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पवन सिंह को BJP ने किया निष्कासित, PM Modi की काराकाट रैली से पहले बड़ा एक्शन

Pawan Singh Expelled From BJP: भारतीय जनता पार्टी ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह पर बड़ी कार्रवाई की है। पवन सिंह को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप है। बता दें, पवन सिंह बिहार की काराकाट सीट से NDA प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

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पवन सिंह को बीजेपी ने पार्टी से निकाला

Photo : Twitter

Pawan Singh Expelled From BJP: भारतीय जनता पार्टी ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह पर बड़ी कार्रवाई की है। पवन सिंह को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप है। बता दें, पवन सिंह बिहार की काराकाट सीट से NDA प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पवन सिंह भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे। बीजेपी ने पहले उन्हें पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने टिकट वापस कर दिया और काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।

बीजेपी की ओर से पवन सिंह को पार्टी से बाहर करते हुए कहा गया है कि लोकसभा चुनाव में वह एनडीए के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। उनका यह कार्य पार्टी विरोधी है, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है और यह कार्य पार्टी के अनुशासन के विरुद्ध है। बता दें, बीजेपी की ओर से यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काराकाट रैली से पहले उठाया गया है। जानकारी के मुताबिक, बिहार के बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

उपेंद्र कुशवाहा के लिए खड़ी की मुश्किलें

बता दें, बिहार की काराकाट सीट से एनडी प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन पवन सिंह के निर्दलीय मैदान में उतरने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पवन सिंह की रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने न सिर्फ उपेंद्र कुशवाहा की टेंशन बढ़ा दी है, बल्कि बीजेपी के थिंक टैंक का काम भी मुश्किल कर दिया है।

खुद के साथ मां का भी कराया था नामांकन

पवन सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ निर्दलीय पर्चा भरा था, लेकिन नामांकन के आखिरी दिन गुपचुप तरीके से उन्होंने अपनी मां का भी नामांकन दाखिल करवाकर सभी को चौंका दिया था। इसको लेकर कई सवाल भी खड़े हुए थे। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि खुद का नामांकन खारिज होने के डर से पवन सिंह ने विकल्प के तौर पर अपनी मां का पर्चा भरवाया था। अब उनकी मां ने नामांकन वापस ले लिया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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