलंपिक के लिये तैयारी कर रहे थे तब विनेश महिला खिलाड़ियों को न्याय दिलाने के लिये धरने पर बैठी थी। विनेश ने अंडरवेट श्रेणी में 3 कुश्ती जीती। उनको जब इन 3 कुश्तियों में सही ठहराया गया था तो कम से कम विनेश को सिल्वर मेडल की हक़दार होना चाहिए था। चाहे जो भी हो, विनेश सारी दुनिया के नज़र में कल भी चैम्पियन थी, आज भी चैम्पियन हैं, और कल भी रहेंगी।'

8). गहरी जांच-पड़ताल कराए जाने की मांग

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले की ‘गहरी जांच-पड़ताल’ कराए जाने की मांग की। अखिलेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, 'विनेश फोगाट के फाइनल में न खेल पाने के तकनीकी कारणों की गहरी जांच-पड़ताल हो और सुनिश्चित किया जाए कि सच्चाई क्या है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।'

9). दाल में कुछ काला होने का किया दावा

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि विनेश के मामले में ‘दाल में कुछ काला’ है। उन्होंने कहा, 'मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि किसी खिलाड़ी को यह पता नहीं होगा कि सुबह उसका क्या वजन होना चाहिए।'

10). भारत सरकार की गलती का लगाया आरोप

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने कहा, 'प्रधानमंत्री एक ट्वीट करके समाधान नहीं कर सकते। विनेश फोगाट देश की गौरव हैं। मेरा तो यह विश्वास है कि यह एक षड्यंत्र है। वह तीन चरण की कुश्ती के बाद फाइनल तक पहुंचीं। ऐसा क्या हो गया कि फाइनल से पहले उनका वजन 100 ग्राम बढ़ गया।' उन्होंने आरोप लगाया कि यह भारत सरकार की गलती है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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