West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी तपिश बढ़ी हुई है। नेताओं और उनके समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच अहम मुकाबला देखा जा सकता है, जबकि कांग्रेस भी लगातार अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। इस बीच, टाइम्स नाउ नवभारत की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बंगाल यात्रा जारी है। ऐसे में कार्यक्रम के मद्देनजर टाइम्स नाउ की टीम आज सियालदह विधानसभा सीट के सियालदह रेलवे स्टेशन वाले इलाके में पहुंची और ग्राउंड जीरो से जानने की कोशिश की कि जनता के मन में क्या चल रहा है? क्या टीएमसी और लेफ्ट-कांग्रेस का जादू बरकरार है या बीजेपी कोई बड़ा उलटफेर करने वाली है?
'दीदी' की वापसी या 'हड्डा-हड्डी' मुकाबला?
यहां जनता से बातचीत में पता चला कि मुकाबला एकतरफा नहीं, बल्कि बेहद कांटे का है। कई लोगों का स्पष्ट तौर पर मानना है कि ममता बनर्जी एक मजबूत चेहरा हैं और उनके सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं है। बंगाल में 'दादा की नहीं, दीदी की चलेगी' और उन्हीं की सत्ता में वापसी होगी। वहीं, लोगों से बात करने पर ममता सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का असर भी ग्राउंड जीरो पर दिखा, जैसे 'युवा भारती' योजना के तहत युवाओं को मिलने वाला 1500 रुपये का भत्ता लोगों के खातों में पहुंच रहा है। जबकि कुछ लोग परिवर्तन की बात कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच ही मुकाबला होगा। टाइम्स नाउ नवभारत की एंकर श्वेता भट्टाचार्य ने सियालदह की जनता से बात कर एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है, वो देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
जनता की राय बंटी हुई
वहीं, चुनाव में यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के आने की भी संभावना है। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि ओवैसी के आने से वोट नहीं बंटेगा, क्योंकि अल्पसंख्यक मतदाता इस बात को लेकर जागरूक हैं कि बीजेपी को हराने के लिए उन्हें एकजुट होकर टीएमसी को ही वोट देना है। दूसरी ओर, कुछ मतदाताओं ने साफ कहा कि वे परिवर्तन चाहते हैं और इस बार बीजेपी को मौका देने की सोच रहे हैं। कहा जा सकता है कि लोगों की राय बंटी हुई दिखी।
कई लोग राय रखने से बचते दिखे
वहीं, कई लोगों ने स्वीकार किया कि वे अपने राजनीतिक विचार खुलकर सामने नहीं रख पा रहे, क्योंकि बंगाल में चुनाव के दौरान डर और हिंसा का माहौल रहता है। एक वोटर का कहना था कि अगर बूथ पर बिना किसी डर और भय के शांतिपूर्ण ढंग से वोटिंग होगी, तभी कोई असल 'परिवर्तन' संभव है।
सियालदह स्टेशन पर दिखी विकास की नई तस्वीर
सियालदह स्टेशन पर विकास की नई तस्वीर देखने को मिल रही है। एनडीए सरकार के दौरान यहां साफ-सफाई में सुधार हुआ है और यात्रियों की सुविधा के लिए नई टैक्सी शेड जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बंगाल के रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए 12,400 करोड़ रुपये का बजट दिया है, जो यूपीए शासनकाल की तुलना में तीन गुना अधिक है । हाल ही में तैयार हुआ सियालदह मेट्रो स्टेशन, हावड़ा और साल्ट लेक को जोड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों और ऑफिस जाने वालों की राह बेहद आसान हो गई है । हालांकि, इस विकास के बीच केंद्र और राज्य सरकार की राजनीतिक खींचतान भी साफ नजर आती है। रेलवे विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण की फाइलें राज्य सरकार के दफ्तरों में महीनों धूल फांकती हैं, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र पर फंड न देने का आरोप लगाती हैं ।
बंगाल में कब होगा मतदान?
सनद रहे कि चुनाव आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव संपन्न होंगे। पहले चरण की 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को, जबकि 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई की जाएगी।
