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शशि थरूर vs राजीव चंद्रशेखर: कौन ज्यादा अमीर? बड़ी दिलचस्प है तिरुवनंतपुरम की लड़ाई, जानें इतिहास

Lok Sabha Election 2024: केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर इस बार की लड़ाई बड़ी दिलचस्प मोड़ पर आ चुकी है। यहां कांग्रेस के शशि थरूर और भाजपा राजीव चंद्रशेखर के बीच मुकाबला हो रहा है। भाजपा को पहली बार इस सीट पर खाता खुलने की उम्मीद है। हालांकि इतिहास कुछ और ही कहता है।

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तिरुवनंतपुरम में त्रिकोणीय लड़ाई।

Photo : Times Now Digital

Hot Seat: लोकसभा चुनाव 2024 में कई सीटों पर बड़ी दिलचस्प लड़ाई देखी जा रही है, हॉट सीटों में से एक केरल की तिरुवनंतपुरम सीट भी शामिल है। जहां कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार शशि थरूर के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने राजीव चंद्रशेखर को मैदान में उतारा है। दोनों ने नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं भाकपा ने इस सीट से पन्न्यन रवीन्द्रन को अपना उम्मीदवार बनाया है। आपको इस सीट का इतिहास बताते हैं, साथ ही आपको ये भी जानना चाहिए कि कौन ज्यादा अमीर है।

क्या कहता है तिरुवनंतपुरम सीट का इतिहास?

इस सीट का चुनावी इतिहास काफी अजब-गजब रहा है। 1952, 57 और 62 में निर्दलीय उम्मीदवार ने इस सीट पर चुनाव जीता, इसके बाद 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने चुनाव जीता। फिर 1971 में भी निर्दलीय उम्मीदवार को यहां से जीत नसीब हुई। 1977 में इंदिरा विरोधी दौर के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पहली बार यहां से चुनाव जीता। 1980 में इस सीट से कांग्रेस का खाता खुला और 1996 तक इस सीट पर उसका कब्जा रहा। हालांकि 96 में भाकपा ने वापसी की, फिर 1998 से 2004 तक कांग्रेस, 2004 से 2009 तक भाकपा और 2009 से अब तक इस सीट से कांग्रेस के शशि थरूर सांसद हैं।

तिरुवनंतपुरम सीट पर किसे कब-कब मिली जीत?

चुनावी वर्षविजेतापार्टी
1952एनी मास्कारेनस्वतंत्र
1957ईश्वर अय्यरस्वतंत्र
1962पीएस नटराज पिल्लईस्वतंत्र
1967पी. विश्वम्भरनसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1971वीके कृष्ण मेननस्वतंत्र
1977एमएन गोविंदन नायरभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1980नीललोहिथादासन नादरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984ए. चार्ल्सभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989ए. चार्ल्सभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1991ए. चार्ल्सभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1996केवी सुरेंद्रनाथभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1998के. करुणाकरणभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1999वीएस शिवकुमारभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2004पीके वासुदेवन नायरभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
2005 (उपचुनाव)पन्न्यन रवीन्द्रनभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
2009शशि थरूरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2014शशि थरूरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2019शशि थरूरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

अब तक भाजपा का तिरुवनंतपुरम में नहीं खुला खाता

सबसे हैरानी की बात ये है कि मोदी सरकार में मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भाजपा ने इस सीट से शशि थरूर को टक्कर देने के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है, इस सीट पर अब तक भाजपा का खाता तक नहीं खुल सका है। ऐसे में आखिर भाजपा ने इतना बड़ा रिस्क क्यों लिया, ये सोचने वाली बात है। हालांकि एक वेब सीरीज का ये डायलॉग बड़ा मशहूर है, 'रिस्क है तो इश्क है...' शायद भाजपा इस रिस्क के भरोसे इतिहास लिखने की कोशिश कर रही है।

शशि थरूर के पास 55 करोड़ रुपये की संपत्ति

केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से लगातार चौथी बार जीत हासिल करने की उम्मीद कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने नामांकन पत्रों में अपनी संपत्ति 55 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। तिरुवनंतपुरम से मौजूदा सांसद थरूर ने वित्त वर्ष 2022-2023 में अपनी कुल आय 4.32 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। थरूर ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण देते हुए कहा कि उनके पास 49 करोड़ रुपये से अधिक की चल संपत्ति है जिसमें 19 बैंक खातों में जमा अलग-अलग धनराशि और विभिन्न बांड, डिबेंचर, म्यूचुअल फंड आदि में निवेश शामिल है।

शशि थरूर के हलफनामे के अनुसार, उनकी चल संपत्ति में 32 लाख रुपये मूल्य का 534 ग्राम सोना और 36,000 रुपये नकदी भी शामिल हैं। थरूर की अचल संपत्ति 6.75 करोड़ रुपये से अधिक की है, जिसमें पलक्कड़ में 2.51 एकड़ कृषि भूमि में विरासत में मिला, भूखंड एक-चौथाई हिस्सा शामिल है, जिसकी कीमत अब 1.56 लाख रुपये है। इसके अलावा उनके पास तिरुवनंतपुरम में स्वयं अर्जित 10.47 एकड़ भूमि शामिल है, जिसकी कीमत फिलहाल 6.20 करोड़ रुपये से अधिक है। राज्य की राजधानी में स्थित उनके आवास की कीमत फिलहाल लगभग 52 लाख रुपये है। हलफनामे में कहा गया है कि सांसद के पास दो कार मारुति सुजुकी और मारुति एक्सएल6 हैं।

शशि थरूर के खिलाफ कितने मुकदमे हैं?

शशि थरूर फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी (टफ्ट्स यूनिवर्सिटी, अमेरिका) से कानून एवं डिप्लोमेसी में पीएचडी तक की पढ़ाई कर चुके हैं। साथ ही उनके पास पगेट साउंड विश्वविद्यालय, अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय संबंध में डॉक्टर ऑफ लेटर्स (मानद) उपाधि है। थरूर देशभर में नौ मामलों में आरोपी के रूप में नामजद हैं। उनके खिलाफ ज्यादातर प्राथमिकी कथित तौर पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के से संबंधित हैं और केरल में एक मामला गैरकानूनी सभा और दंगे से संबंधित है।

हलफनामे में कहा गया है कि वह चार मुकदमों का भी सामना कर रहे हैं, जिनमें से दो मानहानि के हैं। मानहानि के दो मामलों में से एक केरल और दिल्ली का है। उनके खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में कोलकाता में एक मामला दर्ज है। थरूर ने 2014 में अपनी संपत्ति 23 करोड़ से अधिक जबकि 2019 में 35 करोड़ रुपये से ज्यादा घोषित की थी।

राजीव चंद्रशेखर के पास कितने करोड़ की संपत्ति?

केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने 28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। चंद्रशेखर 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव में कांग्रेस कार्यकारी समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य व मौजूदा सांसद शशि थरूर और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के दिग्गज नेता पन्नियन रवींद्रन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। चंद्रशेखर ने बृहस्पतिवार को चुनाव अधिकारी के सामने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे के अनुसार, उनकी चल संपत्ति का कुल मूल्य 13,69,18,637 रुपये है, जबकि उनकी पत्नी के पास 12,47,00,408 रुपये की संपत्ति है।

इनमें उनके पास मौजूद नकदी, बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सहकारी समितियों में जमा का विवरण, साथ ही बांड, डिबेंचर, शेयर, कंपनियों/म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय इकाइयों में निवेश शामिल हैं। उनकी चल संपत्ति में 1942 मॉडल की 'रेड इंडियन स्काउट' भी शामिल है, जो कर्नाटक में पंजीकृत है। इसे 1994 में 10 हजार रुपये में खरीदा गया था। इसके साथ ही उनके पास आभूषण, सर्राफा और 3.25 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी हैं।

चंद्रशेखर की पत्नी के पास कितनी है संपत्ति?

भाजपा नेता की अचल संपत्तियों में 5,26,42,640 रुपये की कीमत पर खरीदी गई स्व-अर्जित संपत्ति शामिल है, जिसका अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य 14,40,00,000 रुपये है। चंद्रशेखर पर 19,41,92,894 रुपये की देनदारियां हैं, जिसको लेकर विवाद हैं जबकि उनकी पत्नी पर 1,63,43,972 रुपये की देनदारी है। इनमें बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य से ऋण शामिल हैं। वर्ष 2022-23 के आयकर रिटर्न में चंद्रशेखर की कुल आय 5,59,200 रुपये दिखाई गई है, जो वर्ष 2021-22 में 680 रुपये थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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