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'बुर्का हटाकर न हो मुस्लिम महिलाओं की चेकिंग...' उपचुनाव में वोटिंग से पहले सपा ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी

UP By Election: सपा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि उपचुनाव में मतदान के दौरान मुस्लिम महिलाओं की बुर्का हटाकर चेकिंग न की जाए। इस तरह की चेकिंग से मुस्लिम महिलाएं डर जाती हैं और मतदान नहीं कर पाती हैं।

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समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव।

Photo : Twitter

UP By Election: उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी है। इसमें सपा ने चुनाव आयोग से पुलिस द्वारा शक्तियों के गलत इस्तेमाल को रोकने की मांग की है। सपा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मतदान के दौरान मुस्लिम महिलाओं की बुर्का हटाकर चेकिंग न की जाए। इस तरह की चेकिंग से मुस्लिम महिलाएं डर जाती हैं और मतदान नहीं कर पाती हैं।

सपा ने मांग की है कि पोलिंग बूथ पर केवल चुनाव आयोग के अधिकारी हभ् चेकिंग करें, पुलिस के पास वोटर का पहचान पत्र जांच करने का अधिकार न हो। बता दें, उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर बुधवार को मतदान होना है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के यूपी अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि रिटर्निंग ऑफिसर/जिला मजिस्ट्रेट, जनरल ऑब्जर्वर और पुलिस अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किया जाए कि 20 नवंबर 2024 मतदान के दौरान कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी मतदाता की मतदाता पहचान-पत्र की जांच नहीं करेगा। पत्र में आगे कहा गया है कि मतदाता पहचान-पत्र की जांच करने का अधिकार मतदान अधिकारी के पास है।

लोकसभा चुनाव में उतरवाए गए थे बुर्के

समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदान के दौरान पुलिस को शक्ति और पद का दुरुपयोग करने से रोका जाए। इसमें कहा गया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने सपा समर्थकों और विशेष तौर पर मुस्लिम महिलाओं को डराकर उनके बुर्के उतरवा दिए थे। इससे मतदान प्रभावित हुआ था और कई महिलाएं बिना मतदान ही वापस लौट गई थीं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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