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जगदीश शेट्टार कांग्रेस में शामिल, लेकिन भाजपा के पास है ब्रह्मास्त्र; बैठे-बैठे बदल सकता है कर्नाटक की सियासत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 18, 2023, 08:28 AM IST

Karnataka assembly elections 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के दिग्गज नेता जगदीश शिवप्पा शेट्टार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से पार्टी को नफा-नुकसान की बात हो रही है। हालांकि, भाजपाई खेमें में खलबली कम है। आइए जानते हैं भाजपा के पास ऐसा कौन सा ब्रह्मास्त्र है, जो इस नुकसान की भरपाई कर सकता है? राज्य की सियासत के ताजा समीकरण क्या हैं ? और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का इतना महत्व क्यों है?

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पीएम मोदी व अमित शाह

Photo : BCCL

Karnataka Assembly Elections 2023: चुनाव से पहले बड़े से लेकर छोटे नेताओं की दलबदली आम बात है। ऐसा हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला और अब कर्नाटक में भी यही हो रहा है। पहले कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो अब उठापटक भाजपा में मची हुई है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जगदीश शिवप्पा शेट्टार की हो रही है। सोमवार को वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।

लगातार छह बार से विधायक इस दिग्गज नेता के भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी को नफा-नुकसान की खूब बात हो रही है। कहा जा रहा है कि शेट्टार कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। यह बात काफी हद तक सही भी हो सकती है क्योंकि शेट्टार कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के दूसरे सबसे बड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं। यह वही समुदाय है जो कभी भी राज्य की सियासत का रुख मोड़ सकता है। हालांकि, भाजपाई खेमे की ओर देखें तो शेट्टार के पार्टी छोड़ने से वहां खलबली कम है। आइए जानते हैं भाजपा के पास ऐसा कौन सा ब्रह्मास्त्र है, जो इस नुकसान की भरपाई कर सकता है? राज्य की सियासत के ताजा समीकरण क्या हैं ? और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का इतना महत्व क्यों है?

पहले जानिए शेट्टार ने क्यों छोड़ी पार्टी

शेट्टार ने भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, कई लोग हैरान हैं नेता प्रतिपक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहा नेता कांग्रेस में शामिल हो गया। उन्होंने कहा, मैंने हमेशा पार्टी के विकास के लिए काम किया, मुझे लगता था कि इस बार भी मुझे टिकट दिया जाएगा। हालांकि, मुझे टिकट नहीं मिला और न ही किसी ने मुझसे इस बारे में बात की। न मुझसे यह कहा गया कि उन्हें टिकट न मिलने के बाद पार्टी में कौन सा पद दिया जाएगा।

अब जानिए शेट्टार की कर्नाटक में हैसियत

भाजपा के दिग्गज नेता रहे जगदीश शेट्टार लगातार छह बार से चुनाव जीत रहे हैं। वह 2012 से 2013 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। उनका प्रभाव कित्तूर कर्नाटक की करीब 25 से अधिक सीटों पर माना जाता है। वहीं कर्नाटक चुनावों में जीत-हार तय करने वाले लिंगायत समुदाय के यह दूसरे सबसे बड़े नेता भी हैं। राज्य में भाजपा को खड़ा करने वाले नेताओं में भी शेट्टार का नाम शामिल है।

अब बात भाजपा के ब्रह्मास्त्र की

भारतीय जनता पार्टी राज्य के चुनाव में लिंगायत समुदाय के महत्व को जानती है। ऐसे में शेट्टार के पार्टी छोड़कर जाने से होने वाले नुकसान की भरपाई वह अपने दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा से कर सकती है। दरअसल, बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। कहा जाता है कि पूरा लिंगायत समुदाय उनके ही इशारे पर वोट करता आया है। ऐसे में भाजपा इस वोटबैंक को खींचने के लिए येदियुरप्पा का इस्तेमाल कर सकती है। वह भले ही सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके हों, लेकिन लिंगायत समुदाय में उनकी पकड़ आज भी काफी मजबूत है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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