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Madhavi Latha: कौन है वो महिला, जिन्हें हैदराबाद से BJP ने ओवैसी के खिलाफ दिया टिकट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 3, 2024, 10:34 AM IST

Who is Madhavi Latha: यह पहली बार है जब बीजेपी ने हैदराबाद लोकसभा सीट से किसी महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। पार्टी ने यहां असदुद्दीन औवैसी के खिलाफ माधवी लता को टिकट दिया है। वह ओवैसी की कट्टर आलोचक हैं और हिंदुत्व को लेकर काफी मुखर रहती हैं।

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हैदराबाद से बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता

Photo : Twitter

Hyderabad BJP candidate Madhavi Latha: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा चुनाव के लिए 195 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इसमें तेलंगाना की हैदराबाद सीट भी शामिल है। यह सीट AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का गढ़ मानी जाती है। ओवैसी परिवार का इस सीट पर 1984 से कब्जा रहा है। इस बार बीजेपी ने इस सीट पर महिला उम्मीदवार को उतार कर बड़ा दांव खेला है। ऐसे में एकतरफा मुकाबले वाली इस सीट की चर्चा बढ़ गई है।

बीजेपी ने हैदराबाद सीट पर ओवैसी के खिलाफ महिला प्रत्याशी माधवी लता को उतारा है। टिकट मिलने के बाद उन्होंने असदुद्दीन पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि यहां मंदिरों और हिंदुओं के घरों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य की कोई सुविधा मौजूद नहीं है। यहां तक कि मदरसों में भी बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा है। बता दें, माधवी लता असदुद्दीन ओवैसी की कट्टर आलोचक मानी जाती हैं और हिंदुत्व को लेकर काफी मुखर भी रहती हैं। आइए जानत हैं माधवी लता के बारे में...

आखिर कौन हैं माधवी लता?

भारतीय जनता पार्टी ने पिछली बार इस सीट से भगवंत राव को मैदान में उतारा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब पार्टी ने नए चेहरे पर दांव खेला है। माधवी लता विरिंची हॉस्पिटल की चेयरपर्सन हैं और वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं, इसके अलावा वह भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वह लोपामुद्रा चैरिटेबल ट्रस्ट और लतामा फाउंडेशन की प्रमुख हैं। राजनीति शास्त्र में एमए करने वाली माधवी लता हिंदुत्व को लेकर काफी मुखर रहती हैं, उनके कई भाषण भी वायरल हो चुके हैं।

पहली बार महिला प्रत्याशी

यह पहली बार है जब बीजेपी ने हैदराबाद सीट से किसी महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। 2019 में पार्टी ने भगवंत राव को टिकट दिया था। वह 2,82,186 वोटों से ओवैसी से हार गए थे और उन्हें लगभग 26 प्रतिशत वोट मिले। जबकि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को इस सीट से 5,17,471 यानी 58.95 प्रतिशत वोट मिले थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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