इलेक्शन

राजस्थान चुनाव में BJP खेमे से वसुंधरा राजे ने बटोरी सबसे अधिक सुर्खियां, समझें 3 सियासी फैक्टर

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 28, 2023, 11:15 PM IST

Rajasthan Chunav: वसुंधरा राजे के नाम को लेकर ये चर्चा हो रही थी कि भाजपा ने उन्हें दरकिनार कर दिया। शुरुआती दौर के चुनावी अभियान में उनकी अनुपस्थिति चर्चा को और मजबूत कर रही थी, हालांकि अचानक वसुंधरा के नाम की गूंज तेज हुई और वो फिर सुर्खियों में आ गईं। आपको इनसाइड स्टोरी समझाते हैं।

Image

राजस्थान चुनाव में भाजपा के लिए क्या रही वसुंधरा की भूमिका?

Photo : Times Now Digital

Vasundhara Raje News: राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा, इसका फैसला ईवीएम मशीन में कैद हो चुका है। आगामी 3 दिसंबर को चुनावी नतीजों में सारी तस्वीरें साफ हो जाएंगी। अगर भाजपा खेमे का जिक्र किया जाए तो माना जा रहा था कि वसुंधरा राजे कोई खास तवज्जो नहीं मिल रहा है, लेकिन अचानक राजे की हवा बदली और वो मजबूत होती चली गईं। आपको सिलसिलेवार तरीके से उन पांच फैक्टर को समझाते हैं, जिसके जरिए चुनावी रणभूमि पर अचानक हवा वसुंधरा सुर्खियों में आ गईं।

विधानसभा चुनाव में अचानक उभरीं वसुंधरा राजे!

भाजपा के कई केंद्रीय नेता और स्थानीय नेताओं ने परिवर्तन यात्रा में हुंकार भरी तो उस वक्त वसुंधरा राजे नजर नहीं आ रही थीं। सवाल उठने लगे कि क्या राजे को साइडलाइन कर दिया गया है। हालांकि वसुंधरा ने चुनावी अभियान में अपनी अलग ही छाप छोड़नी शुरू कर दी। देखते ही देखते हवा बदलने लगी और चुनाव के बाद वसुंधरा की निस्वार्थता और एकता की चर्चा होने लगी। उन्होंने अपनी ताकत झोंकते हुए ये साबित करने की कोशिश की कि सूबे के भाजपा नेताओं में उनके मुकाबले का फिलहाल शायद कोई और नहीं है। मगर भाजपा अलग तरह की राजनीति के लिए जानी जाती है, जहां कुछ भी हो सकता है।

अंदरूनी मतभेदों की चर्चाओं पर लगाया पूर्णविराम!

राजस्थान चुनाव के बीच भाजपा में अंदरूनी कलह की काफी चर्चा होती रही। दावा किया जाता रहा कि वसुंधरा खेमे को दरकिनार करने की कोशिश है और टिकट वितरण को लेकर भी काफी मतभेद है। कहा ये भी गया कि चुनावी जंग के बीच भाजपा में कई गुट बन गए हैं। वसुंधरा राजे को लेकर भी कहा गया कि उनके समर्थकों में भाजपा के प्रति भारी नाराजगी है। हालांकि वोटिंग से ठीक पहले तक वसुंधरा ने कई जिलों में चुनाव प्रचार किया, रैलियों में हिस्सा लिया और भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में लोगों के पास पहुंचकर वोट मांगा। जनसभाओं में वसुंधरा ने अपनी उपलब्धियों को गिनाने के बजाय पार्टी और उम्मीदवारों के कामों का जिक्र किया और ये संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा में किसी तरह का अंदरूनी मतभेद नहीं है।

रैलियों में अपने भाषणों से मजबूत हुईं वसुंधरा राजे?

चुनाव प्रचार के दौरान वसुंधरा राजे के भाषणों में एक खास बात देखने को मिली कि उन्होंने 'वास्तविक मुद्दों' पर ज्यादा से ज्यादा जोर दिया और हर राजस्थानी के सपनों को साकार करने का जिक्र किया। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में एक वक्त ऐसा भी था कि वसुंधरा को दौड़ से बाहर माना जा रहा था, लेकिन जिस तरह उन्होंने अपनी हवा के रुख को अपनी ओर किया उससे ये समझा जा सकता है कि यदि 3 दिसंबर को नतीजे भाजपा के पक्ष में रहे तो वसुंधरा राजे एक बार फिर कुर्सी की रेस में सबसे मजबूत नेता बनकर सामने आ सकती हैं।

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article