इलेक्शन

क्या हाईकमान से बालकनाथ को आया कोई मैसेज? CM की रेस से पीछे हटने के संकेत या कुछ और... बहुत कुछ कह रहा ताजा बयान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 9, 2023, 12:03 PM IST

Rajasthan New CM Race: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बाबा बालकनाथ को संकेत मिल गया है कि वह मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं और दिल्ली हाईकमान ने अभी उनसे इंतजार करने को कहा है।

Image

बाबा बालकनाथ

Photo : Twitter

Rajasthan New CM Race: राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ा संकट मुख्यमंत्री को लेकर है। इस एक कुर्सी के लिए कई दावेदार हैं। वसुंधरा जहां दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं तो इन सबके बीच राजस्थान की तिजारा सीट से नवनिर्वाचित विधायक बाबा बालकनाथ भी रेस में हैं। उन्हें भी सीएम पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

हालांकि, कल होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले बाबा बालकनाथ के बयान ने सियासी हलचलों को बढ़ा दिया है। बालकनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि इन्हें अभी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अनुभव प्राप्त करना है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें दिल्ली से कोई मैसेज मिला है, जिसके बाद बालकनाथ ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

जारी करना पड़ा बयान

विधायक दल की बैठक से पहले बाबा बालकनाथ ने एक्स पर कहा है कि पार्टी और प्रधानमंत्री पार्टी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनता-जनार्धन ने पहली बार सांसद व विधायक बना कर राष्ट्रसेवा का अवसर दिया।चुनाव परिणाम आने के बाद से मीडिया व सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को नज़र अंदाज़ करें।मुझे अभी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में अनुभव प्राप्त करना है। इसके बाद चर्चा है कि दिल्ली से बालकनाथ को अभी इंतजार करने का संदेश दिया गया है और उन्हें बतौर मंत्री अनुभव प्राप्त करने को कहा गया है।

तो फिर कौन होगा मुख्यमंत्री

राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला तो विधायक दल की बैठक के बाद ही होगा। हालांकि, यह जरूर कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही मुख्यमंत्री का ऐलान करेगी। आम चुनाव के मद्देनजर पार्टी बालकनाथ को आगे करने में हिचकिचा रही है, तो वहीं वसुंधरा राजे को सम्मानजनक पद दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, राजे इस बात के लिए राजी नहीं हैं। खबर यह भ्ज्ञी है कि राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को डिप्टी सीएम या मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article