Baby Do Die Do Movie Review: हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू' एक स्टाइलिश एक्शन-थ्रिलर है, जिसमें बदला, सस्पेंस और दमदार एक्शन का तड़का देखने को मिलता है। फिल्म अपनी तेज रफ्तार कहानी और हुमा की शानदार एक्टिंग से ध्यान खींचती है, लेकिन कुछ कमजोरियां भी नजर आती हैं। आइए जानते हैं कि यह फिल्म देखने लायक है या नहीं।
फिल्म बेबी डू डाई डू का रिव्यू
Baby Do Die Do Movie Review: अगर आपको ऐसी फिल्में का इंतजार है जिसमें एक्शन, बदला, सस्पेंस और थोड़ा अलग तरह का किरदार देखने को मिले, तो 'बेबी डू डाई डू' आपके लिए ही बनी है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी लीड एक्ट्रेस हुमा कुरैशी हैं। उन्होंने एक ऐसी कॉन्ट्रैक्ट किलर का रोल निभाया है जो बोल और सुन नहीं सकती, लेकिन अपने काम में बेहद तेज और खतरनाक है। फिल्म शुरुआत से आखिर तक दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने की कोशिश करती है। हालांकि कुछ जगह कहानी कमजोर भी पड़ती है, लेकिन कुल मिलाकर यह एक अच्छी थ्रिलर बनकर सामने आती है। तो चलिए जानते हैं फिल्म में क्या कमी है और क्या अच्छा।
कहानी जुड़वां बहनों पर है। एक बहन की पुराने पांच सितारा होटल में हत्या हो जाती है। छोटी बहन बेबी करमरकर (हुमा कुरैशी), जो गूंगी और बहरी है, अपनी बहन की मौत का बदला लेने निकलती है। बीस साल बाद बेबी एक प्रोफेशनल हिटवुमन बन जाती है, जो पापा (चंकी पांडे) के लिए काम करती है। वो अक्सर अपनी मरी हुई बहन की आवाज सुनती है जो उसे गाइड करती है। एक दिन पापा उसे एक बड़े रियल एस्टेट टाइकून को मारने का ऑर्डर देते हैं। इसके बाद कई हत्याएं होती हैं और बेबी की पर्सनल लाइफ भी उलझ जाती है। वो अपने पति अमनदीप के साथ शांत जिंदगी जीना चाहती है, लेकिन पुरानी दुनिया उसे छोड़ती नहीं। फिल्म में बदला, हिंसा और थोड़ी रोमांस भी है। कहानी ट्विस्ट के साथ चलती है लेकिन कुछ जगह कन्फ्यूजिंग लगती है।
सबसे पहले बात करें तो हुमा कुरैशी की एक्टिंग फिल्म की जान है। बिना ज्यादा डायलॉग बोले उन्होंने सिर्फ अपने एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज से किरदार को मजबूत बनाया है। एक्शन सीक्वेंस अच्छे बने हैं, काफी इंटेंस और अच्छे से शूट किए गए हैं। कुछ ट्विस्ट अचानक आते हैं जो ध्यान बांध लेते हैं। शुरूआत में फिल्म अच्छा सस्पेंस बनाती है। चंकी पांडे और सिकंदर खेर अपने रोल में ठीक-ठाक हैं। फिल्म बदले की थीम को अच्छे से दिखाती है। कुछ शॉक्स वाली जगहें हैं जो थ्रिलर फैंस को पसंद आएंगी। कुल मिलाकर, हुमा कुरैशी फिल्म को अपने कंधों पर उठाए हुए हैं और एक्शन पार्ट मजबूत है। डायरेक्टर ने मुंबई के अंधेरे और अपराध वाली दुनिया को अच्छे तरीके से दिखाया है। कैमरा वर्क और बैकग्राउंड म्यूजिक कई सीन को और असरदार बना देते हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी कहानी और स्क्रीनप्ले है। बदले वाली कहानी पहले भी कई फिल्मों में देखी जा चुकी है, इसलिए कई मोड़ों का अंदाजा पहले ही लग जाता है। दूसरे हिस्से में फिल्म थोड़ी कमजोर पड़ती है। कुछ ट्विस्ट इतने चौंकाने वाले नहीं लगते, जितनी उम्मीद बनती है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा स्टाइलिश बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे कहानी का असर थोड़ा कम हो जाता है। कुछ किरदारों को ज्यादा समय नहीं मिला, इसलिए उनके बारे में दर्शक ज्यादा जुड़ नहीं पाते। अगर उन पर थोड़ा और काम किया जाता तो फिल्म और मजबूत बन सकती थी। कुछ लोगों को कैमरे के कुछ खास इफेक्ट भी बार-बार इस्तेमाल होने की वजह से अजीब लग सकते हैं।
आप हर बार नई कहानी ही ढूंढते हैं, तो ये फिल्म आपका दिल नहीं जीत पाएगी। आपको टाइट स्क्रिप्ट, बैलेंस्ड स्टोरी और मजबूत रोमांस-थ्रिलर मिक्स चाहिए तो शायद आप इस फिल्म को देखने के बाद निराशा हो। लेकिन अगर आपको स्टाइलिश एक्शन, तेज रफ्तार थ्रिलर और दमदार लीड परफॉर्मेंस पसंद है, तो 'बेबी डू डाई डू' एक बार जरूर देखी जा सकती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी वजह है हुमा कुरैशी की शानदार एक्टिंग। वो शुरू से आखिर तक फिल्म को अपने कंधों पर लेकर चलती हैं। कहानी में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन अच्छा निर्देशन, मजबूत परफॉर्मेंस और तेज रफ्तार फिल्म को देखने लायक बना देते हैं।