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Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस की मजबूरी या 'INDIA' के लिए बसपा जरूरी? मायावती के लिए खुले हैं दरवाजे

Lok Sabha Chunav: विपक्षी पार्टियों के गठबंधन 'INDIA' में शामिल होने के लिए कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी को न्योता दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि बसपा के लिए विपक्षी गठबंधन के दरवाजे 'खुले' हैं। हालांकि मायावती पहले ही लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं।

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क्या विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में शामिल होंगी मायावती?

Photo : Times Now Digital

Congress Invites Mayawati: लोकसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो चुकी है। विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) को लगातार एक के बाद एक झटका लग रहा है। पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस, फिर नीतीश कुमार की जदयू और अब जयंत चौधरी की आरएलडी... इस बीच कांग्रेस मायावती की पार्टी बसपा को अपने साथ लाने की कोशिश में जुट गई है।

मायावती की अहमियत समझती हैं विपक्षी पार्टियां

कांग्रेस ने मायावती को विपक्षी दलों के साथ आने के लिए न्योता दिया है, क्योंकि सभी विपक्षी पार्टियां उनकी अहमियत समझती हैं। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं, ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव में जब सपा-बसपा साथ मिलकर चुनाव लड़ी थीं, उस वक्त मायावती का अच्छा खासा प्रदर्शन देखने को मिला था। मगर अब सपा-बसपा के बीच दरार इस कदर बढ़ चुकी है कि अखिलेश और मायावती एक-दूसरे को पानी पी-पीकर कोसते रहते हैं।

2019 के आंकड़ों से समझिए बसपा की कितनी अहम

पिछले लोकसभा चुनाव 2019 के आंकड़ों पर नजर डालें तो जब कांग्रेस ने सपा-बसपा से अलग मिलकर चुनाव लड़ा था तो यूपी की 80 सीटों में से भाजपा को 62 जीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि बसपा यहां दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। मायावती के खाते में 10 सीटें गई थीं, जबकि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को महज 5 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं अपना दल को 2 सीट और कांग्रेस को महज एक सीट नसीब हुई थी।

मायावती को साथ लाने की कोशिश में कांग्रेस

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने रविवार को कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के दरवाजे खुले हैं और अब मायावती को तय करना है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहती हैं या अकेले अपने दम पर। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि विपक्षी गठबंधन 'INDIA' खुले दिल से चाहता है कि बसपा भी इस गठबंधन का हिस्सा बने, लेकिन मायावती पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वह लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेंगी।

'पूरे दिल से' सपा के समर्थन में है कांग्रेस

राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान पांडे ने कहा कि कांग्रेस 'पूरे दिल से' समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकसभा चुनावों के लिए राज्य में सीट-बंटवारे पर जल्द ही गतिरोध को दूर कर समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-सपा गठबंधन उत्तर प्रदेश में उन छोटे दलों के साथ भी बातचीत कर रहा है, जो लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए विपक्षी गठबंधन 'INDIA' में शामिल होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महीने के अंत तक सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा।

महीने के अंत तक सुलझा लिया जाएगा मुद्दा

अविनाश पांडे ने कहा, 'उनमें (छोटे दलों) में से कुछ बिना शर्त शामिल हो रहे हैं और कुछ दलों को कुछ उम्मीदें हैं, इसलिए (उत्तर प्रदेश में सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने में) थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन इस महीने के अंत तक सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा।' अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत पर पांडे ने कहा कि बातचीत काफी हद तक सकारात्मक रूप से चल रही है।

उन्होंने कहा, 'जब आप किसी गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो आपको बातचीत करनी होती है और तर्कसंगत तरीके से तय करना होता है कि सबसे अच्छा उम्मीदवार कौन होगा, जो भाजपा को उचित टक्कर दे पाएगा।' उन्होंने कहा कि इसलिए हम इसका विश्लेषण कर रहे हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि जल्द ही सीट बंटवारे के ‘फॉर्मूले’ को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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