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Maharashtra: विधानसभा चुनाव में वंशवाद की राजनीति पर जोर, जानें किस सीट से किसके रिश्तेदारों को मिला टिकट

Nepotism in Politics: महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला करने के लिए 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव की वोटिंग होगी। इस बार के चुनाव में राजनीतिक दलों ने नेताओं के रिश्तेदारों को मौका दिया है। ऐसे में वंशवाद की सियासत का बड़ा रूप देखने को मिल रहा है।

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महाराष्ट्र में किसका बजेगा डंका?

Maharashtra Assembly Election: राजनीतिक दल भले ही अक्सर अपने प्रतिद्वंद्वियों पर वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते रहते हों लेकिन चुनाव के दौरान वे सभी अपने स्थापित नेताओं के रिश्तेदारों को मैदान में उतारने से नहीं कतराते। अगले महीने होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए घोषित उम्मीदवारों की सूची से भी यही साबित होता है।

महाराष्ट्र चुनाव ने नेताओं के रिश्तेदारों का बोलबाला

राज्य के अधिकतर प्रमुख राजनीतिक दलों ने 20 नवंबर को 288 विधानसभा सीट पर होने वाले चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों की कम से कम पहली सूची घोषित कर दी है। सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा कर दी है लेकिन विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) की ओर से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने ही अब तक पहली सूची जारी की है।

संबंधियों को बड़ी संख्या में बनाया गया उम्मीदवार

उनकी सूचियों से पता चलता है कि वर्तमान मंत्रियों, विधायकों या सांसदों के निकट संबंधियों को बड़ी संख्या में उम्मीदवार बनाया गया है।

इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अशोक चव्हाण की बेटी श्रीजया चव्हाण भी शामिल हैं जो नांदेड़ जिले में अपने परिवार की परंपरागत सीट भोकर से चुनाव लड़ेंगी।

किसी के भाई, किसी की पत्नी, तो किसी के बेटे को टिकट

भाजपा की मुंबई इकाई के प्रमुख आशीष शेलार के भाई विनोद शेलार को पार्टी ने मलाड पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है, जबकि आशीष को मुंबई की बांद्रा पश्चिम सीट से फिर से टिकट दिया गया है। भाजपा ने श्रीगोंडा विधानसभा क्षेत्र (अहिल्यानगर जिले में) से अपने मौजूदा विधायक बबनराव पाचपुते का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उनकी जगह उनकी पत्नी प्रतिभा पाचपुते को टिकट दिया है।

भाजपा ने ठाणे जिले के कल्याण पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से अपने विधायक गणपत गायकवाड़ की जगह उनकी पत्नी सुलभा को इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामित किया है। गायकवाड़ कुछ महीने पहले पुलिस थाने में शिवसेना कार्यकर्ता पर गोली चलाने के आरोप में फिलहाल जेल में हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सदस्य नारायण राणे के बेटे नितेश वर्तमान में कंकावली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके बड़े भाई एवं पूर्व लोकसभा सदस्य नीलेश अब सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो चुके हैं और कुदाल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, जो उनके गृह जिले सिंधुदुर्ग के अंतर्गत आता है।

शिंदे की शिवसेना ने राजापुर से किसे दिया टिकट?

पुणे जिले के चिंचवड निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने दिवंगत पार्टी नेता लक्ष्मण जगताप की पत्नी एवं मौजूदा विधायक अश्विनी जगताप को टिकट न देकर लक्ष्मण के भाई शंकर जगताप को टिकट दिया है। यह उनका पहला चुनाव है। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने रत्नागिरी जिले की राजापुर सीट से राज्य मंत्री उदय सामंत के भाई किरण सामंत को उम्मीदवार बनाया है।

इस वर्ष के आम चुनावों के बाद लोकसभा के सदस्य बने शिवसेना नेताओं संदीपन भुमरे और रवींद्र वायकर के परिवार के सदस्यों को भी पार्टी ने उन संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से मौका दिया है, जिनका ये दोनों पूर्व विधायक प्रतिनिधित्व करते थे। भुमरे के बेटे विलास छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण से चुनाव लड़ेंगे, जबकि वायकर की पत्नी मनीषा, जोगेश्वरी पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव में किस्मत आजमाएंगी।

संजय राउत के भाई को फिर से मिला टिकट

सत्तारूढ़ राकांपा ने इस महीने की शुरुआत में पंकज भुजबल को पार्टी एमएलसी (विधान परिषद के सदस्य) के रूप में नामित किया था। वह पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के बेटे हैं, जो नासिक जिले के येवला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने मुंबई की वर्ली सीट से मौजूदा विधायक आदित्य ठाकरे को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि उनके उनके मौसेरे भाई वरुण सरदेसाई बांद्रा पूर्व से अपना पहला चुनाव लड़ेंगे। शिवसेना (यूबीटी) ने मुंबई की विकरोली सीट से पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय राउत के भाई और मौजूदा विधायक सुनील राउत को टिकट देने का फैसला किया है।

हालांकि राकांपा (एसपी) ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा नहीं की है लेकिन पूर्व गृह मंत्री दिवंगत आर आर पाटिल के बेटे रोहित पाटिल ने बृहस्पतिवार को सांगली जिले के तासगांव-कवठे महांकाल निर्वाचन क्षेत्र से राकांपा (एसपी) उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।

माहिम विधानसभा सीट से राज ठाकरे के बेटे को टिकट

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शरद पवार के पोते और अहिल्यानगर में कर्जत जामखेड विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक रोहित पवार को इस निर्वाचन क्षेत्र से फिर से टिकट दिए जाने की संभावना है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने कभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उन्होंने अपने बेटे अमित को मुंबई की माहिम विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। यह उनका पहला चुनाव होगा।

पार्टियों द्वारा नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर राजनीतिक पर्यवेक्षक अभय देशपांडे ने कहा, 'स्थापित नेता अपने निर्वाचन क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं और इसके लिए वे मतदाताओं के साथ अपना नेटवर्क एवं संपर्क विकसित करते हैं। उनका पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र उस विशेष परिवार का गढ़ बन जाता है और इसलिए इसे राजनीतिक विरासत के रूप में उनके बेटे या बेटी को सौंप दिया जाता है।'

उन्होंने कहा, 'लेकिन कुछ मामलों में पार्टी किसी स्थापित नेता के निधन के बाद उसके परिवार से किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाती है।'

उन्होंने कहा, 'इसका एक कारण मतदाताओं की परिवार के प्रति सहानुभूति से राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है। साथ ही, इसे उस विशेष परिवार के प्रति राजनीतिक पार्टी के आभार का प्रतीक भी माना जाता है जिसने लंबे समय तक उसकी सेवा की हो।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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