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BRICS 2026: बदलती वैश्विक शक्ति का निर्णायक पड़ाव, TIMES NOW की खास कवरेज

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट से पहले टाइम्स नाउ ने समिट के बदलते स्वरूप, ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव और भारत की भूमिका पर दिग्गज विशेषज्ञों से खास बातचीत की। मार्टिन वुल्फ, जेफ्री सैक्स और पराग खन्ना समेत विशेषज्ञों ने भारत-चीन संबंध, अमेरिका की भूमिका, ऊर्जा सुरक्षा और नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर अपनी राय रखी।

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BRICS Summit 2026: टाइम्स नाउ के मंच पर नई विश्व व्यवस्था पर मंथन।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत तैयार है। शिखर सम्मेलन के साथ ही वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और उभरती नई विश्व व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल केंद्र में आ गए हैं।

12 और 13 सितंबर को 'ब्रिक्स डायलॉग' (BRICS Dialogues) के जरिए टाइम्स नाउ, ब्रिक्स के बदलते स्वरूप, इसके बढ़ते प्रभाव और वैश्विक व्यवस्था पर इसके असर को लेकर विस्तार से चर्चा करेगा। समिट की तैयारियों से लेकर जमीनी घटनाक्रम और इससे जुड़े बड़े वैश्विक मुद्दों तक, चैनल भारत के ब्रिक्स मोमेंट और बदलती वैश्विक शक्ति संरचना पर खास नजर रख रहा है। ब्रिक्स समिट से पहले टाइम्स नाउ ने राजनयिकों, नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों और वैश्विक मामलों से जुड़े प्रमुख चेहरों के साथ बातचीत की है।

इनमें तिब्बत के पूर्व निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे, पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत, फाइनेंशियल टाइम्स के कॉलमनिस्ट मार्टिन वुल्फ, इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन और पूर्व राजनयिक जावेद अशरफ, अर्थशास्त्री एवं लेखक डॉ. जेफ्री सैक्स, अल्फाजियो (AlphaGeo) के संस्थापक और सीईओ पराग खन्ना, डेक्कन सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस की स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन और संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि एवं पूर्व BRICS शेरपा टी.एस. तिरुमूर्ति समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं।

इसके अलावा कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी और चीन में भारत के पूर्व राजदूत गौतम बंबावले के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू भी शनिवार को प्रसारित किए जाएंगे। इन बातचीत के जरिए BRICS के विकास, इसके विस्तार, ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव और भारत के सामने मौजूद अवसरों एवं चुनौतियों को समझने की कोशिश की गई है। टाइम्स के मैनेजिंग एडिटर, जक्का जैकब के साथ बातचीत में फाइनेंशियल टाइम्स के कॉलमनिस्ट मार्टिन वुल्फ ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में ब्रिक्स की प्रासंगिकता पर अपनी राय रखी। उन्होंने ब्रिक्स को भारत और चीन के बीच बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया।

वुल्फ ने कहा कि ब्रिक्स में भारत और चीन एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तनाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। उनके मुताबिक, चीन पहले से ही एक महाशक्ति है, जबकि भारत संभावित रूप से महाशक्ति बनने की स्थिति में है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ब्रिक्स के संदर्भ में बातचीत होना बेहद मूल्यवान है।

वुल्फ ने ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर चेतावनी दी कि अगर संघर्ष साल के अंत तक जारी रहता है तो वैश्विक तेल भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, शुरुआत में खासकर चीन में तेल का पर्याप्त भंडार था, लेकिन अब इन भंडारों का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। साल के अंत तक वैश्विक भंडार काफी कम हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तेल की आपूर्ति सामान्य स्तर से नीचे जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब फिर पहुंच सकती हैं।

अर्थशास्त्री और लेखक डॉ. जेफ्री डी. सैक्स ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत की अमेरिका के साथ ‘रणनीतिक साझेदारी’ की धारणा को सही नजरिए से देखने की जरूरत है। डी. सैक्स के मुताबिक, अमेरिका एक घटती हुई शक्ति है, जबकि दुनिया का वास्तविक आर्थिक उछाल एशिया में हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और चीन के साथ भारत के बेहतर संबंध उसकी आर्थिक वृद्धि में काफी मदद कर सकते हैं।

उन्होंने ऐसी दुनिया की जरूरत पर जोर दिया जहां कोई एक देश दूसरे देशों पर अपना प्रभुत्व न थोपे। सैक्स ने कहा कि ब्रिक्स एक नई बहुध्रुवीय और गैर-हेजेमोनिक विश्व व्यवस्था का लीडरशिप करता है और उन्हें उम्मीद है कि यह ऐसा बहुपक्षीय मंच बनेगा जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत काम करे। यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्धों पर सैक्स ने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके नजरिए से ये युद्ध अमेरिकी वर्चस्व से जुड़े हुए हैं। यूक्रेन युद्ध को लेकर उन्होंने दावा किया कि यह अमेरिका के विस्तार से जुड़ा संघर्ष है और अमेरिका यूक्रेन को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाना चाहता था।

अल्फाजियो (AlphaGeo) के संस्थापक और सीईओ पराग खन्ना ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच BRICS की भूमिका पर बात करते हुए समूह को आर्थिक सहयोग मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का गठन हर समस्या को हल करने या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और जी20 की जगह लेने के लिए नहीं हुआ था। उनके मुताबिक, ब्रिक्स को मुख्य रूप से एक आर्थिक संगठन के रूप में काम करना चाहिए।

पराग खन्ना ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य देशों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूर्व में स्थित देशों को आपसी सहयोग को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम ऊर्जा व्यापार को आसान बनाने और पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाले झटकों से खुद को सुरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का लक्ष्य हर मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय समूह को साझा हितों की पहचान करके आर्थिक सहयोग मजबूत करना चाहिए। पराग ने न्यू डेवलपमेंट बैंक और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा व्यापार को आसान बनाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने के तरीकों पर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि BRICS को हर संघर्ष में मध्यस्थता करने की कोशिश करने के बजाय अपनी आर्थिक पहलों को मजबूत करना चाहिए।

नई दिल्ली में होने वाला ‘BRICS Dialogues’ कार्यक्रम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability), थीम पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें केंद्रीय मंत्री, नीति-निर्माता, राजनयिक, अर्थशास्त्री, कारोबारी नेता और वैश्विक मामलों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

कार्यक्रम में ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ में भारत की बदलती भूमिका पर चर्चा होगी। इसके अलावा पारंपरिक गठबंधनों के सामने आ रही चुनौतियों, नए आर्थिक और भू-राजनीतिक केंद्रों के उभरने और बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत के सामने मौजूद विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। चर्चा का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि भारत किन देशों और शक्तियों के साथ साझेदारी को आगे बढ़ा सकता है और आने वाली वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में उसकी क्या भूमिका हो सकती है।

ब्रिक्स की कवरेज में टाइम्स नाउ अपनी न्यूजरूम टीम और अनुभवी पत्रकारों के जरिए राजनीति, कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय मामलों और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर फोकस कर रहा है। चैनल का कहना है कि उसकी कवरेज में प्रमुख नीति-निर्माताओं और वैश्विक विशेषज्ञों तक पहुंच के साथ-साथ जमीनी स्तर पर होने वाले घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में समझाने पर जोर रहेगा।

चैनल के एंकर और रिपोर्टर ब्रिक्स से जुड़े प्रमुख सवालों को उन लोगों तक पहुंचा रहे हैं जो वैश्विक राजनीति, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर प्रभाव डालते हैं। समिट से पहले की कवरेज से लेकर 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स डायलॉग्स और समिट के दौरान ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग तक टाइम्स नाउ भारत की ब्रिक्स भूमिका को केंद्र में रखकर कवरेज कर रहा है।

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