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Maharashtra Election: सीट शेयरिंग पर MVA में कब लगेगी फाइनल मुहर? जान लें तारीख और वक्त

Maharashtra Chunav: महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी? इस सवाल का जवाब 23 नवंबर को मिल जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने बताया है कि एमवीए में सीट-बंटवारे को लेकर अंतिम समझौते की घोषणा शुक्रवार सुबह तक हो सकती है। कांग्रेस, राकांपा (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) कुल 288 में से 85-85 सीट पर चुनाव लड़ेंगे।

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महाराष्ट्र में कांटे की टक्कर

Photo : PTI

MVA seat sharing: कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख नाना पटोले ने बृहस्पतिवार को कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन के सीट-बंटवारे को लेकर अंतिम समझौते की घोषणा शुक्रवार सुबह की जायेगी। पटोले ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पार्टी ने अपने उन कुछ उम्मीदवारों से नामांकन पत्र दाखिल करने को कहा है, जिन्हें 20 नवंबर को होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिए टिकट मिलना तय माना जा रहा है।

कब तक फाइनल होगा सीट शेयरिंग का फॉर्मूला?

उन्होंने कहा, 'सीट-बंटवारे की घोषणा आज शाम या कल सुबह तक कर दी जाएगी।' कई दिन के गतिरोध के बाद विपक्षी गठबंधन ने बुधवार को घोषणा की थी कि कांग्रेस, राकांपा (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) कुल 288 में से 85-85 सीट पर चुनाव लड़ेंगे तथा शेष सीट के लिए बातचीत जारी है।

इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया कि एमवीए के सहयोगी दल आपस में कुछ सीट की अदला-बदली कर सकते हैं।

100 सीट पर चुनाव लड़ सकती है शिवसेना यूटीबी

राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी 100 सीट पर चुनाव लड़ सकती है। इस बीच, कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिये की गयी नारेबाजी के बारे में पूछे जाने पर पटोले ने कहा कि उनका पहला काम एमवीए को सत्ता में लाना है। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला आलाकमान द्वारा किया जायेगा।'

पुणे में राज्य सरकार द्वारा आरक्षित 35 एकड़ जमीन को एक बिल्डर को बेचे जाने संबंधी विवाद के बारे में पूछे जाने पर पटोले ने कहा, 'महाराष्ट्र को बचाये जाने की जरूरत है, इसलिए इसको बचाना हमारी जिम्मेदारी है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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