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Adipurush पर आगबबूला हुए रामायण के 'लक्ष्मण', कहा- 'सिर पीट रहे होंगे हनुमान...मन किया पर्दा फाड़ दूं'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 22, 2023, 12:06 AM IST

Sunil Lahri on Adipurush: रामानंद सागर की रामायाण में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने कहा, आदिपुरुष देखकर मुझे लग रहा था कि मैं पर्दा फाड़ दूं। इस फिल्म को देखकर हनुमान जी भी सिर पीट रहे होंगे कि मुझसे किस तरह के डॉयलाग बुलवाए जा रहे हैं। इस फिल्म में बम्बईया फुटपाथी लैंग्वेज बुलवाई गई है।

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Sunil Lahri on Adipurush

Sunil Lahri on Adipurush: ओम राउत (Om Raut) के निर्देशन में बनी फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) द्वारा लिखे गए फिल्म के डॉयलाग (Adipurush Dialogues Controversy) को लेकर लोगों को खास आपत्ति है। इस फिल्म को लेकर लोगों में इस कदम नाराजगी है कि सड़क पर प्रदर्शन हो रहे हैं तो सोशल मीडिया पर भी मनोज मुंतशिर और ओम राउत को काफी ट्रोल किया जा रहा है।

अब रामानंद सागर (Ramanand Sagar) की रामायाण (Ramayan) में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी (Sunil Lahri) ने इस फिल्म को लेकर नाराजगी जाहिर की है। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ हुई खास बातचीत में उन्होंने कहा है कि मुझे किसी भी एंगल से यह फिल्म पसंद नहीं आई है। फिल्म में कैरेक्टराइजेश से लेकर एग्जीक्यूशन, सीन्स और सिचुएशन्स का कोई सिर-पांव नहीं था।

मुझे नहीं पता यह फिल्म क्यों बनाई

सुनील लहरी ने कहा है कि मुझे यह नहीं समझ आया कि यह फिल्म क्यों बनाई गई, किसे दिखाने के लिए बनाई गई। जो मॉर्डनाइजेशन की बात करते हैं, वे बताएं टैटू बनाने से और विराट कोहली जैसी हेयर स्टाइल रखने से फिल्म मॉर्डन हो जाती है क्या? उन्होंने कहा पिक्चर देखने के बाद मुझे शर्म आ रही है कि मैं इसको लेकर क्या बोलूं। जो थियेटर में लोग बैठे हुए थे, उनके भी रिएक्शन बहुत खराब थे।

हनुमान जी सिर पीट रहे होंगे

फिल्म में हनुमान जी के डॉयलाग के सवाल पर सुनील लहरी ने कहा, इस देश का नागरिक होने के नाते मैं अपनी संस्कृति का बहुत सम्मान करता हूं। उसका एक हिस्सा होने के नाते मुझे लग रहा था कि मैं पर्दा फाड़ दूं। इस फिल्म को देखकर हनुमान जी भी सिर पीट रहे होंगे कि मुझसे किस तरह के डॉयलाग बुलवाए जा रहे हैं। इस फिल्म में बम्बईया फुटपाथी लैंग्वेज बुलवाई गई है। रावण जैसा ज्ञानी व्यक्ति लोहा पीट रहा है।

चूल्ल भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए

फिल्म के डॉयलाग बदले जाने को लेकर उन्होंने कहा, एक बार कपड़ा फट जाता है तो नया नहीं होता। कुछ भी कर लें अब जो डैमेज होना था हो गया है। आज भी हनुमान जी के मंदिर में चले जाइए, लोगों में कितनी श्रद्धा है। युवा हनुमान जी का पाठ करते हैं, उनका तिलक लगाकर घूमते हैं। उन्होंने मेकर्स पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इन लोगों को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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