Kaal Trighori Review: निर्देशक नितिन एन वैद्य ने काल त्रिघोही के जरिए साबित किया है कि भारतीय हॉरर सिर्फ़ जम्प-स्केयर तक सीमित नहीं रह गई है। यह फिल्म एक डीप-साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जो आपको पुराने मिथकों और हवेली के डरावने गलियारों में घसीट लेती है। 2 घंटे 39 मिनट की रनटाइम के दौरान कहानी लगातार आपको अपने सस्पेंस में बांधे रखती है।
कहानी और सस्पेंस
फिल्म का प्लॉट एक सौ साल में एक बार आने वाले खगोलीय संयोग के इर्द-गिर्द घूमता है — जब चैत्र अमावस्या, चैत्र पूर्णिमा और बैसाखी अमावस्या एक ही महीने में आती हैं। इस दुर्लभ अलाइनमेंट से जागृत होती है पौराणिक शक्ति ‘त्रिघोही’, जिसका जिक्र सदियों पुरानी लोककथाओं में मिलता है।
कहानी सेट है एक पुरानी हवेली में, जहाँ रविराज (अरबाज़ ख़ान), उनकी पत्नी माधुरी (ऋतुपर्णा सेनगुप्ता) और दोस्त डॉ. मनोज (आदित्य श्रीवास्तव) एक-दूसरे की जिंदगी में उलझ जाते हैं। इन रातों में डर, शक और रहस्य के बीच उनकी किस्मत झूलती रहती है। फिल्म लगातार सवाल करती है: क्या यह अलौकिक शक्ति है, या किसी की साज़िश?
अभिनय और परफॉर्मेंस
अरबाज़ ख़ान ने हॉरर में डेब्यू करते हुए अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया। ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने इमोशन और डर को बेहतरीन तरीके से दिखाया। इसके साथ ही आदित्य श्रीवास्तव, महेश मांजरेकर, राजेश शर्मा और मुग्धा गोडसे ने अपने सपोर्टिंग रोल में कहानी को मजबूती दी।
तकनीकी मजबूती
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी: धुंध, परछाइयाँ और लाइटिंग से हवेली का डरावना माहौल जीवंत हो जाता है। इसके साथ ही साउंड डिज़ाइन और बैकग्राउंड म्यूज़िक से छोटी-सी आवाज़ भी आपको झकझोर देती है,और माहौल बनाती है। कुल मिलाकर नितिन वैद्य ने अपने डायरेक्शन से डराने के साथ कहानी में गहराई भी दी है।
अंतिम विचार
काल त्रिघोही इंडियन हॉरर में नया मील का पत्थर है। यह सिर्फ डराने वाली फिल्म नहीं, बल्कि आपको सोचने और महसूस करने पर मजबूर करने वाली कहानी है। हॉरर प्रेमियों के लिए यह मस्ट वॉच है, और बिग स्क्रीन पर इसका अनुभव और भी जबरदस्त है। इसे 3 रेटिंग दी गई है।
