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Jharkhand: हेमंत सोरेन ने राहुल और खड़गे से की मुलाकात, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

Election News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के मुद्दे पर अभी पेंच फंसा हुआ है।

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हेमंत सोरेन ने खड़गे और राहुल से की मुलाकात।

Jharkhand Politics: कांग्रेस और जेएमएम के बीच दरार की अटकलों पर खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पूर्णविराम लगा दिया है। पिछले कई दिनों से ये चर्चा हो रही थी कि क्या झारखंड में विपक्षी गठबंधन के बीच दरार पड़ने लगी है। इस बीच सूबे के सीएम हेमंत सोरेन ने मंगलवार को यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा की।

बैठक में चंपई सोरेन के मुद्दे पर हुई चर्चा?

यह बैठक झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के कुछ दिनों बाद हुई है। चंपई सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की वर्तमान कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए और पार्टी में अपने ‘अपमान’ का हवाला देते हुए पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया था।

खड़गे और गांधी से सोरेन ने की मुलाकात

हेमंत सोरेन ने यहां कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर खड़गे और गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल और सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी बैठक के दौरान मौजूद थीं। सोरेन ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट करार दिया लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की।

जब चंपई को नियुक्त किया गया था सीएम

हेमंत सोरेन के इस्तीफे और बाद में धन शोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी के बाद 2 फरवरी को चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था। जमानत मिलने से हेमंत सोरेन का फिर से मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया था। इसके चलते चंपई सोरेन को 3 जुलाई को अपना पद छोड़ना पड़ा था। कांग्रेस और झामुमो राज्य में गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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