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पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान के खिलाफ 10 सबूत, जिससे फंस रही शरीफ सरकार; साफ है आतंकियों के साथ ISI और पाक आर्मी का गठजोड़

Pahalgam Terror Attack: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे। इस हमले को अंजाम पाकिस्तान से आए आतंकियों ने दिया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आतंकियों की ट्रेनिंग पाक सेना और आईएसआई की देखरेख में हुई थी।

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पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ!

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ है ये तो स्पष्ट है। पहलगाम में हमले के बाद से ही पाकिस्तान के खिलाफ सबूत मिलने लगे थे, हालांकि पाकिस्तान इसे अबतक मानने से इनकार करते रहा है। लेकिन अब जो सबूत सामने आए हैं, उससे पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो जाएगा। एनआईए की प्रारंभिक रिपोर्ट में जो बातें सामने आईं हैं, उसे उन आतंकियों के नाम भी बता दिए गए हैं, जो पाकिस्तान से आए थे। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने ही इस हमले का नेतृत्व किया था। इतना ही नहीं PoK में ही आतंकियों की ट्रेनिंग हुई थी, वहीं से आतंकियों को हथियार मिले थे। हमले के समय पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई की एक टीम ने आतंकियों की मदद की थी।

पहलगाम आतंकी हमले में पाक के खिलाफ कितने सबूत (Evidence against Pak in Pahalgam terror attack)

1. दो आतंकी पाकिस्तानी

पहलगाम आतंकी हमले में ऐसे तो कई आतंकी शामिल थे। हमले के दौरान 5-6 आतंकी वहां मौजूद थे, जिसमें से 2 पाकिस्तानी आतंकी थे। बाकी स्थानीय थे और इस हमले में सबसे ज्यादा OGW (ओवर ग्राउंड वर्कर) ने मदद की थी, जिसमें से कई हमले के समय वहां मौजूद हो सकते हैं। पहलगाम आतंकी हमले में दो मुख्य आतंकी हाशमी मूसा और अली भाई उर्फ तल्हा भाई, पाकिस्तानी थे।

2. पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड

पहलगाम आतंकी हमले का मास्टर पाकिस्तानी आतंकी हाशमी मूसा को बताया जा रहा है। पाकिस्तानी नागरिक और पाकिस्तान के स्पेशल फोर्स के पूर्व पैरा कमांडो हाशिम मूसा इस आतंकी हमले के दौरान वहां मौजूद भी था। रक्षा सूत्रों ने खुलासा किया है कि हाशिम मूसा, जो अब लश्कर-ए-तैयबा के साथ काम कर रहा है, उसे जम्मू और कश्मीर भेजे जाने से पहले पाकिस्तान के स्पेश सर्विस ग्रुप (SSG) द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि मूसा को भारतीय और विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों सहित गैर-स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाने का काम सौंपा गया था।

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पहलगाम आतंकी हमले की जगह

3. लश्कर-आईएसआई और पाक आर्मी का गठजोड़

पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले पर NIA की प्रारंभिक रिपोर्ट में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और पाक सेना के गठजोड़ की बात सामने आई है।

4. हमले के दौरान पाकिस्तानी आकाओं से संपर्क में थे आतंकी

हिरासत में लिए गए गुर्गों से पूछताछ से पता चलता है कि दोनों पाकिस्तानी आतंकी पाकिस्तान स्थित संचालकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा, उन्हें समय, रसद और हमले को अंजाम देने के लिए पाक से गाइडलाइंस मिलती रही।

5. पाक सेना ने बॉर्डर करवाया क्रॉस

सूत्रों की मानें तो PoK से आतंकवादी हमले से कुछ सप्ताह पहले भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे। यहां उनकी मदद पाक सेना ने की और भारतीय सीमा में आने के बाद आतंकियों को ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) के एक नेटवर्क द्वारा सहायता प्रदान की गई थी, जिन्होंने आश्रय, नेविगेशन और टोही सहित स्थानीय रसद सहायता प्रदान की थी।

6. PoK में आतंकियों को ट्रेनिंग

पाकिस्तान ने ही इन आतंकियों को ट्रेनिंग दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार PoK में इन आतंकियों की ट्रेनिंग हुई, जहां लश्कर का ठिकाना है। इन्हें ट्रेनिंग देने में आईएसआई और पाक सेना का हाथ बताया जा रहा है।

7. हमास के साथ लश्कर की मीटिंग

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहलगाम आतंकी हमले को लेकर PoK में हमास के साथ लश्कर की एक मीटिंग भी हुई थी, इसमें भी ISI का हाथ सामने आया था। लश्कर और हमास की मीटिंग 5 फरवरी 2025 को पीओके में हुआ था। इस मीटिंग की पुष्टि इजराइल भी कर चुका है। इतना ही नहीं इस मीटिंग में हमास के अधिकारियों के सामने लगभग 100 आतंकी भी मौजूद थे, जिसमें से अधिकतर विदेशी आतंकी थे। हमास के खालिद कदुमी और नाज़ी ज़हीर सम्मेलन में मौजूद थे। मसूद अजहर का भाई भी सम्मेलन में मौजूद था।

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पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की हुई थी मौत

8. हथियार छिपाने की जगह

आतंकियों ने पहलगाम आतंकी हमले के लिए हथियार बेताब घाटी में छुपाए थे। यह लोकेशन भी उन्हें पाकिस्तान की मदद से मिली थी। बेताब घाटी भी आतंकियों की लिस्ट में शामिल था।

9. टूलकिट से आतंकियों की मदद

जांच के दौरान आतंकी टूलकिट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस टूलकिट के जरिए आतंकवादियों को कई तरह की हिदायतें दी जाती हैं। पाक में बैठे आकाओं ने इसमें आतंकवादियों को क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी जानकारी दी होती है। टूलकिट के अनुसार, आतंकवादियों को इस बात की हिदायत दी गई थी कि वे समय के पाबंद हों, साथ ही अपनी यात्रा के दौरान इस्लामी पहनावे से दूरी बनाए रखें, ताकि वो पकड़े न जा सकें।

10. प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में क्या-क्या

पहलगाम आतंकी हमले की जांच करी NIA ने करीब 150 लोगों के बयान रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। NIA की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में POK का जिक्र है, आतंकी POK में अपने हैंडलर के संपर्क में थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ओवर ग्राउंड वर्कर्स OGW का जिक्र है, जिनका पाकिस्तान के आतंकी समूहों से संबंध हैं। आतंकी हमले में OGW की भूमिका का जिक्र है। ओवर ग्राउंड वर्कर्स के कांटेक्ट की NIA ने लिस्ट तैयार कर ली है जिसके बाद अब OGW पर प्रशासनिक और अदालती कार्यवाई की तैयारी की जा रही है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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