साल 2024 आ चुका है, इस साल भारत में आम चुनाव होने हैं। विपक्षी पार्टियां अपने आप को एकजुट बताते हुए भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने का दावा कर रही है, लेकिन सच्चाई ये है कि बीजेपी पीएम मोदी के नेतृत्व में जहां लगातार मजबूत रणनीति के तहत लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्षी गठबंधन सीट शेयरिंग को लेकर आपस में उलझी हुई है। कई राज्यों में कांग्रेस के साथ उसकी सहयोगी पार्टियों से ठनी हुई है।
आप के साथ 2 राज्यों में विवाद
आम आदमी पार्टी नए नवेले इंडिया गठबंधन में शामिल है। आप दो राज्यों पंजाब और दिल्ली में सत्ता में है। पंजाब में 13 और दिल्ली में सात लोकसभा सीट है। पंजाब और दिल्ली दोनों ही जगहों पर आप ने कांग्रेस को हराकर सत्ता पाई है। दोनों ही राज्यों में आप ज्यादा सीटों पर लड़ना चाह रही है, जबकि कांग्रेस कम सीटों पर समझौते के मूड में नहीं है। कांग्रेस के स्थानीय नेता पंजाब की सभी सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, खुलेआम एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। दिल्ली का हाल भी पंजाब जैसा ही है।
यूपी में अखिलेश ने आंखें दिखाईं
देश की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें यूपी से आती हैं। यहां कुल 80 सीटें हैं। सीट शेयरिंग यहां सपा, कांग्रेस और रालोद के बीच मुख्य रूप से होनी है। अब यहां बसपा की एंट्री की भी बात हो रही है। यहां भी कांग्रेस ज्यादा सीटें चाह रही है, जबकि अखिलेश ज्यादा से ज्यादा सीटें लेने के मूड में हैं। हाल ही में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव सपा, कांग्रेस के खिलाफ जा चुकी है।
पश्चिम बंगाल में अधीर रंजन दे चुके हैं चुनौती
पंजाब और दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा कहीं विवाद है तो वो पश्चिम बंगाल में है, जहां टीएमसी सत्ता में है और ममता बनर्जी यहां कांग्रेस को ज्यादा भाव नहीं दे रही है। कहा जा रहा है कि ममता, कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें देने के मूड में है, जिसके लिए कांग्रेस किसी भी कीमत पर तैयार नहीं दिख रही है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो टीएमसी को चुनौती भी दे चुके हैं।
बिहार में भी विवाद
बिहार में इस समय महागठबंधन सत्ता में है। राजद-जदयू के साथ कांग्रेस भी सत्ता का सुख ले रही है। तीनों पार्टियां इंडिया गठबंधन में भी है। यहां नीतीश और लालू की पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही है, वहीं कांग्रेस भी सम्मानजनक सीटों की बात कह रही है। कांग्रेस की बिहार इकाई के प्रमुख अखिलेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि बिहार में लोकसभा की सीटों पर ‘सम्मानित' हिस्सा नहीं मिलने की स्थिति में न केवल पार्टी बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित पूरे महागठबंधन पर असर पड़ेगा।
