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यूपी में हार के बाद BJP में दरार! क्या संजीव बालियान के खिलाफ होगी CBI जांच? जानें क्या है सारा विवाद

BJP Internal War: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच छिड़ी जंग भाजपा के लिए कहीं सिर दर्द न बन जाए। संजीव बालियान ने खुद के खिलाफ लगे आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। आपको इस लेख में विस्तार से सारा विवाद समझाते हैं।

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संगीत सोम vs संजीव बालियान

Photo : Times Now Digital

UP Politics: लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को जो झटका उत्तर प्रदेश से लगा, उसकी कल्पना शायद उसने सपने में भी नहीं की होगी। भारतीय जनता पार्टी को 80 में से सिर्फ 33 सीटों पर जीत नसीब हुई, जिसके बाद से यूपी बीजेपी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। स्मृति ईरानी, संजीव बालियान जैसे दिग्गज मंत्रियों को यूपी में हार झेलनी पड़ी। यही वजह है कि अब पार्टी में सियासी उठापटक का दौर तेज हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व विधायक, भाजपा नेता संगीत सोम के बीच खुली जंग छिड़ी हुई है। इसी बीच बालियान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है।

क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ होगी CBI जांच?

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि खुद पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने देश के गृहमंत्री अमित शाह से CBI जांच की मांग की है। बालियान ने अपने उपर लगे आरोपों की जांच के लिए गृहमंत्री को लेटर लिखा और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट हारने के बाद उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपी की CBI से जांच की मांग की है।

Sanjeev Baliyan Letter

चिट्ठी में संजीव बालियान ने क्या मांग की?

चुनाव हारने के बाद संगीत सोम और संजीव बालियान के जुबानी जंग सभी ने खुले तौर पर देखा। सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम की प्रेस कॉन्फ्रेस में डॉ. संजीव बालियान के खिलाफ भ्रष्टाचार से लगे आरोपों के पत्र वायरल हुए थे। इसी के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपनी लेटर पैड पर गृहमंत्री अमित शाह के नाम चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए जांच की मांग की है। बालियान को सपा के हरेन्‍द्र मलिक ने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से करारी शिकस्त दी थी।

पश्चिमी यूपी के भाजपा खेमे में कैसे पड़ी फूट

मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव हारने के बाद संजीव बालियान जब पहली बार मीडिया से रूबरू हुए, तो उन्होंने बिना संगती सोम पर कई गंभीर आरोप लगा दिए और अपनी हार का ठीकरा उनके ही के सिर फोड़ दिया। संगीत सोम भी कहां चुप रहने वाले थे, बालियान के आरोपों के अगले ही दिन उन्होंने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपने ऊपर लगे आरोपों पर चुप्पी तोड़ी। कहीं न कहीं इस विवाद के चलते पश्चिमी यूपी में भाजपा में दरार पड़ती साफ दिखाई दे रही है। आपको बताते हैं कि संजीव बालियान ने क्या बोला और संगीत सोम ने क्या जवाब दिया।

संजीव बालियान ने किस पर लगाया आरोप?

सरधना के पूर्व विधायक बिना नाम लिए संगीत सोम की तरफ इशारा करते हुए पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान ने उस वक्त कहा था कि 'उन्होंने सपा को चुनाव लड़ाने का काम किया है।' सपा सांसद हरेंद्र मलिक पर निशाना साधते हुए बालियान ने बोला कि 'अब तक उन्होंने तहसील और थाने की राजनीति की है। जिले में अब विकास की राजनीति करनी होगी। मेरे चुनाव में जिसने जैसा काम किया, भविष्य में उसे वैसा ही प्रसाद मिलेगा।' चुनाव में भीतरघात के सवाल पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ जयचंद और विभीषण भी जनता के बीच गए। कुछ लोग शिखंडी की तरह नजर आए। कार्रवाई के सवाल पर कहा था कि यह निर्णय पार्टी हाईकमान को लेना है।

संगीत सोम ने बालियान पर किया पलटवार

मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव हार जाने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने जहां बिना नाम लिए इशारों-इशारों में सरधना क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक संगीत सोम पर भितरघात का आरोप लगाया, तो वहीं बालियान पर सोम ने एक दिन बाद पलटवार किया। उन्होंने उस वक्त ये कहा था कि 'संजीव बालियान का मीडिया के समक्ष मेरे उपर यह आरोप लगाना कि मैंने पार्टी को हराया और सपा के उम्मीदवार को चुनाव लड़ाया है, पूरी तरह गलत है।' बालियान के आरोपों के एक दिन बाद संगीत सोम ने कहा था कि सच्चाई यह है कि पार्टी सरधना में हारी नहीं है, बल्कि करीब-करीब बराबर रही है। उन्‍होंने कहा, 'मैं पार्टी का समर्थित और समर्पित कार्यकर्ता हूं। मैं माननीय संजीव बालियान को यह सलाह भी दूंगा कि अगर कोई बात भी है तो पार्टी के मंच पर करें, न कि मीडिया के सामने करें।'

संजीब बालियान को संगीत सोम ने दी थी सलाह

संगीत सोम ने ये भी कहा था कि 'मुझे नहीं लगता कि यह तरीका है और फिर मेरी जिम्मेदारी केवल और केवल सरधना विधानसभा क्षेत्र की थी, जहां पर पार्टी नहीं हारी है। करीब-करीब बराबर रही है। जहां हम हारे हैं, समीक्षा वहां होनी चाहिए। संजीव बालियान ये भी बताएं कि वह बुढ़ाना और चरथावल क्यों हारे।' उन्‍होंने कहा, 'हारने का कारण बालियान को खुद देखना चाहिए कि वह बुढ़ाना जैसी विधानसभा सीट पर क्यों हारे, वह चरथावल जैसी सीट पर क्यों हारे। ये वो विधानसभा क्षेत्र हैं जहां के लिए संजीव बालियान का दावा है कि उन्होंने विकास के नये आयाम रचे हैं।' सोम ने दावा किया कि उन्‍होंने हमेशा सपा के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और कमल के फूल के लिए काम किया है।

मलिक ने बालियान को कितने वोट से हराया?

मुजफ्फरनगर संसदीय क्षेत्र में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री रहे, भाजपा उम्‍मीदवार डाक्‍टर संजीव बालियान को 24672 वोटों से समाजवादी पार्टी के हरेन्‍द्र सिंह मलिक ने पटखनी दे दी थी। मलिक को 4,70,721 वोट मिले, जबकि बालियान को 4,46,049 वोट नसीब हुए। मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली पांच विधानसभा सीट में बुढ़ाना, चरथावल, मुजफ्फरनगर और खतौली चार सीट इसी जिले की हैं, जबकि सरधना विधानसभा सीट मेरठ जिले से आती है। मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के बालियान ने 2014 में बसपा के कादिर राणा और 2019 में राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व प्रमुख चौधरी अजित सिंह को चुनाव हराया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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