Exclusive Rupali Ganguly Angry On Supreme Court Order For Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली व एनसीआर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर आदेश जारी किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सड़क से हटाकर शेल्टर होम तक पहुंचाने की बात कही। बताया जा रहा है कि ये आदेश लोगों की सुरक्षा को देखते हुए दिया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर लोगों का आक्रोश देखने को मिला। यहां तक कि टीवी और बॉलीवुड स्टार्स भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरोध में नजर आए। वहीं अब टीवी की मशहूर एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने भी आवारा कुत्तों पर जारी हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि ये कोई उपाय नहीं है।
रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) ने टेली टॉक/जूम संग बातचीत के दौरान बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर वह रो पड़ी थीं। उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा, "मैं सच में रो रही थी। मैं अभी भी इस उम्मीद में थी कि वे लोग एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम लागू करते हुए कोई सुझाव निकालेंगे। आप एनजीओ को देखते हैं, लेकिन वो लोग भी उन चीजों को करने में नाकाम हो रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए। उन्हें इतना पैसा मिलता है, उसके बावजूद। उन्हें हर कुत्ते के हिसाब से अच्छी-खासी रकम दी जाती है। तो उसे अभी तक इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? कोई उसकी जांच क्यों नहीं कर रहा। लेखा परीक्षकों को उसकी जांच करनी चाहिए। मेरा दिल टूट गया है।"
रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने इस सिलसिले में आगे कहा, "ये कोई उपाय नहीं है। मैं बीते कई वक्त से उन्हें खाना खिला रही हूं और 300 से ज्यादा कुत्तों को खिला रही हूं। मैं कुत्तों, सांपों और बाकी जानवरों से भी मिलती हूं। मैं ये नहीं कह रही कि यहां कुत्तों के काटने का केस नहीं होता है, लेकिन यहां ये देखना जरूरी है कि इस समय क्या आवश्यकता है। सभी कुत्तों को शेल्टर होम में भेज देना बिल्कुल उनका सफाया करने जैसा है। उन्हें किस चीज की सजा मिल रही है। यहां कुत्तों के काटने का केस होता है, लेकिन यहां उनके द्वारा ही रक्षा करने का भी केस है।"
रुपाली गांगुली जानवरों के प्रति अपने भाव को नहीं रोक पाईं। उन्होंने इस बारे में आगे कहा, "मेरे मां-बाप ने सिखाया है पहली रोटी गाय को खिलाते हैं, दूसरी कुत्तों को। मुझे ये नहीं समझ आता कि हम हिंदुस्तान में रहकर ऐसा ऑर्डर कैसे पास कर सकते हैं। आप शेल्टर्स बनाइए, लेकिन पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। आप कुत्तों को एक पिंजरे में डालकर उनके जीने की उम्मीद नहीं कर सकते। ये नहीं हो सकता है। उन्हें जगह चाहिए। उन्हें खिलाने के लिए पूरी प्लानिंग चाहिए। कहां लेकर जाओगे? कहां रखोगे? क्या खिलाओगे? अगर आप किसी को सजा देते हैं तो बोलने का मौका तो देते हैं। ये बेजुबान हैं, क्या इनका हक नहीं है? जितना इस गृह पर हमारा हक है, उनका भी है। मैं इससे बिल्कुल भी सहमत नहीं हूं।"
