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Chandigarh Mayor Election Result 2024: भाजपा ने कैसे जीता चंडीगढ़ मेयर चुनाव? कहां बाजी हार गया Congress+AAP वाला इंडिया गठबंधन; पढ़ें इनसाइड स्टोरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 30, 2024, 06:54 PM IST

Chandigarh Mayor Election Result in Hindi: आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव(Chandigarh Mayor Election in Hindi) में धांधली का आरोप लगाया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे दिन-दहाड़े बेईमानी करार दिया है। वहीं चंडीगढ़ नगर निगम पार्षद ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाने का ऐलान कर दिया है।

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भाजपा ने जीता चंडीगढ़ मेयर चुनाव

Photo : Twitter

Chandigarh Mayor Election 2024: चंड़ीगढ़ नगर निकाय चुनाव में मंगलवार को भारी उलटफेर देखा गया। संख्याबल कम होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव को जीत लिया। इसी के साथ मेयर पद पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। पार्टी के उम्मीदवार मनोज सोनकर ने कांग्रेस और आप के साझा उम्मीदवार कुलदीप टीटा को 4 वोटों के अंतर से हरा दिया। चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही, जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के आठ वोट को पीठासीन अधिकारी ने अमान्य करार दे दिया।

बता दें, 18 जनवरी को नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के चुनाव होने थे। हालांकि, ऐन वक्त पर चुनाव को स्थगित कर दिया गया था। इसके पीछे पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने का हवाला दिया गया था। इसके बाद आप और कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। दरअसल, चंडीगढ़ मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस(App Congress in Chandigarh Mayor Election) ने मिलकर साझा उम्मीदवार उतारे थे। मेयर पद के लिए आप ने प्रत्याशी उतारा था तो अन्य दो पद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा था। आइए जानते हैं कि संख्या बल कम होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने यह चुनाव कैसे जीता?

पहले जानिए चंडीगढ़ नगर निगम का चुनावी 2024 (Chandigarh Mayor Election 2024) समीकरण

चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी के 14 पार्षद हैं। वहीं आप के 13 तो कांग्रेस के 7 पार्षद हैं। इसके अलावा हरदीप सिंह अकाली दल के एक मात्र पार्षद हैं। चुनाव में चंडीगढ़ सांसद का वोट भी मान्य होता है। इस लिहाज से यहां मतदाताओं की कुल संख्या 36 हो जाती है। किसी भी उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए बहुमत के आंकड़े (19) वोटों की जरूरत होती है।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2024: अब चुनाव में हुई वोटिंग को समझिए

आप और कांग्रेस ने इस चुनाव में गठबंधन किया था। संख्या बल के हिसाब से आम आदमी पार्टी के 13 और कांग्रेस के 7 वोट मिलाकर 20 वोट थे। वहीं भाजपा के पक्ष में खुद के 14 पार्षदों के अलावा सांसद का वोट मिलाकर 15 वोट थे। अकाली दल ने भी चुनाव में वोट डाला। हालांकि, इसका खुलासा नहीं हो सका कि उसका वोट किस तरफ गया। इस तरह चुनाव आंकड़ों को समझें तो कांग्रेस व आप के पक्ष में 20 वोट पड़े, जो बहुमत के आंकड़े 19 से ज्यादा हैं। इसके अलावा भाजपा के पक्ष में 16 वोट (अकाली दल मिलाकर) पड़े।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव: कहां बिगड़ा आप और कांग्रेस का गेम

वोटिंग के बाद जब मतों की गिनती हुई तो भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में 16 वोट पड़े थे। वहीं कांग्रेस व आप के साझा उम्मीदवार के पक्ष में 20 वोट पड़े। हालांकि, बाद मे पीठासीन अधिकारी ने आप व कांग्रेस के 8 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया। इस वजह से आप व कांग्रेस के साझा उम्मीदवार के पक्ष में 12 वोट ही बचे। जबकि, भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकार के पक्ष में 16 वोट थे। मतों की गिनती के बाद भाजपा उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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