Nishanchi Review: डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने फिल्म निशांची (Nishanchi) को प्रमोट करते हुए कहा था कि उनके पास ये स्क्रिप्ट पिछले 8 सालों से थी। अच्छा होता कि वो इसे बंद बक्से में ही रखते ताकि दर्शकों को बोर न होना पड़ता। फिल्म निशांची स्लो और प्रिडिक्टेबल मूवी है, जिसमें डायरेक्टर अनुराग कश्यप को छोड़कर सभी ने अच्छा काम किया है।
Nishanchi Review: डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने फिल्म निशांची (Nishanchi) को प्रमोट करते समय ये बार-बार कहा था कि ये स्क्रिप्ट उनके पास लगभग 8 सालों से थी। निशांची को वो अपने अंदाज में बनाना चाहते थे और बाजारवाद की वजह कोई भी क्रिएटिव समझौता नहीं करना चाहते थे, जिस कारण उन्होंने इसे तब तक नहीं बनाया जब तक उन्हें सब चीजें अपने मुताबिक नहीं मिल गईं। अनुराग कश्यप जैसा बड़ा डायरेक्टर अगर इतनी बड़ी बात बोल दे तो एक्साइटेड होना तो लाजमी है लेकिन क्या फिल्म निशांची हम सबकी इस एक्साइटमेंट के साथ जस्टिस करती है? आइए आपको बताते हैं...
फिल्म निशांची कानपुर में रहने वाले दो लड़कों बबलू और डबलू की कहानी है। जिनके पिता की हत्या उनके ही एक मुंहबोले चाचा ने करवा दी थी। इसकी जानकारी इन दोनों को ही नहीं है। जहां बबलू साहसी है, वहीं डबलू थोड़ा दब्बू है। बबलू के धाकड़पन का फायदा उठाते हुए उसके मुंहबोले चाचा ने बचपन में उससे एक खून करवा दिया था। इस खून की वजह से बबलू को 7 साल की जेल हो गई थी। जेल काटने के बाद बबलू टोनी मांटेना बनकर लौटा है। जेल से बाहर आते ही बबलू को उसके चाचा कानपुर की एक बस्ती खाली कराने का काम देते हैं। इस काम को करते हुए उसे दिखती है रिंकी जो उसके हार्मोन्स का हारमोनियम बजा देती है। इस लड़की के चक्कर में वो अपने चाचा से बगावत कर बैठता है और फिर से एक बार 7 साल के लिए जेल पहुंच जाता है। बबलू के जेल जाते ही रिंकी और डबलू में नजदीकियां बढ़ जाती हैं... क्या बबलू-डबलू को उनके पिता के हत्यारे के बारे में कभी पता चलेगा और रिंकी की वजह से बबलू-डबलू के बीच पैदा हुई दुश्मनी क्या धमाका करेगी, उसके लिए हमने निशांची के दूसरे पार्ट के लिए रुकना पड़ेगा।
फिल्म निशांची एकदम देसी गैंगस्टर ड्रामा है, जिसमें ऐश्वर्य ठाकरे, वेदिका पिंटो, मोनिका पंवार, कुमुद मिश्रा, विनीत कुमार और जीशान आयुब ने कमाल का काम किया है। कनपुरिया डायलॉगबाजी हो या फिर इमोशनल सीन्स ये सभी एक्टर्स धांय-धांय करके दिल में उतरते हैं। ऐश्वर्य ठाकरे को डबल रोल में देखकर ऐसा लगता ही नहीं है कि निशांची उनकी डेब्यू मूवी है। उन्होंने निशांची से बता दिया है कि वो शानदार एक्टर हैं, जो समय के साथ बॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ेंगे। कुमुद मिश्रा को हमने अक्सर स्वीट रोल्स में ही देखा है लेकिन निशांची में वो मक्कार चाचा के रूप में छा गए हैं। लोगों को निशांची में उनका काम पसंद आएगा। मोनिका पंवार ने बबलू-डबलू की विधवा मां का रोल निभाया है। उनकी बॉडी लैंगुअज कमाल की है और वो अधेड़ उम्र की नजर भी आती हैं। वेदिका पिंटो की बात करें तो निडर और मुंहफट लड़की के रोल में वो छा गए हैं। काश अनुराग ने उनके कुछ और सीन्स फिल्म में रखे होते।
फिल्म निशांची का रिव्यू वीडियो:
फिल्म निशांची की इतनी तारीफ सुनने के बाद आपको लग रहा होगा कि अनुराग कश्यप इज बैक लेकिन दुख की बात यही है कि ऐसा नहीं हुआ है। इस फिल्म में सबकुछ ठीक है, अनुराग कश्यप के डायरेक्शन के सिवा। अनुराग का डायरेक्शन निशांची में बेहद औसत है। मन की कहानी और दमदार एक्टर्स होने के बाद भी अनुराग एक यादगार गैंगस्टर ड्रामा नहीं बना पाए हैं, जो एक दशक के बाद भी लोगों के जहन में रहे। निशांची बहुत स्लो और प्रिडिक्टेबल मूवी है, जिसमें कहीं पर भी हाई प्वाइंट नहीं आता है। फिल्म के दौरान आप आराम से अंदाजा लगा सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है और ये अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर की हार है। मुझे उनसे एक ऐसे देसी कट्टे जैसी फिल्म की उम्मीद थी जो धुंआ-धुंआ कर देती लेकिन निशांची बैकफायर करने वाली देसी रिवॉल्वर निकली है।
अब बात करते हैं कि फिल्म निशांची देखें या नहीं? अगर आप अनुराग कश्यप का सिनेमा पसंद करते हैं और देसी गैंगस्टर ड्रामा काफी लम्बे समय से मिस कर रहे हैं तो निशांची आपके लिए है। फिल्म निशांची एक ही फ्लो से चलने वाली एवरेज मूवी है, जो कहीं-कहीं पर हंसाती भी है लेकिन ये उत्साह पैदा नहीं कर पाती है कि आगे क्या होगा। मैं अपनी तरफ से इस फिल्म फिल्म के लिए 2.5 स्टार देता हूं। बाकी इस हफ्ते कई वेब सीरीज और फिल्में रिलीज हुई हैं। अगर आप निशांची को थिएटर में नहीं देखते हैं तो कोई बड़ा नुकसान नहीं करेंगे।