प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का आह्वान किया। उन्होंने यहां कहा, ’’वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति मार्ग खुले रहें और नाविक सुरक्षित हों। यही वजह है कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का पुरजोर समर्थक है।’’
ब्रिक्स से शीर्ष 10 व्यापार बाधाएं दूर करने की अपील
पीएम मोदी ने यहां ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए इस समूह से अपनी शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने, हर साल 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को अन्य सदस्य बाजारों में विस्तार देने और सालाना 1,000 नई व्यावसायिक साझेदारियां बनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दो लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और 120 यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) के साथ भारत समाधानों का एक वैश्विक केंद्र बन रहा है।
‘वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत विश्वास का स्रोत’
पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत वृद्धि और स्थिरता के लिए विश्वास का स्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया भर में व्यापार बाधाएं बढ़ रही हैं, भारत आर्थिक सेतुओं का निर्माण कर रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दो क्षेत्रों में युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्ष महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से ऊर्जा और अन्य व्यापार को बाधित कर रहे हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान भारतीय जहाजों पर हमले हुए हैं और देश के नाविकों का समुद्री लुटेरों द्वारा अपहरण किया गया है। उन्होंने ब्रिक्स व्यापार परिषद से 10 व्यापार बाधाओं को दूर करने पर एक रिपोर्ट तैयार करने और हर साल 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को विस्तार देने के लिए समर्थन देने का आग्रह किया। मोदी ने परिषद से 1,000 नई साझेदारियां विकसित करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैमानों पर हमें हर साल प्रगति की समीक्षा करनी होगी।
‘ब्रिक्स में करीब आधी दुनिया की आबादी, वैश्विक GDP का 40%’
मोदी ने विस्तारित ब्रिक्स समूह के पैमाने को रेखांकित करते हुए कहा कि सदस्य देश और साझेदार अब दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक चौथाई से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की संयुक्त जीडीपी लगभग साढ़े चार गुना बढ़ी है, जबकि वैश्विक जीडीपी में लगभग ढाई गुना की वृद्धि हुई है।
मोदी ने भारत में बुनियादी ढांचे और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के विकास पर खासतौर से जोर दिया। उन्होंने सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के तेजी से विस्तार के साथ-साथ जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और जैव प्रौद्योगिकी में नई क्षमताओं का उल्लेख किया।
‘मेक इन इंडिया, भारत के साथ नवाचार करें और दुनिया के लिए विस्तार करें’
मोदी ने भारत को वैश्विक बाजारों के लिए विनिर्माण केंद्र के साथ-साथ प्रौद्योगिकी और नवाचार के स्रोत के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, ’’मेक इन इंडिया, भारत के साथ नवाचार करें और दुनिया के लिए विस्तार करें।’’
प्रधानमंत्री ने भारत को विनिर्माण आधार और वैश्विक बाजारों के लिए प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने ब्रिक्स सहयोग के लिए भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) को एक मंच के रूप में उपयोग करने की बात भी कही। मोदी ने यूपीआई के व्यापक स्तर पर प्रसार का जिक्र किया और कहा कि ब्रिक्स नवप्रवर्तक अपने स्वयं के बाजारों के अनुकूल डिजिटल समाधान विकसित करने के लिए भारत के अनुभव का लाभ उठा सकते हैं।
स्टार्टअप से लेकर स्मार्ट ग्रिड तक, BRICS में सहयोग का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप और 120 से अधिक यूनिकॉर्न का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिक्स को ऐसे नवाचारों को वैश्विक बाजारों में ले जाने में मदद करनी चाहिए। भारत की अध्यक्षता के तहत की गई पहलों में ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड के साथ ही कृषि, स्वास्थ्य सेवा, कौशल और स्मार्ट ग्रिड में नए सहयोग नेटवर्क शामिल हैं।
‘व्यापार बाधाएं घटें, कंपनियों के लिए अवसर बढ़ें’
व्यापार संपर्क एक अन्य केंद्रीय विषय था। मोदी ने कहा कि भारत ने 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं और उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिक्स को भी इसी तरह बाधाओं को कम करने और कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों और खुले आपूर्ति मार्गों के महत्व पर भी जोर दिया तथा नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सामने रखे तीन बड़े लक्ष्य
आगे की रूपरेखा रखते हुए, मोदी ने ब्रिक्स व्यापार परिषद को केवल संवाद तक सीमित रहने के बजाय मापने योग्य लक्ष्य स्थापित करने की चुनौती दी। इनमें समूह की शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं की पहचान करना, हर साल 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को अन्य सदस्य बाजारों में विस्तार करने के लिए सहायता देना और सालाना 1,000 नई व्यावसायिक साझेदारियां बनाना शामिल है।
उन्होंने कहा, ’’हमें हर साल इन तीन पैमानों पर अपनी प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए।’’
‘भारत ने अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाया’
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने ऊर्जा से लेकर प्रौद्योगिकी तक के क्षेत्रों में फैली अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और विश्वसनीय बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि इसी मजबूती का परिणाम है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत आज वृद्धि और स्थिरता का आश्वासन देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया भर में व्यापार बाधाएं बढ़ रही हैं, भारत आर्थिक सेतुओं का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 से भारत ने लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने कहा, ’’ब्रिक्स के भीतर भी हमारा दृष्टिकोण यही है- बाधाओं को कम करना और कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार करना।’’
इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक सेक्टर पर भारत का फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा, ’’इसके साथ ही, हम जहाज विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज और जैव प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नई क्षमताओं का निर्माण कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में भारत वैश्विक व्यवसायों के लिए नए अवसरों के केंद्र के रूप में उभर रहा है।’’
‘AI से शिक्षा-स्वास्थ्य में बदलाव, डिफेंस-स्पेस में नई राह’
उन्होंने कहा, ’’हमारे स्टार्टअप एआई के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में बदलाव ला रहे हैं, हरित हाइड्रोजन और बैटरियों पर काम कर रहे हैं, और रक्षा तथा अंतरिक्ष क्षेत्रों में नई राहें खोल रहे हैं। अब, हमें ब्रिक्स के माध्यम से भी इन विश्वस्तरीय नवाचारों को वैश्विक बाजारों में ले जाना होगा।’’ एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) पर उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया के 50 प्रतिशत वास्तविक समय पर भुगतान इसी तकनीक का उपयोग करके होते हैं।
