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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: दक्षिण बंगाल क्यों बना सत्ता की चाबी,भाजपा क्यों तोड़ना चाहती है तृणमूल का सबसे मजबूत किला?

West Bengal Elections 2026: 2021 के विधानसभा चुनाव में इन 142 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 123 सीटें जीती थीं,जबकि भाजपा को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं और एक सीट आईएसएफ के खाते में गई थी। यही वजह है कि भाजपा के लिए दक्षिण बंगाल में सेंध लगाए बिना सत्ता की राह लगभग बंद मानी जा रही है।

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दक्षिण बंगाल पर सबकी निगाहें।

West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान खत्म हो गया है। यह सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं,बल्कि राज्य की सत्ता का निर्णायक संग्राम बन गया है। इस चरण में 142 सीटों पर वोटिंग हुई। जिसके बाद अब सभी की नजरें खासतौर पर दक्षिण बंगाल पर टिकी हैं। यही वह इलाका है जो तय करेगा कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में लौटेगी या भाजपा पहली बार बंगाल की गद्दी तक पहुंचने में कामयाब होगी।

क्यों अहम है दक्षिण बंगाल?

23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों की सीटों पर मुकाबला हुआ था,जहां भाजपा परंपरागत रूप से मजबूत मानी जाती है। लेकिन अब बारी है दक्षिण बंगाल की, जिसमें कोलकाता,हावड़ा,उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्वी बर्धमान जैसे जिले शामिल हैं। यही इलाके बंगाल की राजनीति का दिल माने जाते हैं।दक्षिण बंगाल केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक, आर्थिक और जनसंख्या शक्ति का केंद्र है। कोलकाता महानगर, औद्योगिक बेल्ट, बंदरगाह क्षेत्र, घनी आबादी वाले उपनगर, व्यापारिक समुदाय, ग्रामीण वोट बैंक और अल्पसंख्यक प्रभाव वाले कई इलाके इसी हिस्से में आते हैं।

भाजपा अगर लगा पाई दक्षिण बंगाल में सेंध तो ही मिल सकती है सत्ता

2021 के विधानसभा चुनाव में इन 142 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 123 सीटें जीती थीं,जबकि भाजपा को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं और एक सीट आईएसएफ के खाते में गई थी। यही वजह है कि भाजपा के लिए दक्षिण बंगाल में सेंध लगाए बिना सत्ता की राह लगभग बंद मानी जा रही है।

भाजपा की रणनीति क्या है?

आज मतदान खत्म होने से पहले अगर देखें तो भाजपा ने प्रचार के अंतिम दौर में पूरा फोकस दक्षिण बंगाल पर ही रखा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय नेताओं ने लगातार रैलियां कीं। चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार, घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा, चुनाव बाद हिंसा और नागरिकता कानून जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।

मतुआ समुदाय को साधने के लिए भाजपा नेताओं ने बनगांव स्थित मतुआ ठाकुरबाड़ी का दौरा किया। उत्तर 24 परगना और नदिया जिले में यह समुदाय चुनावी रूप से बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

तृणमूल कांग्रेस किस भरोसे मैदान में?

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने जवाबी रणनीति में क्षेत्रीय अस्मिता, बंगाल के अधिकार और कल्याणकारी योजनाओं को मुद्दा बनाया। ममता बनर्जी लगातार यह संदेश देती रही हैं कि भाजपा दिल्ली से बंगाल को नियंत्रित करना चाहती है।

लक्ष्मी भंडार, छात्रवृत्ति, महिला योजनाएं और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को तृणमूल अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। पार्टी का दावा है कि दक्षिण बंगाल के मतदाता भाजपा की “बाहरी राजनीति” को नकार देंगे।

दक्षिण बंगाल की भवानीपुर में सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला

इस चरण की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर है,जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती है। भाजपा ने यहां नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। 2021 में नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। अब भवानीपुर में लड़ाई को उसी मुकाबले की अगली कड़ी माना जा रहा है। अगर भाजपा यहां जीतती है तो यह प्रतीकात्मक रूप से बहुत बड़ा झटका होगा।

किस जिले में कितनी सीटें

  • उत्तर 24 परगना – 33 सीट
  • दक्षिण 24 परगना – 31 सीट
  • हुगली – 18 सीट
  • नदिया – 17 सीट
  • हावड़ा – 16 सीट
  • पूर्वी बर्धमान – 16 सीट
  • कोलकाता – 11 सीट

वोटर लिस्ट विवाद कितना बड़ा फैक्टर?

इस चुनाव में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) भी बड़ा मुद्दा बन गया है। लाखों नाम हटने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर 24 परगना में 12 लाख से अधिक नाम हटे, दक्षिण 24 परगना में 10 लाख से अधिक, कोलकाता में लगभग 7 लाख, हावड़ा में करीब 6 लाख, हुगली में 4 लाख से अधिक और नदिया में लगभग 5 लाख से अधिक वोट कटे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इससे चुनाव प्रभावित हो सकता है। जबकि प्रशासन इसे नियमित प्रक्रिया बता रहा है। यदि कई सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहता है, तो यह विवाद चुनाव बाद और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

अब किसकी बनेगी सरकार?

अगर तृणमूल दक्षिण बंगाल का अपना किला बचा लेती है,तो ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जाएगी। लेकिन यदि भाजपा यहां गेम पलट लेती है,तो बंगाल की राजनीति में पहली बार बड़ा सत्ता परिवर्तन संभव है। इसलिए बंगाल चुनाव का असली युद्ध उत्तर या पश्चिम बंगाल में नहीं,बल्कि दक्षिण बंगाल की गलियों,कस्बों और महानगरों में लड़ा जा रहा है। यहीं से तय होगा,दीदी फिर लौटेंगी या कमल पहली बार खिलेगा।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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