बॉलीवुड

Batwara 1947 में पैसे लगाने के लिए तैयार नहीं थे इन्वेस्टर्स, Rajkumar Santoshi ने किया खुलासा

Batwara 1947: बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रही है। इस बीच निर्देशक राजकुमार संतोषी ने खुलासा किया कि फिल्म के विषय और सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर निवेशक चिंतित थे।

Image

राजकुमार संतोषी ने किया बड़ा खुलासा (pic credit-instagram)

Batwara 1947: बॉलीवुड स्टार सनी देओल (Sunny Deol) की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ (Batwara 1947) हाल ही में रिलीज हुई है। फिल्म बंटवारा 1947 बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। हालांकि, फिल्म में सनी देओल की एक्टिंग की काफी तारीफ हो रही है। इस बीच फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी ने खुलासा किया है कि इस फिल्म को बनाने के लिए फाइनेंस जुटाना आसान नहीं था। निवेशकों को फिल्म का विषय जोखिम भरा लग रहा था और सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर भी कई लोगों को आपत्ति थी। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-'अक्खा बॉलीवुड एक तरफ...' Awarapan 2 हिट होते ही Parveen Hashmi ने पति Emraan Hashmi पर लुटाया प्यार)

राजकुमार संतोषी ने किया बड़ा खुलासा

गलाटा इंडिया को दिए इंटरव्यू में राजकुमार संतोषी ने बताया कि मुंबई के ज्यादातर निवेशक उनके और सनी देओल के साथ एक सामान्य एक्शन फिल्म बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि सनी एक्शन हीरो के रूप में नजर आएं, जैसा वह ‘घायल’ और ‘घातक’ जैसी फिल्मों में दिख चुके हैं। लेकिन ‘बंटवारा 1947’ में सनी एक मुस्लिम किरदार निभा रहे हैं, इसलिए कई निवेशक इस फिल्म पर पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं थे। राजकुमार संतोषी ने यह भी साफ किया कि सनी का किरदार पाकिस्तानी नहीं है। वह भारत का एक मुस्लिम व्यक्ति है, जो बंटवारे के दौरान अपनी जान और परिवार को बचाने के लिए पाकिस्तान चला जाता है। निर्देशक के अनुसार, फिल्म का विषय भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण था, क्योंकि यह भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित है।

राजकुमार संतोषी ने बताया कि आमिर खान को इस फिल्म के बारे में जानकारी थी और वह इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सपोर्टिव थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर कोई और फिल्म को प्रोड्यूस नहीं करेगा, तो वह खुद इसे प्रोड्यूस करेंगे। ‘बंटवारा 1947’ से राजकुमार संतोषी और सनी देओल करीब 30 साल बाद साथ आए हैं। दोनों ने इससे पहले ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी यादगार फिल्मों में काम किया था। फिल्म असगर वजाहत के 1989 के नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्याई नई’ पर आधारित है। कहानी एक शादीशुदा जोड़े की है, जिसे बंटवारे के बाद पाकिस्तान जाना पड़ता है। वहां उन्हें एक घर मिलता है, जिसमें पहले से एक हिंदू महिला रह रही होती है। इसके बाद सनी का किरदार उस महिला और अपने परिवार की सुरक्षा करने का फैसला करता है।

Kumar Sarash
कुमार सरसauthor

कुमार सरस टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एंटरटेनमेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और रोचक है, जो पाठकों को तुरंत जोड़ लेती है। कुमार सरस को बॉलीवुड, टीवी और OTT की ट्रेंडिंग खबरों पर काम करने में खास रुचि है। अब तक उन्होंने 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिखे हैं, जिनमें ब्रेकिंग न्यूज़, एक्सक्लूसिव अपडेट्स और एंटरटेनमेंट फीचर्स शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article