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ममता और कांग्रेस की दूरियां मिटाएंगे अखिलेश? TMC के साथ साझा करेंगे मंच, क्या है INDIA का प्लान

Akhilesh Yadav will join TMC Rally: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के बीच काफी अच्छे रिश्ते हैं। कई मौकों पर दोनों को साथ देखा गया है। वहीं, लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच करीबी बढ़ी है। ऐसे में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और कांग्रेस आलाकमान के बीच अनबन खत्म करने की एक मात्र कड़ी अखिलेश यादव ही हैं।

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अखिलेश यादव, सपा प्रमुख।

Photo : Times Now Digital

Akhilesh Yadav will join TMC Rally: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस भले ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हो, लेकिन कांग्रेस से उसकी दूरियां जगजाहिर हैं। इसका मजमून लोकसभा चुनाव के दौरान भी देखा गया, जब बंगाल जैसे सूबे में कांग्रेस और टीएमसी के बीच सीट बंटवारा होते-होते रह गया। वजह चाहें कुछ भी हो, लेकिन विपक्षी गठबंधन के दो बड़े दलों के बीच खटपट किसी से छिपी नहीं रही। हालांकि, अब इंडिया गठबंधन के खेमे से बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के सूत्रधार रहे अखिलेश यादव टीएमसी के साथ मंच साझा करने जा रहे हैं। वह 21 जुलाई यानी कल टीएमसी के शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। टीएमसी नेता कुषाण घोष ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव टीएमसी की धर्मतला रैली में हिस्सा लेंगे। लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार होगा जब इंडिया गठबंधन के दो बड़े दल एक मंच पर होंगे। चर्चा है कि अखिलेश यादव इस दौरान कांग्रेस और टीएमसी के बीच दूरियां मिटाने का काम भी कर सकते हैं।

हो सकती है बड़ी घोषणा

सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के शहीद दिवस कार्यक्रम के जरिए इंडिया गठबंधन अपनी एकता का संदेश दे सकता है। वहीं, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी भी अपनी आगामी रणनीति को साझा कर सकती हैं। बता दें, टीएमसी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती है और इस दौरान ममता बनर्जी कुछ बड़ा ऐलान करती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही माना जा रहा है।

अखिलेश सुलझाएंगे अनबन

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और कांग्रेस आलाकमान के बीच एक मात्र कड़ी अखिलेश यादव ही हैं। दरअसल, सपा अध्यक्ष और ममता बनर्जी के बीच काफी अच्छे रिश्ते हैं। कई मौकों पर दोनों को साथ देखा गया है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव के लिए ममता बनर्जी ने प्रचार किया था तो वहीं लोकसभा चुनाव में सपा ने भदोही सीट भी इंडिया गठबंधन के सदस्य टीएमसी को दी थी। वहीं, लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच करीबी बढ़ी है। इसका उदाहरण आगामी विधानसभा उपचुनाव में भी देखा जा सकता है, जहां सपा और कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहने वाला है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अखिलेश यादव ही दोनों पार्टियों के बीच मतभेदों को खत्म करा सकते हैं।

अभिषेक बनर्जी ने भी की थी मुलाकात

बता दें, लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी के बीच मुलाकात हुई थी। इसके बाद क्षेत्री दलों के एक साथ समानांतर गठबंधन की योजना की खबरें आई थीं। ऐसे में सपा और टीएमसी के बीच बढ़ती दोस्ती नए कयासों को भी जन्म दे सकती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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