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वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं वरुण धवन, बोले-मेरे लिए बहुत मुश्किल समय है...

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  • Updated Nov 5, 2022, 01:06 PM IST

वरुण धवन इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म भेड़िया के प्रमोशन में बिजी है। एक्टर ने कहा कि कोरोना के बाद मैंने खुद पर बहुत प्रेशर फील किया है। उन्होंने खुलासा किया कि मैं वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन डिसऑर्डर से जूझ रहा हूं। इसकी वजह से मैं काफी तनाव में था।

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varun dhawan (credit pic: instagram)

वरुण धवन (Varun Dhawan) इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म भेड़िया (Bhediya) के प्रमोशन में बिजी हैं। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस फिल्म को लेकर फैंस के बीच जबदरस्त बज बना हुआ है। ये फिल्म 25 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में वरुण के साथ कृति सेनन लीड रोल में हैं। एक्टर ने हाल ही में खुलासा किया कि वो वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन डिसऑर्डर (vestibular hypofunction disorder) से जूझ रहे हैं। इसका असर आपके बैलेंस पर पड़ता है। वरुण ने कहा कि कोरोना के बाद मुझे फिल्मों में वापसी को लेकर बहुत प्रेशर फील हुआ।

मुंबई के एक इवेंट में वरुण ने कहा कि जब मुझे इस बीमारी के बारे में पता चला तो मुझे मजबूरन अपने काम से बेक्र लेना पड़ा। उन्होंने कहा कोरोना महामारी के बाद मेरे लिए चीजें काफी बदल गई है। उन्होंने इंडिया टूडे के कॉन्क्लेव में कहा कि मैंने 'जुगजुग जियो' के दौरान जरूरत से ज्यादा मेहनत की। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कोई इलेक्शन लड़ रहा हूं। मुझे नहीं पता ऐसा क्यों हुआ, लेकिन मैंने खुद को बहुत प्रेशर में महसूस किया।

वरुण बोले- कोरोना के बाद फिल्मों को लेकर बहुत प्रेशर है

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे एक बीमारी है जिसे वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन कहते हैं, जिसमें आपका बैलेंस खो जाता है। इस बात को जानने के बाद मैं तनाव में आ गया था। मैंने इसके बावजूद बहुत मेहनत की है। हम सभी एक रेस में हैं। मुझे लगता है कि हम सभी के जीवन का एक लक्ष्य होता है, जिसके लिए हम मेहनत करते हैं। मैं अपने जीवन का मकसद खोज रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि बाकी लोग भी कभी न कभी अपने जीवन का मकसद खोज लेंगे।

क्या होता है वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन डिसऑर्डर

वेस्टिबुलर हाइपोफंक्शन एक तरह का डिसऑर्डर है, जो कान के अंदरूनी हिस्से में होता है। शरीर में वेस्टिबुलवर सिस्टम होता है जो कान, आंख और मसल्स में बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है। अगर किसी को ये डिसऑर्डर हो जाता है तो दिमाग से कान तक पहुंचने वाले मैसेज दिक्कत आती है। इसकी वजह से मरीज को चक्कर आने लगते हैं।

प्रियंका झा
प्रियंका झाauthor

मेरा नाम प्रियंका झा है। मैं टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी राइटर साल 2022 से जुड़ी हुई हूं। मीडिया में मुझे काम करने का 4 साल से ज्यादा का अनुभव है। मैंने अपने करियर की शुरूआत टीवी 9 भारतवर्ष से बतौर सब एडिटर की थी। इसके अलावा बतौर कंटेंट राइटर मैं कुछ महीनों इनशॉट्स टीम का हिस्सा भी रहीं हूं । मुझे हेल्थ और मनोरंजन की खबरें पढ़ने और लिखने में दिलचस्पी है। मैंने अपने करियर में हेल्थ, लाइफस्टाइल और मनोरंजन जैसी अलग-अलग बीट्स पर काम किया है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा मैंने भारतीय विद्या भवन से पब्लिक रिलेशन में डिप्लोमा और गुरु जाम्बेश्वर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली है।

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