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Dharmendra's Best 7 Movies: धर्मेंद्र बॉलीवुड इंडस्ट्री का वो नाम है, जो किसी पहचान का मोहताज नहीं है। बॉलीवुड में धर्मेंद्र को ही'मैन के नाम भी जनता है। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब में जन्में धर्मेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत 1960 में आई फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से की थी। इस मूवी के बाद धर्मेंद्र को इंडियन सिनेमा में बड़ी पहचान मिली थी। इस मूवी के बाद धर्मेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2012 में धर्मेंद्र को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। रोमांस से लेकर कॉमेडी और एक्शन तक, हर तरह की फिल्मों में धर्मेंद्र ने अपना हाथ आजमाया। आज हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको धर्मेंद्र (Dharmendra) की 7 बेस्ट मूवीज के बारे में बारे में बताने जा रहे हैं, जो उनकी विरासत को बॉलीवुड में आज भी कायम रखती हैं।
बिमल रॉय की 'बंदिनी' में धर्मेंद्र ने डॉ. सुदर्शन की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला की है, जो हत्या के लिए उम्रकैद की सजा काट रही है। फिल्म में उस महिला का किरदार नूतन ने निभाया था। इस फिल्म में धर्मेंद्र का प्रदर्शन आकर्षण और संवेदनशीलता से भरा है। इस मूवी की कहानी बेहद शानदार और अनोखी है।
ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी 'अनुपमा' में धर्मेंद्र ने अशोक की भूमिका निभाई थी, जो एक स्कूल टीचर हैं जिनकी आत्मा काव्यात्मक है। यह मूवी रिश्तों की जटिलताओं और आत्म-खोज की पड़ताल करती है, जिसमें धर्मेंद्र का किरदार ताकत और कमजोरी का परफेक्ट मिश्रण है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक पहलवान, साहित्य में डूबे लगता है। इस मूवी में शर्मीला टैगोर और देवेन वर्मा जैसे कई कलाकार मौजूद हैं।
ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म 'सत्यकाम' का भी डायरेक्शन किया था। फिल्म में धर्मेंद्र सत्यप्रिय आचार्य की भूमिका निभाते हैं, जो एक सिविल इंजीनियर हैं। इस मूवी में वो अपने आदर्शों से कोई समझौता नहीं करते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे धर्मेंद्र एक यौन उत्पीड़न की शिकार महिला से सामाजिक मानदंडों के खिलाफ शादी करने के बाद आने वाली चुनौतियों का सामने करते हैं।
ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमेडी क्लासिक फिल्म 'चुपके चुपके' में भी धर्मेंद्र का अहम रोल थे। डॉ. परिमल त्रिपाठी के किरदार में धर्मेंद्र एक निर्दोष प्रैक्टिकल जोक की साजिश रचते हैं, जो उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शाता है। इस मूवी में धर्मेंद्र का ह्यूमर और शरारती प्रदर्शन इसे लाजवाब बनाता है।
रमेश सिप्पी की एक्शन और कॉमेडी से भरपूर फिल्म 'शोले' में धर्मेंद्र ने वीरू की भूमिका थी। इस मूवी में धर्मेंद्र के दोस्त जय के किरदार में अमिताभ बच्चन नजर आए। फिल्म में जय-वीरू की जोड़ी ब्लॉकबस्टर रही। इस मूवी के आइकॉनिक गीतों से लेकर धर्मेंद्र का प्रदर्शन ऑडियंस को इम्प्रेस करने में कामयाब रहा। आज भी यह मूवी दर्शक बार-बार देखते हैं।
1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 'हकीकत' में धर्मेंद्र ने कैप्टन बहादुर सिंह की भूमिका निभाई थी। उनका किरदार सैनिकों की बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक होता है। फिल्म क्रिटिक्स और दर्शकों की ओर से 'हकीकत' को खूब तारीफें मिली थीं। यह मूवी 1965 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीतती है। फिल्म में धर्मेंद्र के प्रदर्शन बेहद शानदार था।
ओ.पी. रलहन द्वारा निर्देशित 'फूल और पत्थर' धर्मेंद्र के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी। इस मूवी में उन्हें बतौर लीड हीरो के रोल में देखा गया था। शक्ति की भूमिका में वे एक युवा अपराधी हैं जो एक विधवा महिला के लिए परिवर्तन से गुजरता है। धर्मेंद्र का इंटेंस परफॉर्मेंस और फिल्म की सफलता ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई थी।