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कौन हैं सईद अहमद? जिनको BSP ने शाइस्ता का टिकट काटकर बनाया मेयर उम्मीदवार; कभी रहे थे विधायक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 18, 2023, 02:07 PM IST

UP Nikay Chunav 2023: बहुजन समाज पार्टी ने प्रयागराज सीट पर मुस्लिम कार्ड की खेला है। उन्होंने शाइस्ता की जगह सईद अहमद को प्रत्याशी बनाया है। सईद 2012 में सपा के टिकट से फूलपुर से विधायक रह चुके हैं।

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शाइस्ता परवीन

Photo : PTI

UP Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा प्रयागराज मेयर सीट की है। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद यह सीट और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गई है। इसकी खास वजह यह है कि बसपा ने पहले यहां अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को टिकट दिया था। हालांकि, उमेश पाल हत्याकांड में नामजद होने के कारण बसपा ने उनसे पल्ला झाड़ लिया।

इस हत्याकांड के बाद बसपा सुप्रीमो ने ऐलान किया था कि वह अतीक के परिवार से किसी को भी निकाय चुनाव में टिकट नहीं देंगी। इसके बाद से सभी की निगाहें इस सीट के मेयर प्रत्याशी पर थीं, जहां बसपा ने शाइस्ता का टिकट काटकर बसपा ने सईद अहमद को प्रत्याशी बनाया है।

कौन हैं सईद अहमद?

सईद अहमद 2012 में फूलपुर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वह समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े थे। हालांकि, बाद में यह बसपा में शामिल हो गए और अब मायावती ने उन पर बड़ा दांव खेला है। उन्हें अतीक की पत्नी शाइस्ता की जगह प्रयागराज मेयर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। वह प्रयागराज के ही रहने वाले हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं।

दसवीं तक पढ़ाई और करोड़पति शख्सियत

जानकारी के मुताबिक, सईद अहमद ने 10वीं तक ही पढ़ाई की है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वह करोड़ पति हैं। 2012 में उनकी संपत्ति चार करोड़ 35 लाख रुपये थी। वह खुद को एक करोबारी और समाजसेवी बताते हैं। इसके अलावा सईद पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। इसमें कई मालले गंभीर धाराओं में दर्ज हैं।

बसपा ने खेला मुस्लिम कार्ड

उमेश पाल हत्याकांड के बाद से फरार चल रही अतीक की पत्नी शाइस्ता का टिकट कटने के बाद कई ब्राह्मणवादी नेता बसपा से टिकट पाने की लाइन में थे। हालांकि, बसपा ने इस निकाय चुनाव में प्रयागराज सीट पर मुस्लिम कार्ड ही खेला। उन्होंने शाइस्ता की जगह मुस्लिम प्रत्याशी को ही उम्मीदवार घोषित किया है। बता दें,

बसपा ने 10 मेयर प्रत्याशियों की जारी की सूची

बता दें, बसपा ने 10 मेयर प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें उन्होंने प्रयागराज के अलावा वाराणसी, आगरा, मथुरा, गोरखपुर से भी अपने उम्मीदवारों को उतारा है। यूपी नगर निकाय चुनाव 4 मई और 11 मई को होगा। 13 मई को इसके नतीजे आएंगे।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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