IKKA Movie Full Review: फिल्म में शानदार एक्टिंग, इमोशनल कहानी और मजबूत किरदार देखने को मिलते हैं। हालांकि धीमी रफ्तार कुछ जगह परेशान करती है, फिर भी फिल्म अपनी पकड़ बनाए रखती है। अगर आप भी इस फिल्म को देखने के प्लान बना रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है।
फिल्म इक्का का रिव्यू (Image Source: Netflix)
IKKA Movie Full Review: कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ कहानी नहीं दिखातीं, बल्कि देखने वाले को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है 'इक्का'। ये फिल्म अपने मजबूत किरदारों, इमोशनल सीन्स और शानदार परफॉर्मेंस की वजह से ध्यान खींचती है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी और स्टार्स की एक्टिंग है, जो कई जगह आपको किरदारों के साथ जोड़ देती है। हालांकि, फिल्म हर जगह परफेक्ट नहीं है और कुछ हिस्सों में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी लगती है। इसमें सनी देओल वकील अर्जुन मेहरा का रोल निभाते हैं और अक्षय खन्ना शौर्यमान गौर के रोल में हैं। डायरेक्टर हैं सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा। तो चलिए जानते हैं फिल्म में क्या कभी और क्या अच्छा है।
फिल्म की कहानी एक मर्डर केस से शुरू होती है। एक लड़की गंभीर घायल हालत में मिलती है, जो आखिरी बार शौर्यमान गौर (अक्षय खन्ना) के साथ क्लब से निकलते देखी गई थी। शौर्यमान पर मर्डर का इल्जाम लगता है। अब अर्जुन मेहरा (सनी देओल) को इस केस की डिफेंड करना पड़ता है। अर्जुन एक मशहूर वकील हैं, जिन्हें 'इक्का' कहकर बुलाया जाता है क्योंकि वो नामुमकिन केस भी जीत लेते हैं। लेकिन इस बार उन्हें उस शख्स की डिफेंड करना है जिसे वो नफरत करते हैं। कहानी में परिवार की जिंदगी और कई सवाल उठते हैं। फिल्म में कोर्ट के कई सुनवाई के सीन हैं, गवाहों की जिरह है और आखिर में बड़े ट्विस्ट आते हैं। शुरू में सेटअप अच्छा है लेकिन बीच में कहानी थोड़ी रुक जाती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सनी देओल हैं। वो स्क्रीन पर पूरी तरह छा जाते हैं। उनके परिवार के साथ इमोशनल सीन दिल को छू जाते हैं। कोर्ट सीन में उनकी मौजूदगी दमदार है। आखिरी 30 मिनट फिल्म को बचा लेते हैं। फिल्म की एडिंग में दो बड़े ट्विस्ट आते हैं जो कहानी को पूरी तरह बदल देते हैं। एक ट्विस्ट थोड़ा अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन दूसरा इतना स्मार्ट है कि देखकर हैरानी होती है। तिलोत्तमा शोम पब्लिक प्रॉसीक्यूटर के रोल में अच्छी हैं, उनके और सनी के बीच के डायलॉग मजेदार हैं। क्लाइमेक्स में सस्पेंस और इमोशन दोनों अच्छे से आते हैं। फिल्म आपको सिर्फ कहानी नहीं सुनाती, बल्कि किरदारों के दर्द और परेशानियों को महसूस करवाने की कोशिश करती है। यही वजह है कि कई सीन सीधे दिल तक पहुंचते हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी रफ्तार है। पहले 90 मिनट बहुत धीमे और बोरिंग लगते हैं। कहानी आगे बढ़ने का नाम नहीं लेती, बार-बार कोर्ट सीन आते हैं लेकिन उतना सस्पेंस नहीं बनता। अक्षय खन्ना का रोल पॉलिश्ड तो है लेकिन पहले वाली फिल्मों जैसा ही लगता है, कुछ नया नहीं। कई सीन प्रेडिक्टेबल हैं, यानी पहले से समझ आ जाता है कि क्या होने वाला है। दीया मिर्जा और संजीदा शेख जैसे स्टार्स को ज्यादा कुछ नहीं दिया गया। बीच का हिस्सा खिंचा हुआ और कमजोर लगता है।
आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें अच्छी एक्टिंग, इमोशन और मजबूत कहानी हो तो 'इक्का' एक बार जरूर देखी जा सकती है। ये फिल्म अपने कलाकारों की परफॉर्मेंस और इमोशनल कहानी की वजह से आपको बांधे रखती है। लेकिन अगर आप सिर्फ एंटरटेनमेंट की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो ये फिल्म शायद आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी न उतरे। कुल मिलाकर, 'इक्का' एक ऐसी फिल्म है जो अपनी कहानी और एक्टिंग के दम पर असर छोड़ती है। थोड़ी धीमी रफ्तार इसकी कमी जरूर है, लेकिन अच्छी एक्टिंग और इमोशनल कहानी के लिए इसे मौका दिया जा सकता है।