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Haryana: उस जजपा विधायक ने थामा भाजपा का दामन, जिसने BJP प्रदेश अध्यक्ष को हराया था चुनाव

चुनावी मौसम में पार्टी बदलने का चलन बेहद आम है। हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की पार्टी लगातार कमजोर हो रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में BJP के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष को जिसने विधानसभा चुनाव हराया था, अब उसी जजपा विधायक ने भाजपा का दामन थाम लिया है। कौन है वो नेता, आपको बताते हैं।

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जब सुभाष बराला को देवेंद्र बबली ने हराया था विधानसभा चुनाव।

Haryana Assembly Elections 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले जननायक जनता पार्टी (जजपा) के विधायक व पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली, पार्टी के झज्जर के जिला प्रधान संजय कबलाना तथा पुलिस सेवा से हाल ही इस्तीफा देने वाले सुनील सांगवान ने सोमवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।

भाजपा में शामिल हुए जजपा विधायक देवेंद्र बबली

पार्टी महासचिव अरुण सिंह, हरियाणा के सह-प्रभारी विप्लब देब, प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ की मौजूदगी में इन नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। अरुण सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर यह नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में भाजपा के पक्ष में हवा बह रही है और विधानसभा चुनाव में उसकी जीत सुनिश्चित है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव के तहत पांच अक्टूबर को राज्य में मतदान होना है। निर्वाचन आयोग ने पहले मतदान की तारीख एक अक्टूबर मुकर्रर की थी लेकिन बिश्नोई समुदाय के सदियों पुराने त्योहार को ध्यान में रखते हुए शनिवार को उसने मतदान की तारीख में बदलाव की घोषणा की। आयोग ने कहा कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना अब चार अक्टूबर के बजाय आठ अक्टूबर को होगी।

सुभाष बराला को बबली ने हराया था विधानसभा चुनाव

देवेंद्र बबली ने पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा की खुलकर मदद की थी और उन्हें उम्मीद थी कि इसके एवज में उन्हें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट जरूर मिलेगा। हालांकि, इन उम्मीदों को झटका लगने के बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। बबली ने वर्ष 2019 में भी टोहाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट मांगा था लेकिन जब टिकट नहीं मिली तो उन्होंने जजपा का दामन थाम लिया था। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा की हरियाणा इकाई के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था। बराला, अब हरियाणा से भाजपा के राज्यसभा सदस्य हैं।

जजपा कोटे से बनाया गया था विकास एवं पंचायत मंत्री

बबली को जजपा कोटे से दिसंबर 2021 में राज्य सरकार में विकास एवं पंचायत मंत्री बनाया गया था। बाद में दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। कबलाना ने पिछले दिनों अपने समर्थकों के साथ जजपा को अलविदा कह दिया। उन्होंने वर्ष 2019 में बादली से जजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था।

जेल अधीक्षक के पद से सुनील सांगवान ने दिया था इस्तीफा

भाजपा में शामिल होने वाले सुनील सांगवान, हरियाणा के पूर्व राजस्व एवं सहकारिता मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे हैं। पिछले दिनों उन्होंने राजनीतिक पारी शुरु करने के लिए भौंडसी (गुरुग्राम) जेल अधीक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया था। विप्लब देब ने इस अवसर पर कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अच्छी जीत हासिल करेगी।

उन्होंने कहा कि रविवार को जींद में एक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित नेता भाजपा में शामिल हुए और यह संकेत है कि लोग राज्य में भाजपा की सरकार चाहते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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