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Chhattisgarh CM: कौन हैं विष्णु देव साय? जिनके हाथों में भाजपा ने सौंपी छत्तीसगढ़ की कमान

Who Is Vishnu Dev Sai: भाजपा ने छत्तीसगढ़ की कमान विष्णु देव साय के हाथों में सौंपने का फैसला किया है। बतौर मुख्यमंत्री उनकी ताजपोशी की जाएगी। लोकसभा चुनाव से पहले आदिवासी चेहरे को सीएम बनाना भाजपा की बेहद अहम स्ट्रेटजी साबित हो सकती है। जानें कौन हैं विष्णु देव।

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छत्तीसगढ़ के नए सीएम होंगे विष्णु देव साय

Photo : Times Now Digital

Vishnu Dev Sai Profile: भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगा दी है। विष्णु देव साय की बतौर मुख्यमंत्री ताजपोशी होगी। विष्णु देव साय पूर्व सीएम रमन सिंह के चहेते हैं। विष्णुदेव जशपुर जिले के कुनकुरी से विधायक हैं। भाजपा ने सूबे की कमान आदिवासी चेहरा के हाथों में सौंपी है। जानकारी के अनुसार रमन सिंह ने उनका नाम प्रस्ताव किया किया। जिसके बाद अरुण साव, बृजमोहन अग्रवाल ने इस पर समर्थन किया। वो बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। नीचे पढ़िए विष्णु देव साय से जुड़ी अहम बातें।

रायगढ़ के सांसद रहे हैं विष्णु देव साय

आदिवासी समाज से आने वाले विष्णुदेव साय कुनकुरी विधानसभा से जीते हैं। इन्हें केंद्रीय नेतृत्व के साथ ही साथ पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह का भी करीबी माना जाता है। साल 1999 से 2014 तक वो रायगढ़ से सांसद रहे हैं। साय को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्र में मंत्री बनाया गया था, जिसके बाद उन्होंने संगठन के पद से इस्तीफा दे दिया था।

विष्णु देव साय के परिवार को जानिए

छत्तीसगढ़ राज्य में जशपुर जिले के बगिया गांव में विष्णु देव साय का जन्म हुआ था। वो किसान परिवार से ताल्लकु रखते हैं। उनके पिता का नाम राम प्रसाद साय और माता का नाम है। साय ने अपनी पढ़ाई लिखाई छत्तीसगढ़ के जशपुर के कुनकुरी से ही की। साल 1991 में उनकी शादी कौशल्या देवी से हुई। विष्णु देव साय का एक बेटा और दो बेटियां हैं। मोदी सरकार के पहले टर्न में उन्हें भारत सरकार का इस्पात और खान राज्य मंत्री बनाया गया था।

दो बार विधायक, अटल सरकार में रहे मंत्री

विष्णु देव साय पहली बार वर्ष 1990 से 1998 तक मध्य प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे है। इसके बाद वर्ष 1999 में वो रायगढ़ से सांसद बने। पहले ही ये अनुमान लगाया जा रहा था कि पार्टी अगर रमन सिंह को नहीं चुनती है तो वह आदिवासी समुदाय से किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर भाजपा का ये बड़ा फैसला है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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