इलेक्शन

क्या ओसामा बचा पाएंगे अपने पिता शाहबुद्दीन का गढ़, इस बार दिलचस्प मोड़ पर रघुनाथपुर सीट का सियासी मुकाबला

  • Agency by: Agency
  • Updated Nov 4, 2025, 02:16 PM IST

रघुनाथपुर विधानसभा सीट उन सीटों में शामिल है जहां जातीय समीकरण और स्थानीय नेतृत्व दोनों ही बराबर असर रखते हैं। यह सीट सिवान लोकसभा क्षेत्र के तहत आती है। इस सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ। इस पहले चुनाव में कांग्रेस के राम नंदन यादव ने जीत दर्ज की।

Image

रघुनाथ सीट पर इस बार है कड़ा मुकाबला। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Bihar Assembly Election 2025 : बिहार की हाई प्रोफाइल सीट में सिवान जिले की रघुनाथपुर सीट भी शामिल है। इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने दिवंगत बाहुबली नेता शाहबुद्दीन के बेटे ओसामा साहब को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर पहले चरण यानी छह नवंबर को मतदान होगा। 2021 में शाहबुद्दीन की मौत हो जाने के बाद रघुनाथपुर में पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहा है। यह सीट अभी राजद के पास है। 2020 के चुनाव में इस सीट से राजद के हरिशंकर यादव विजयी हुए। ओसामा के लिए हरिशंकर ने अपनी सीट छोड़ दी है। इस हॉट सीट पर ओसामा का मुकाबला JDU के विकास कुमार सिंह उर्फ जीशू सिंह से है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज से राहुल कीर्ति मैदान में हैं।

इस सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या 23.2%

इस सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या 23.2%, अनुसूचित जातियों के वोटर करीब 11.49% और यादव वोटर 9.6% है। यहां का जातीय समीकरण RJD के पक्ष में जाता है। इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 2,93,101 है जिनमें पुरुष वोटरों की संख्या 154452 और महिला मतदाताओं की संख्या 138640 है।

पहली बार विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ

रघुनाथपुर विधानसभा सीट उन सीटों में शामिल है जहां जातीय समीकरण और स्थानीय नेतृत्व दोनों ही बराबर असर रखते हैं। यह सीट सिवान लोकसभा क्षेत्र के तहत आती है। इस सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ। इस पहले चुनाव में कांग्रेस के राम नंदन यादव ने जीत दर्ज की। 2020 में इस सीट पर राजद के हरिशंकर यादव ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। रघुनाथपुर सीट कई सामाजिक समीकरणों से जुड़ी है। यहां यादव, राजपूत, भूमिहार और मुसलमान मतदाता यहां जीत-हार की संभावनाओं बढ़ाते या घटाते हैं। जानकारों का कहना है कि रघुनाथपुर में 2025 का विधानसभा चुनाव दिलचस्प रहेगा। आरजेडी यहां अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की फिराक में है तो एनडीए इस सीट पर नया समीकरण बनाकर जीत दर्ज करना चाहता है।

निर्णायक भूमिका में मुसलमान, यादव और राजपूत

रघुनाथपुर सीट पर मुसलमान, यादव और राजपूत निर्णायक भूमिका में हैं. हरिशंकर यादव के समर्थकों के अनुसार मुसलमान और यादव मिलाकर लगभग 25 प्रतिशत मतदाता हैं, जबकि राजपूतों की संख्या भी लगभग उतनी ही है. इसके अलावा कोईरी, कुर्मी और अति पिछड़े वर्ग के मतदाता भी प्रभावी हैं. एनडीए खेमे का कहना है कि पिछले चुनाव में उनके वोट विभाजित हो गये थे. उस समय मनोज सिंह (लोजपा) दूसरे स्थान पर और राजेश्वर चौहान (जदयू) तीसरे स्थान पर रहे थे. इस बार गठबंधन में एकजुटता है, जिससे समीकरण बदल सकते हैं। शहाबुद्दीन अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी छाया अब भी रघुनाथपुर की राजनीति पर बनी हुई है। इस बार का पूरा चुनाव एक तरह से 'शहाबुद्दीन बनाम विकास' की टक्कर बन गया है. एक ओर उनके समर्थक ओसामा के साथ हैं, वहीं विरोधी मतदाता इस बार बदलाव के पक्ष में माने जा रहे हैं।

पूरे राज्य के लिए अहम हैं रघुनाथपुर के नतीजे

राजद विधायक हरिशंकर यादव का कहना है कि स्थानीय जनता ओसामा के साथ है। वह जीत सुनिश्चित करने के लिए अभियान चला रहे हैं। क्षेत्र की अगर बात करें तो यहां माहौल मिश्रित दिखाई देता है। कुछ लोग पुराने दौर की ही बातों को भुलाकर नई शुरुआत चाहते हैं, जबकि दूसरे विरासत को बरकरार रखने के पक्ष में हैं। दोनों ही तरफ के भाषणों में निजी आरोप-प्रत्यारोप और भावनात्मक अपील प्रमुख रहे। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि रघुनाथपुर के नतीजे केवल इस विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेंगे; यह बिहार में वंशवाद बनाम नव उभरते नेताओं की लड़ाई का प्रतीक बनकर उभर रही है। परिणाम चाहे जो भी हों, इस चुनाव की गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई देगी।

End of Article