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MP CM Announcement: शिवराज ही करेंगे राज या किसी और के सिर सजेगा 'ताज'? थोड़ी देर में CM के नाम पर फैसला

MP CM Announcement, (मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री घोषणा), BJP Madhya Pradesh Chief Minister Ghoshna Updates: मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा? भाजपा एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान को एमपी की कमान सौंपेगी या फिर किसी और नेता की ताजपोशी करेगी, ये देखना बेहद अहम है। थोड़ी देर में होने वाली विधायक दल की बैठक में इसका फैसला हो जाएगा।

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किसे सौंपी जाएगी मध्य प्रदेश की कमान?

Photo : Times Now Digital

MP CM Announcement, (मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री घोषणा): भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश की कमान किसके हाथों में सौंपेगी? इस सवाल का जवाब अब से थोड़ी देर में मिल जाएगा। हर कोई ये जानना चाहता है कि क्या एमपी में शिवराज सिंह चौहान की बतौर सीएम एक बार और ताजपोशी होगी या इस बार सीएम की कुर्सी किसी और के खाते में जाएगा। थोड़ी देर में नाम को लेकर सस्पेंस खत्म हो जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित भाजपा के तीन केंद्रीय पर्यवेक्षक नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों की बैठक में हिस्सा लेने और राज्य के अगले मुख्यमंत्री पर फैसला करने के लिए सोमवार को भोपाल पहुंच चुके हैं। अब विधायक दल की बैठक में तस्वीरें साफ हो जाएंगी।

कौन बनेगा मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री?

मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा? भाजपा एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान को एमपी की कमान सौंपेगी या फिर किसी और नेता की ताजपोशी करेगी, ये देखना बेहद अहम है। भाजपा ने मध्य प्रदेश में अपने विधायक दल का नेता चुनने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, अपने ओबीसी मोर्चा के प्रमुख के लक्ष्मण और सचिव आशा लाकड़ा को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। तीनों पर्यवेक्षक एक विशेष विमान से करीब साढ़े 11 बजे भोपाल पहुंचे। जहां प्रदेश पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे से तीनों पर्यवेक्षक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने के लिए मुख्यमंत्री आवास गए। इसके बाद सभी पार्टी कार्यालय पहुंचे। विधायकों को दिए गए कार्यक्रम के मुताबिक, बैठक सोमवार शाम चार बजे शुरू होने की उम्मीद है और शाम को मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

क्या शिवराज को फिर मिलेगी एमपी की कमान?

मध्य प्रदेश में भाजपा ने इस बार 17 नवंबर का विधानसभा चुनाव मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश किए बिना लड़ा। ऐसा 20 साल बाद हुआ कि पार्टी ने मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया। ऐसे में शिवराज के नाम को लेकर असमंजस बनी हुई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यदि भाजपा चौहान की जगह किसी और को लेती है तो वह किसी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मुख्यमंत्री पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। चौहान मध्य प्रदेश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री भी हैं।

शिवराज नहीं तो कौन बन सकता है एमपी का सीएम?

अगर शिवराज सिंह चौहान को सीएम नहीं बनाया जाता है तो ऐसी स्थिति में प्रह्लाद पटेल मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे हो सकते हैं। वह नरसिंहपुर विधानसभा सीट से चुने गए हैं और उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वह लोधी समुदाय से आते हैं और लोधी अन्य ओबीसी का हिस्सा है। इस तथ्य को देखते हुए कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी 48 प्रतिशत से अधिक है। भाजपा नेतृत्व 2003 के बाद से राज्य में शीर्ष पद के लिए ओबीसी नेताओं के साथ गया है। इससे पहले उसने उमा भारती, जो एक लोधी हैं, को आगे बढ़ाया था। एक साल बाद, पार्टी ने एक और ओबीसी, बाबूलाल गौर और फिर 2004 में चौहान पर अपना दांव लगाया। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, विजयवर्गीय और भाजपा के प्रदेश प्रमुख वी डी शर्मा अन्य संभावित उम्मीदवार हैं। नरेंद्र तोमर का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में है। वह दिमनी से चुने गए हैं और केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

भाजपा ने एमपी विधानसभा चुनाव में जीतीं 163 सीटें

भाजपा ने 17 नवंबर के चुनाव के बाद 230 सदस्यीय विधानसभा में 163 सीटें जीतीं और मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस 66 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। राज्य भाजपा कार्यालय को फूलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाले पोस्टर तथा 'एमपी के मन में मोदी, देश के मन में मोदी' के नारे लिखे बैनर से सजाया गया है। मध्य प्रदेश में भाजपा दो दशक में पांचवीं बार सरकार बनाने जा रही है। इससे पहले वह 2003, 2008, 2013 और 2020 में राज्य में सत्ता में आई थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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