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Rajasthan Election: भाजपा का अभेद किला है वसुंधरा राजे का गढ़ झालरापाटन, टूट जाते हैं सारे जतीय समीकरण

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 29, 2023, 02:56 PM IST

Rajashthan vasundhara Raje Jhalrapatan Assembly Election 2023 Profile, Net Worth, Party Name: झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र में कई जातियां हैं, लेकिन यहां वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे है। चुनाव में उनके उतरते ही सभी जातीय समीकरण टूट जाते हैं और उनके पक्ष में एकतरफा वोटिंग होती है। बीते 30 साल से यह सीट भाजपा के कब्जे में रही है।

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वसुंधरा राजे

Photo : BCCL

Rajashthan vasundhara Raje Jhalrapatan Assembly Election 2023 Profile: राजस्थान की झालरापाटन विधानसभा सीट भाजपा का अभेद किला मानी जाती है। 2003 से ही यह सीट भाजपा के कब्जे में है। वजह हैं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर वसुंधरा राजे को इस सीट से मैदान में उतारा है। वह लगातार चार बार से इस सीट पर जीत हासिल करती हुई आ रही हैं, इस बार झालरापाटन से राजे पांचवी बार दम दिखाएंगी।

कैसा रहा था 2018 का चुनाव

2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो झालरापाटन से भाजपा उम्मदीवार वसुंधरा राजे ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने 1,16,484 वोट हासिल किए थे। वहीं उनके प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 81,504 वोट मिले थे। इस तरह राजे ने 34,980 वोटों से शानदार जीत दर्ज की थी।

2003 से बढ़ता गया राजे की जीत का अंतर

2003 में भाजपा ने वसुंधरा राजे को झालरापाटन से टिकट दिया था। तब उन्हें 72760 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस की रामा पायलट को 72701 वोटों से हराया था। इसके बाद राजे की जीत का अंदर बढ़ता ही चला गया। उन्होंने 2008 के चुनावों में कांग्रेस के मोहन लाल को 32581 वोटों से हराया था। 2013 में राजे ने इस सीट पर सबसे बड़ी जीत हासिल की थी और उनहें 114384 वोट मिले थे। तब उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी चंद्रावत को 60 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी।

राजे के सामने टूट जाते हैं जातीय समीकरण

झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र में कई जातियां हैं, लेकिन यहां वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे है। चुनाव में उनके उतरते ही सभी जातीय समीकरण टूट जाते हैं और उनके पक्ष में एकतरफा वोटिंग होती है। यही कारण है कि राजे के खिलाफ कांग्रेस के मजबूत से मजबूत प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है।

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