Mamata Banerjee Lost Bhabanipur Seat: भवानीपुर की जनता (Bhabanipur Assembly Result) ने भी ममता बनर्जी को ठुकरा दिया है वो इस सीट पर सुवेंदु के हाथों से हार गईंं। यह सीट बनर्जी का सबसे सुरक्षित राजनीतिक गढ़ मानी जाती है, यहां पर दो प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। इस सीट से तीन बार की विधायक ममता बनर्जी, 2021 में नंदीग्राम में उन्हें हराने वाले सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ अपनी गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही थीं, पर उन्हें हार हासिल हुई। इस सीट पर अधिकारी ने ममता दीदी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी है।
यहां से तीन बार की विधायक ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला विपक्ष के नेता और भाजपा के दिग्गज नेता अधिकारी से था, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराकर सनसनी फैला दी थी।
ममता को हराने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा- 'सभी को बधाई। यह बंगाल की जनता की जीत है। यह मोदी जी की जीत है'
ममता 2021 में नंदीग्राम से लड़ीं और सुवेन्दु अधिकारी से हार गईं थीं
टीएमसी के लिए भबानीपुर को बरकरार रखना मुख्यमंत्री के अपने ही गढ़ में उनके अधिकार की रक्षा करने जैसा था पर ऐसा ना हो सका। बता दें कि ममता 2011 के उपचुनाव में जीती थीं, 2016 में जीतीं लेकिन 2021 में नंदीग्राम से लड़ीं और सुवेन्दु अधिकारी से हार गईं तो दोबारा भवानीपुर से बाई इलेक्शन लड़ीं और 58 हजार वोटों से जीती लेकिन इस बार शुभेंदु अधिकारी ममता को चुनौती देने भवानीपुर पहुंच गए।
भवानीपुर सीएम ममता का इलाका, यहीं उनका घर
आपको बता दें कि भवानीपुर में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की टक्कर थी। लेकिन ये सीएम ममता का इलाका है; इसी इलाके में उनका घर है। पिछले तीन चुनाव इस सीट से जीत चुकी हैं। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 90 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने अपने वोट डाले थे। यह एक रिकॉर्ड है। 2021 में यहां मतदान प्रतिशत 82 फीसदी था।
'घर की बेटी ममता...' TMC का नारा था
टीएमसी ने "घोरर मेये" (घर की बेटी) के भावनात्मक नारे को पुनर्जीवित किया था, और ममता बनर्जी को न सिर्फ मुख्यमंत्री के रूप में, बल्कि पड़ोस की अपनी दीदी के रूप में पेश किया, जिनका कालीघाट निवास इसी निर्वाचन क्षेत्र में स्थित है। मतदान सूचियों के एसआईआर के बाद मुकाबला और भी तीखा हो गया था।
