Shahid Kapoor Film O' Romeo Review: बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) और तृप्ति डिमरी (Triptii Dimri) की फिल्म 'ओ रोमियो' (O'Romeo) आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। अगर आप इस मूवी को देखने की सोच रहे हैं तो हमारे इस रिव्यू को जरूर पढ़े।
pic credit- O'Romeo film
विशाल भारद्वाज ने शेक्सपियर की कहानी को भारतीय अंदाज में पेश किया है। उनकी नई फिल्म 'ओ रोमियो' रोमियो-जूलियट की कहानी पर आधारित है, लेकिन इसमें गैंगस्टर और बदले का तड़का है। फिल्म 2 घंटे 58 मिनट लंबी है और 1995 के मुंबई को दिखाती है। शाहिद कपूर हुसैन उस्तारा का रोल निभा रहे हैं। वो एक ऐसा गैंगस्टर जो रेजर से लोगों को काटता है। वह नाना पाटेकर के संरक्षण में रहता है और अपनी दादी (फरीदा जलाल) के साथ नाव पर रहता है। उसकी जिंदगी तब बदलती है जब वह अफशान (तृप्ति डिमरी) से मिलता है। अफशान विधवा है और वो उसके पति मेहबूब (विक्रांत मैसी) की हत्या के लिए जलाल (अविनाश तिवारी) से बदला लेना चाहती है। हुसैन उस्तारा उसकी मासूमियत से प्यार कर बैठता है। उनकी लव स्टोरी खून और कुर्बानी से लिखी गई है।फिल्म की असली ताकत लव स्टोरी, एक्शन और गोर है। क्या अफशान और उस्तारा की लव स्टोरी पूरी हो पाएगी या अफशान अपने पति का बदला ले पाएगी ये तो आपको मूवी देखने के बाद ही पता चलेगा।
पहला हाफ धीमा लेकिन अच्छा है। इंटरवल तक कहानी सिमरती है। लेकिन दूसरे हाफ में बहुत कुछ दिखाने की कोशिश में सब उलझ जाता है। स्क्रीनप्ले व्यस्त है, हिंसा ज्यादा है, लेकिन रिएक्शन समझ नहीं आता। कई किरदार बिना वजह आते-जाते हैं। जलाल का किरदार इंटरवल के बाद आता है, लेकिन उसका हुसैन उस्तारा से कनेक्शन समझ नहीं आता। विशाल भारद्वाज की फिल्मों की तरह यह भी कविता की तरह बहती है। स्क्रीनप्ले लंबा है, लेकिन क्लाइमैक्स तक रिदम बना रहता है। एक्शन कोरियोग्राफी कमाल की है। प्रोडक्शन डिजाइन शानदार है। लेकिन अंत के सीन में VFX कमजोर है। फर्स्ट हला हाफ साफ और तेज है, लेकिन दूसरा हाफ ड्रामा और उलझन से भरा है। कम एलिमेंट्स, कम गाने और ज्यादा कैरेक्टर डेवलपमेंट से फिल्म मास्टरपीस बन सकती थी।
फिर भी शानदार परफॉर्मेंस और विशाल की कहानी कहने की कला से 'ओ रोमियो' देखने लायक है। आप इस मूवी को एक बार तो देख ही सकते हैं। शाहिद विशाल की मूवी में फिट बैठते हैं। शाहिद उस्तारा के रोल को स्वैग, पागलपन और पैशन से निभाते हैं। तृप्ति अफशान की भूमिका में परफेक्ट लगती हैं। पहले हाफ में शांत, दूसरे में फुल कॉन्फिडेंट। उनकी एक्टिंग कमाल की है। अविनाश का रोल कुछ खास नहीं है बस एंट्री सीन ही थोड़ा खतरनाक है। नाना के डायलॉग्स मजेदार हैं। तमन्ना हमेशा की तरह खूबसूरत लगती हैं। दिशा पाटनी दो गानों और एक सीन में हैं। विक्रांत ने फिर साबित कर दिया कि वो बेस्ट एक्टर है। अगर आपको वायलेंस के साथ थोड़ा रोमांस देखना है तो ये मूवी आपके लिए बेस्ट है।